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बिजली और रेलवे में बढ़त के रुझान

Last Updated- December 15, 2022 | 2:31 AM IST

पिछले हफ्ते की तुलना में बिजली उत्पादन के आंकड़ों और भारतीय रेलवे द्वारा माल ढुलाई की तादाद ने आर्थिक गतिविधियों में सुधार के संकेत दिए। अन्य साप्ताहिक संकेतकों जिनका बिज़नेस स्टैंडर्ड जायजा लेता है उनमें ज्यादा मिले-जुले रुझान दिखते हैं। गूगल मोबिलिटी डेटा, यातायात के आंकड़े और प्रदूषण के आंकड़ों का जायजा अर्थव्यवस्था की जमीनी तस्वीर देने के लिए लिया जाता है जो सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) जैसे वृहद आर्थिक आंकड़े के जारी होने से पहले मिलता है। जीडीपी के आंकड़े एक निश्चित अंतराल के साथ जारी किए जाते हैं। कोविड-19 महामारी को नियंत्रित करने के लिए लॉकडाउन के बीच अर्थव्यवस्था पर नजर रखने के लिए दुनिया भर के विश्लेषकों की नजर इन संकेतकों पर है। गूगल के आंकड़ों को छोड़कर सभी डेटा रविवार तक के हैं क्योंकि गूगल के आंकड़े एक अंतराल के साथ दिखाई देते हैं।
सात दिनों के कुल औसत बिजली उत्पादन के आंकड़ों से पता चलता है कि भारत 2019 में इस्तेमाल की गई बिजली के 98 फीसदी हिस्से का उत्पादन कर रहा है। हालांकि लॉकडाउन के दौरान यह 71.3 फीसदी के स्तर पर चला गया क्योंकि कारखाने और दफ्तर बंद थे और औद्योगिक गतिविधि जमीन पर ही थम गई थी। पिछले सप्ताह की तुलना में यह एक बढ़ता रुझान है।
भारतीय रेलवे ने भी रविवार को समाप्त हुए सप्ताह में अधिक माल की ढुलाई की जो पिछले साल इसी हफ्ते में की गई ढुलाई के मुकाबले अधिक था। पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले इसने माल ढुलाई से अधिक कमाई भी की।
राष्ट्रीय स्तर के रुझान सकारात्मक थे लेकिन प्रमुख शहरों में कुछ अंतर नजर आया। लोकेशन तकनीक कंपनी टॉम टॉम इंटरनैशनल के डेटा के मुताबिक मुंबई में यातायात पिछले सप्ताह उच्च स्तर पर था। यह अब भी दिल्ली में देखे गए सुधार के मुकाबले काफी कम है।
प्रदूषण के आंकड़ों में अंतर और भी स्पष्ट है। बिज़नेस स्टैंडर्ड नाइट्रोजन डाइऑक्साइड के स्तर का जायजा लेता है। औद्योगिक गतिविधि और गाडिय़ों के उत्सर्जन से नाइट्रोजन डाइऑक्साइड हवा में फैलता है। 2019 की तुलना में मुंबई का उत्सर्जन 87 प्रतिशत कम है जबकि दिल्ली में इस गैस का स्तर केवल 18 प्रतिशत ही कम है।
गूगल की मोबिलिटी रिपोर्ट से अंदाजा मिलता है कि लोगों के दफ्तर या कार्यस्थल पर जाने की तादाद में मामूली गिरावट देखी गई है। सर्च इंजन सामान्य समय के अनुपात में लोगों की आवाजाही का अंदाजा लगाने के लिए किसी भी अनाम जगह के डेटा को देखता है। सात दिन के रोलिंग औसत आधार की आधार वैल्यू की तुलना में 1 सितंबर, 2020 तक कार्यस्थलों पर लोगों की जाने की तादाद में 29.57 फीसदी तक की कमी आई।
संकटपूर्ण जून की तिमाही के बाद अर्थव्यवस्था ने बड़े उलटफेर के साथ एक अस्थिर रिकवरी का संकेत दिया है। सरकार द्वारा 31 अगस्त को जारी आंकड़ों के मुताबिक जीडीपी में 23.9 प्रतिशत की गिरावट आई। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने सोशल मीडिया मंच ट्विटर पर कहा कि अर्थव्यवस्था में तेजी की उम्मीद है लेकिन यह साल बड़ी गिरावट के साथ खत्म होगा।

First Published - September 7, 2020 | 11:21 PM IST

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