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विशेष नकदी योजना के लिवाल कम

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Last Updated- December 14, 2022 | 11:06 PM IST

छोटी और मझोली वित्त कंपनियों से केंद्र सरकार की विशेष नकदी योजना को सुस्त प्रतिक्रिया मिल रही है। इसकी वजह कारोबार कासमेकन, कड़े पात्रता नियम और कम समयावधि है। गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की वसूली कम होने की वजह से नकदी के संकट और कर्ज के भुगतान का बोझ बढऩे के बावजूद ऐसा हुआ है।
इस योजना के तहत कर्जदाताओं को तीन महीने के लिए नकदी मुहैया कराने को कहा गया है। योजना के लिए 30,000 करोड़ रुपये तय किए गए हैं। केंद्र सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक योजना के तहत 11,120 करोड़ रुपये के 39 प्रस्तावों को मंजूरी मिली है। इसमें से 7,227 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं, जबकि 182 करोड़ रुपये नहीं लिया गया। शेष जारी 3,707 करोड़ रुपये की अवधि खत्म हो गई है।  
योजना के तहत एनबीएफसी, हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों (एचएफसी) और माइक्रोफाइनैंस इंस्टीट्यूशन के निवेश ग्रेड ऋण पत्र में प्राथमिक और द्वितीयक दोनों ही लेन देन में निवेश किया जाना था। और सभी ऋणपत्र इस विशेष नकदी योजना के माध्यम से खरीदे जाने हैं, जिस पर सरकार की गारंटी होगी।
इस योजना को लागू करने के लिए विशेष उद्देश्य इकाई गठित करने की जिम्मेदारी एसबीआई कैप को दी गई थी। एसपीवी को दबाव वाली संपत्ति कोष (एसएएफ) का प्रबंधन करना है।  इस प्रक्रिया का मतलब यह था कि एपएएफ एनबीएफसी और एचएफसी के बॉन्ड खरीदेगी, जिसकी परिपक्वता 3 महीने होगी।  विशेषज्ञों ने पहले ही इस योजना को लेकर आशंका जताई थी। खासकर कम अवधि को लेकर, जिसके लिए धन मुहैया कराया जाना है।
यह सेक्टर उम्मीद कर रहा था कि कम से कम 3 साल के लिए धन मुहैया कराया जाएगा। छोटे एनबीएफसी ज्यादातर बैंकों पर धन के लिए निर्भर होते हैं और विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरीके से धन मुहैया कराने से मकसद हल नहीं होता है।
इक्रा के वाइस प्रेसीडेंट और सेक्टर हेड (वित्तीय क्षेत्र रेेटिंग) अनिल गुप्ता ने कहा, ‘हकीकत यह है कि बहुत से एनबीएफसी ने विशेष नकदी योजना के तहत धन स्वीकार नहीं किया’
आधार हाउसिंग फाइनैंस के एमडी और सीईओ देव शंकर त्रिपाठी ने कहा कि जिन्हें नकदी का बहुत संकट था, उन्होंने ही इस योजना का विकल्प चुना है।

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First Published - October 4, 2020 | 11:19 PM IST

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