सरकार ने सोमवार को सेमीकॉन 2.0 योजना को अधिसूचित किया और चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर निर्माण, उपकरण और सामग्री, उन्नत पैकेजिंग, शोध एवं विकास (आरऐंडडी) और प्रतिभा विकास से जुड़ी परियोजनाओं के लिए व्यापक पात्रता मानदंड और वित्तीय सहायता की रूपरेखा तैयार की।
यह योजना इस साल जुलाई में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 1,27,500 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ स्वीकृत की गई थी और इसे छह स्तंभों और 10 श्रेणियों के आधार पर तैयार किया गया है।
नए दिशानिर्देशों के तहत, सिलिकॉन वेफर फैब (संयंत्र) समान आधार पर पात्र पूंजीगत व्यय के 40 प्रतिशत की वित्तीय सहायता के लिए पात्र होंगे। अर्हता प्राप्त करने के लिए, एक 300-मिमी सिलिकॉन फैब में प्रति माह कम से कम 40,000 वेफर स्टार्ट्स की स्थापित क्षमता, न्यूनतम 20,000 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश और आवेदन से पहले के तीन वित्त वर्षों में से कम से कम एक में 7,500 करोड़ रुपये का न्यूनतम राजस्व होना चाहिए।
कंपाउंड सेमीकंडक्टर, फोटोनिक्स, सेंसर और डिस्क्रीट सेमीकंडक्टर फैब संयंत्रों के लिए, न्यूनतम पूंजी निवेश की सीमा 500 करोड़ रुपये है, जिसमें सरकारी सहायता पात्र पूंजीगत व्यय के 35 प्रतिशत पर निर्धारित है। दिशानिर्देशों में सेंसर/एमईएमएस फैब के लिए न्यूनतम 200 मिमी, कंपाउंड और डिस्क्रीट सेमीकंडक्टर फैब के लिए 150 मिमी और फोटोनिक्स अनुप्रयोगों के लिए 100 मिमी वेफर आकार तय किए गए हैं।
उद्योग विशेषज्ञों ने इस अधिसूचना का स्वागत किया है। ईवाई इंडिया में पार्टनर आयशा अली हुसैनी ने कहा, ‘सीड फंडिंग, को-इन्वेस्टमेंट, रॉयल्टी-लिंक्ड फाइनैंसिंग, पीएलआई और दूसरी वित्तीय सहायता के जरिये अहम क्षेत्रों में सरकार की लक्षित मदद से नवाचार, आईपी सृजन और जरूरी निर्माण में घरेलू क्षमताएं तेजी से बढ़ेंगी।’