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संकट के बीच भी नहीं घटेगा प्रवासियों से आने वाला पैसा, RBI ने जताई उम्मीद

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रिजर्व बैंक के आंकड़ों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2025-26 में विदेश में रहने वाले भारतीयों ने अब तक 107 अरब डॉलर से अधिक धन भेजा है।

Last Updated- April 09, 2026 | 8:46 AM IST
remittances

भारतीय रिजर्व बैंक की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने मौद्रिक नीति की बैठक के बाद प्रेस कान्फ्रेंस में कहा कि मौजूदा संघर्ष के बावजूद पश्चिम एशिया से प्रवासियों के धनप्रेषण में कमी आने की कोई संभावना नहीं है, क्योंकि इस क्षेत्र में प्रवासी कामगारों की मांग बढ़ने की संभावना है। इससे धन की आवक को सहारा मिल सकता है।

उन्होंने कहा कि धनप्रेषण कई इलाकों से हो रहा है। इसमें खाड़ी देशों की हिस्सेदारी समय के साथ घट रही है। उन्होंने कहा कि विविधता प्रवासी श्रमिकों के कौशल से भी जुड़ी हुई है। विभिन्न देशों में निम्न, मध्यम और उच्च कुशल श्रमिक काम कर रहे हैं। ये सभी धनप्रेषण में योगदान देते हैं।

गुप्ता ने कहा, ‘अगर संकट जल्द हल हो जाता है तो हम गिरावट की उम्मीद नहीं कर रहे हैं। हम उम्मीद करते हैं कि असल में इस क्षेत्र से प्रवासी कामगारों की मांग बढ़ेगी, जिससे धनप्रेषण में और मदद मिलेगी।’ इस बीच, गवर्नर मल्होत्रा ने अपने मौद्रिक नीति बयान में कहा है कि कमजोर वैश्विक वृद्धि के कारण बाहरी मांग घट सकती है और धनप्रेषण में कमी आ सकती है।

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेन गुप्ता ने कहा, ‘दो संभावनाएं है। लोग एहतियाती उपाय के तौर पर अपना पैसा वापस भेज सकते हैं या वे संकट के कारण घर लौट सकते हैं। हमें लगता है कि दीर्घावधि में इसका असर अधिक हो सकता है।’

उन्होंने कहा, ‘कोविड के बाद अमेरिका, यूरोप, सिंगापुर में बड़ी संख्या में श्रमिक गए। इसकी वजह से इन इलाकों से धन की आवक बढ़ी। इस समय श्रमिकों द्वारा भेजे गए धन में सबसे अधिक 27.7 प्रतिशत हिस्सेदारी अमेरिका की है। गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) का हिस्सा घटकर 33.8 प्रतिशत रह गया है। ब्रिटेन का हिस्सा बढ़कर 10.8 प्रतिशत और सिंगापुर का 6.6 प्रतिशत हो गया है।’

अर्थशास्त्रियों ने कहा कि समय के साथ कुल धनप्रेषण में जीसीसी का हिस्सा कम हो सकता है, लेकिन इससे समग्र धनप्रेषण पर कोई असर नहीं पड़ेगा। रिजर्व बैंक ने कहा कि भारत का बाहरी क्षेत्र मजबूत सेवा निर्यात और स्थिर धनप्रेषण की आवक की मदद से बेहतर बना हुआ है। इस वजह से वित्त वर्ष 2025-26 में चालू खाते के घाटे के टिकाऊ स्तर पर बने रहने की संभावना है। रिजर्व बैंक के आंकड़ों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2025-26 में विदेश में रहने वाले भारतीयों ने अब तक 107 अरब डॉलर से अधिक धन भेजा है।

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First Published - April 9, 2026 | 8:46 AM IST

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