भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अब सीमा पार केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) लेनदेन का दायरा बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। आरबीआई थोक और खुदरा दोनों तरह के लेनदेन के लिए सीमा पार सीबीडीसी तंत्र विकसित करने हेतु एशिया और यूरोप की कुछ विकसित अर्थव्यवस्थाओं सहित 4 से 5 देशों के केंद्रीय बैंकों के साथ बात कर रहा है। घटनाक्रम से अवगत सूत्रों ने इसकी जानकारी दी।
सूत्रों के अनुसार इससे धन प्रेषण की लागत घटने और सीमा पार लेनदेन पर फिलहाल विभिन्न स्तरों पर मौजूद जांच में ढील मिलने की उम्मीद है। यह भारत के लिए विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है क्योंकि देश में बड़े पैमाने पर विदेश से पैसे भेजे जाते हैं। भारत धन प्रेषण प्राप्त करने वाले प्रमुख देशों में से एक है।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत को कुल प्राप्त धनप्रेषण में अमेरिका की हिस्सेदारी 27.7 फीसदी, यूएई की 19.2 फीसदी, ब्रिटेन की 10.8 फीसदी, सऊदी अरब की 6.7 फीसदी और सिंगापुर की 6.6 फीसदी है।
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष में अभी तक विदेश में रहने वाले भारतीयों ने 107 अरब डॉलर से अधिक रकम भेजी हैं। वित्त वर्ष 2025 में यह रकम रिकॉर्ड 132 अरब डॉलर और वित्त वर्ष 2024 में 117 अरब डॉलर से अधिक थी।
सूत्रों ने कहा कि आरबीआई खुदरा और थोक दोनों क्षेत्रों में सीबीडीसी के विभिन्न उपयोग मामलों का परीक्षण कर रहा है लेकिन इसे अभी तक पूरी तरह से शुरू नहीं किया गया है। केंद्रीय बैंक सीबीडीसी को व्यापक तौर पर शुरू करने में सतर्कता बरत रहा है। सीमा पार लेनदेन के लिए सीबीडीसी प्रणाली विकसित करने हेतु विभिन्न देशों के साथ काम किया जा रहा है।
आरबीआई का रुख है कि सीबीडीसी को व्यापक स्तर पर पेश करने की कोई जल्दबाजी नहीं है क्योंकि इसके प्रभावी उपयोग यानी सीमा पार भुगतान के प्रभावी ढंग से काम करने के लिए यह जरूरी है कि अन्य देशों भी सीबीडीसी को एक साथ पेश करें।
आरबीआई ने नवंबर 2022 में सीबीडीसी के थोक सेगमेंट में परीक्षण शुरू किया था और उसी वर्ष दिसंबर में खुदरा सीबीडीसी पर भी परीक्षण शुरू कर दिया। हाल ही में केंद्रीय बैंक ने कहा कि खुदरा सीबीडीसी लेन-देन की संख्या 12 करोड़ पार कर गई है, जिसका कुल मूल्य अब तक 28,000 करोड़ रुपये से अधिक है।
आरबीआई ने कहा है कि खुदरा सीबीडीसी परीक्षण में प्रगति अपेक्षा के अनुरूप है जिसमें प्रोग्राम करने की क्षमता, राज्य और केंद्र सरकारों के साथ समन्वय, बैंकों के लिए विशेष उत्पाद और सीमा-पार भुगतान को सक्षम करने पर चल रहा काम शामिल है। वर्तमान में 80 लाख से अधिक उपयोगकर्ता सीबीडीसी का उपयोग कर रहे हैं।
सीबीडीसी केंद्रीय बैंक द्वारा जारी की गई डिजिटल मुद्रा है। यह संप्रभु कागजी मुद्रा के समान है लेकिन इसका रूप अलग होता है और यह मौजूदा मुद्रा के बराबर विनिमय योग्य है। सीबीडीसी केंद्रीय बैंक की बैलेंस शीट पर देनदारियों के रूप में दिखाई देता है।
निजी डिजिटल मुद्राओं के विकास के बीच आरबीआई सीबीडीसी के सीमा पार लेन-देन का समर्थक रहा है। आरबीआई ने क्रिप्टो परिसंपत्तियों, जिसमें स्टेबलकॉइन भी शामिल हैं, के बारे में बार-बार आगाह किया है।
दिसंबर 2025 में जारी वित्तीय स्थायित्व रिपोर्ट में आरबीआई ने कहा कि वह स्टेबलकॉइन सहित क्रिप्टो परिसंपत्तियों पर सतर्क रुख बनाए हुए है और वैश्विक बदलावों के बीच मौद्रिक संप्रभुता की रक्षा के लिए संप्रभु डिजिटल अवसंरचना को प्राथमिकता दे रहा है। केंद्रीय बैंक ने इस बात पर भी जोर दिया कि मुद्रा में विश्वास बनाए रखने और वित्तीय स्थिरता के लिए देशों को स्टेबलकॉइन की जगह केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं (सीबीडीसी) को प्राथमिकता देनी चाहिए।
इसके अतिरिक्त आरबीआई ने कहा कि केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राएं (सीबीडीसी) वे सभी लाभ प्रदान कर सकती हैं जिनका दावा स्टेबलकॉइन करते हैं लेकिन इसमें विश्वसनीयता और सुरक्षा भी शामिल है।
अक्टूबर 2025 में आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वाशिंगटन में वर्ल्ड बैंक समूह और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की वार्षिक बैठक में अंतरराष्ट्रीय भुगतान को सुविधाजनक बनाने के लिए केंद्रीय बैंकों से स्टेबलकॉइन के बजाय सीबीडीसी का उपयोग करने और बढ़ावा देने का आग्रह किया था।
उन्होंने कहा था, ‘जब तक अन्य देश भी सीबीडीसी को नहीं अपनाते, तब तक हमें सीबीडीसी के लाभ सीमा पार भुगतानों के संबंध में नहीं दिखेंगे। इसलिए मैं केंद्रीय बैंकों से आग्रह करूंगा कि हमें सीबीडीसी को बढ़ावा देने की आवश्यकता है क्योंकि स्टेबलकॉइन की तुलना में इसके व्यापक फायदे हैं।’