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चार साल में पहली बार इतना घटेगा रूसी तेल आयात, क्या बदल रही है भारत की रणनीति?

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अप्रैल में रखरखाव और रणनीतिक कारणों से भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात चार साल के निचले स्तर पर पहुंच सकता है।

Last Updated- March 01, 2026 | 3:05 PM IST
Russian imports set to hit 4-year low amid tariff chaos, refinery shutdown
Representative Image

भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद अप्रैल महीने में तेज गिरावट के साथ चार वर्षों के सबसे निचले स्तर पर आ सकती है। उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, यह कमी ऐसे समय में देखने को मिल सकती है जब एक ओर रिफाइनरियां केंद्र सरकार से आगे की रणनीति पर स्पष्ट संकेत का इंतजार कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर देश की दूसरी सबसे बड़ी निजी रिफाइनरी निर्धारित रखरखाव के लिए अस्थायी रूप से बंद होने जा रही है।

फरवरी 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी थी। इसके बाद भारत ने रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई थी। लेकिन अब परिस्थितियां बदलती नजर आ रही हैं।

उद्योग के जानकारों के मुताबिक मार्च में रूस से कच्चे तेल का आयात औसतन 8 लाख से 10 लाख बैरल प्रतिदिन के बीच रह सकता है। हालांकि अप्रैल में यह मात्रा घटकर 5 लाख बैरल प्रतिदिन से भी नीचे जा सकती है। शिपिंग क्षेत्र के एक विश्लेषक और रिफाइनिंग सेक्टर के वरिष्ठ अधिकारियों ने संकेत दिया है कि अप्रैल में गिरावट मुख्य रूप से एक बड़ी रिफाइनरी के बंद रहने के कारण होगी।

रूस की प्रमुख तेल कंपनी Rosneft के नियंत्रण वाली Nayara Energy गुजरात के वाडिनार में प्रतिदिन लगभग 4 लाख बैरल क्षमता वाली रिफाइनरी संचालित करती है। सूत्रों के अनुसार यह रिफाइनरी अप्रैल की शुरुआत में एक महीने से अधिक समय के लिए पूर्ण रखरखाव कार्यक्रम के तहत बंद रहेगी। इस बंदी के दौरान उतनी ही मात्रा में रूसी कच्चे तेल की मांग घट जाएगी। कंपनी की ओर से इस विषय पर आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी है।

विश्लेषकों का मानना है कि मार्च में आयात का स्तर करीब 8 लाख बैरल प्रतिदिन के आसपास बना रह सकता है, लेकिन अप्रैल 2026 में इसमें तेज गिरावट देखने को मिलेगी। हालांकि यह स्थिति स्थायी नहीं मानी जा रही। सूत्रों का कहना है कि भारत और रूस के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद आयात दोबारा बढ़ सकता है। यह समझौता कुछ समय से लंबित है। देरी का एक कारण यह भी बताया जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की ओर से लगाए गए कुछ टैरिफ अधिकारों को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीमित किए जाने के बाद वैश्विक व्यापार पर अनिश्चितता बढ़ी है।

फरवरी में रूस से लगभग 7 लाख 27 हजार बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल लोड किया गया था, जो मार्च में भारत पहुंचने के लिए निर्धारित है। इसके अलावा अरब सागर में कई टैंकरों में रूसी तेल का भंडार मौजूद है। एक वरिष्ठ ट्रेडर के अनुसार, इन टैंकरों में रखा गया तेल भारतीय रिफाइनरियों को कम समय के नोटिस पर अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्ध करा सकता है।

ऊर्जा बाजार के जानकारों का मानना है कि अप्रैल में आयात में संभावित गिरावट का असर घरेलू ईंधन आपूर्ति पर सीमित रहेगा, क्योंकि भारत ने विभिन्न स्रोतों से तेल खरीद की रणनीति अपनाई हुई है। फिर भी रूस से आयात में कमी वैश्विक ऊर्जा समीकरणों और भारत की खरीद नीति पर असर डाल सकती है।

रूस पर लगाए गए पश्चिमी प्रतिबंधों का असर अब वैश्विक तेल कारोबार में साफ दिखाई देने लगा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल का आयात अप्रैल 2022 के बाद पहली बार 5 लाख बैरल प्रतिदिन से नीचे दर्ज किया गया था। यह वही समय था जब यूक्रेन पर रूसी हमले के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी उथल पुथल देखने को मिली थी।

अब एक बार फिर आयात में कमी की आशंका जताई जा रही है। दरअसल, नायरा एनर्जी की रिफाइनरी के बंद होने से रूस से आने वाले मीडियम और सौर ग्रेड के यूराल्स कच्चे तेल की आपूर्ति में करीब 4 लाख बैरल प्रतिदिन की कमी आ सकती है। शिप ट्रैकिंग आंकड़ों के अनुसार यह कटौती सीधे तौर पर भारत के कुल आयात को प्रभावित करेगी।

नायरा एनर्जी पर पिछले वर्ष यूरोपीय संघ द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बाद कंपनी के सामने कच्चे तेल की आपूर्ति का संकट गहरा गया था। प्रतिबंधों के कारण कंपनी को खाड़ी देशों और पश्चिमी वैश्विक ट्रेडिंग फर्मों से दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों तक पहुंच खोनी पड़ी। ऐसे में कंपनी को अपने रूसी मूल कंपनी से मिलने वाले तेल पर निर्भर रहना पड़ा।

आंकड़ों के मुताबिक जनवरी में नायरा ने रूस से लगभग 4 लाख 10 हजार बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात किया था, जबकि फरवरी में यह घटकर करीब 3 लाख 66 हजार बैरल प्रतिदिन रह गया। यह गिरावट बताती है कि आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।

ब्रिटेन स्थित ऊर्जा सूचना प्रदाता कंपनी एनर्जी इंटेलिजेंस का कहना है कि रूसी कच्चे तेल के प्रवाह को सीमित करने के लिए पश्चिमी देशों द्वारा उठाए गए कदम अब असर दिखाने लगे हैं। फरवरी में वैश्विक स्तर पर रूस के तेल निर्यात का औसत 27 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जो जनवरी में 34 लाख बैरल प्रतिदिन था। इस गिरावट की मुख्य वजह भारत द्वारा आयात में कमी को माना जा रहा है।

रूसी तेल की खरीद में सुस्ती, लेकिन पूरी तरह बंद नहीं हुए आयात

सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार ने पिछले महीने देश की रिफाइनरियों को अनौपचारिक रूप से संकेत दिया था कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होने तक रूसी तेल की अतिरिक्त खरीद को सीमित रखा जाए। इसके बावजूद भारतीय कंपनियां अपनी कुल आयात आवश्यकता का लगभग 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा रूस से ही लेती रहीं।

उद्योग से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इस दौरान वाशिंगटन की ओर से किसी प्रकार का प्रत्यक्ष हस्तक्षेप नहीं हुआ। हालांकि फरवरी से खरीद में क्रमिक कमी देखने को मिली है और मार्च तथा अप्रैल में इसमें और गिरावट आने की संभावना जताई जा रही है।

सरकारी कंपनियों की खरीद में बदलाव

सरकारी कंपनी Indian Oil Corporation ने जनवरी में रूस से करीब 5 लाख 60 हजार बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा, जो जुलाई 2023 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था। वहीं Bharat Petroleum Corporation Limited ने नवंबर में बुक किए गए सौदों के तहत जनवरी में लगभग 2 लाख 22 हजार बैरल प्रतिदिन आयात किया।

फरवरी में इन खरीदों में 20 से 25 प्रतिशत तक की कटौती की गई। दिलचस्प बात यह है कि रूसी तेल पर मिलने वाली छूट बढ़कर ब्रेंट के मुकाबले 12 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो 2023 के बाद सबसे अधिक है। इसके बावजूद आयात घटाने का निर्णय लिया गया।

सरकार का रुख

पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri पहले भी कई बार कह चुके हैं कि सरकार कच्चे तेल की खरीद में सीधे दखल नहीं देती और कंपनियां व्यावसायिक आधार पर फैसले लेती हैं। इस विषय पर मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है।

उधर म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने कहा कि भारत ने अतिरिक्त रूसी तेल खरीद को सीमित रखने का आश्वासन दिया है। इसी कार्यक्रम में भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने रणनीतिक स्वायत्तता की नीति को दोहराते हुए कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर ऊर्जा संबंधी निर्णय लेता है।

फरवरी में गिरावट

शिपिंग डेटा के अनुसार फरवरी में रूस से आयात घटकर 11 लाख 20 हजार बैरल प्रतिदिन रह गया, जो नवंबर 2022 के बाद का सबसे निचला स्तर है। यह जनवरी की तुलना में 6 प्रतिशत और पिछले वर्ष की तुलना में 24 प्रतिशत कम है। फरवरी में Indian Oil Corporation रूस से सबसे अधिक तेल खरीदने वाली कंपनी रही, जिसने लगभग 4 लाख 20 हजार बैरल प्रतिदिन आयात किया।

निजी क्षेत्र की रणनीति

निजी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी Reliance Industries ने जनवरी में यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों के चलते रूसी तेल की खरीद अस्थायी रूप से रोक दी थी। फरवरी में उसने फिर से आयात शुरू किया और पांच कार्गो खरीदे, जो लगभग 1 लाख 32 हजार बैरल प्रतिदिन के बराबर है। यह उसकी 2025 की औसत खरीद 5 लाख 95 हजार बैरल प्रतिदिन से काफी कम है।

सूत्रों के मुताबिक कंपनी की दोनों रिफाइनरियों के लिए अलग पाइपलाइन और सिंगल बुआय मोरिंग प्रणाली है। रूसी तेल को फिलहाल घरेलू क्षेत्र में स्थित यूनिट तक सीमित रखा जा रहा है ताकि विशेष आर्थिक क्षेत्र में स्थित संयंत्र पर यूरोपीय प्रतिबंधों का असर न पड़े।

रूस की स्थिति बरकरार

फरवरी में भी रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना रहा। लगातार 45 महीनों से वह यह स्थान बनाए हुए है। हालांकि कुल आयात में उसकी हिस्सेदारी घटकर 21 प्रतिशत रह गई है, जो एक वर्ष पहले 31 प्रतिशत और मई 2023 में 46 प्रतिशत थी। फरवरी में भारत का कुल कच्चा तेल आयात रिकॉर्ड 53 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियां और व्यापारिक समझौते भारत की आयात नीति को प्रभावित कर सकते हैं। फिलहाल भारत संतुलन की नीति अपनाते हुए अपने ऊर्जा हितों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बीच तालमेल बनाने की कोशिश कर रहा है।

कंपनी / माह नवंबर* दिसंबर जनवरी फरवरी 2025 औसत
रिलायंस 575 316 0 131 595
नायरा 408 329 410 364 302
इंडियन ऑयल 392 483 560 420 315
भारत पेट्रोलियम 191 119 222 175 187
एचएमईएल 116 27 0 0 153
एमआरपीएल 118 0 0 0 109
कुल आयात (हजार बैरल/दिन) 1858 1274 1192 1117 1728

सोर्स: Kpler, हजार बैरल प्रतिदिन
टिप्पणी: *नवंबर में अमेरिकी कड़े प्रतिबंध लागू हुए।

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First Published - March 1, 2026 | 2:58 PM IST

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