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ग्लोबल ट्रेड वार का असर, फिच ने घटाया भारत का GDP ग्रोथ अनुमान; FY26 में 6.4% रहने की उम्मीद

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फिच ने मार्च के अपने जीईओ में 2025 के विश्व वृद्धि अनुमान में 0.4% की कटौती की। चीन और अमेरिका के वृद्धि अनुमान को 0.5% घटाया।

Last Updated- April 17, 2025 | 12:25 PM IST
India GDP Growth

India GDP growth: ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने ग्लोबल ट्रेड वार बढ़ने की आशंकाओं के बीच भारत के वृद्धि अनुमान को घटा दिया है। फिच रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत के सकल घरेल उत्पाद (GDP) के ग्रोथ रेट अनुमान को घटाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया है।

रेंटिंग एजेंसी फिच ने वैश्विक आर्थिक आउटलुक (जीईओ) के अपने विशेष तिमाही ‘अपडेट’ में कहा, ‘‘ अमेरिकी व्यापार नीति के बारे में पूरे विश्वास के साथ कुछ भी कहना मुश्किल है। व्यापक स्तर पर नीति अनिश्चितता, व्यापार निवेश की संभावनाओं को नुकसान पहुंचा रही हैं। शेयर की कीमतों में गिरावट से घरेलू संपत्ति कम हो रही है और अमेरिकी निर्यातकों को जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।’’

चीन-अमेरिका का वृद्धि अनुमान भी घटाया

फिच ने चीन और अमेरिका के वृद्धि अनुमान को भी घटा दिया। उसने मार्च के अपने जीईओ में 2025 के विश्व वृद्धि अनुमानों में 0.4 प्रतिशत की कटौती की। चीन और अमेरिका के वृद्धि अनुमान को 0.5 प्रतिशत घटाया।

रेंटिंग एजेंसी ने भारत के संदर्भ में वित्त वर्ष 2024-25 और चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि अनुमान को घटाकर क्रमश: 6.2 प्रतिशत और 6.4 प्रतिशत कर दिया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत पर बरकरार रखी है।

फिच के अनुमानों के अनुसार, अमेरिका की जीडीपी वृद्धि दर 2025 तक 1.2 प्रतिशत पर पॉजिटिव रहने की उम्मीद है। चीन की वृद्धि दर इस वर्ष और अगले वर्ष चार प्रतिशत से नीचे रहने का अनुमान है, जबकि यूरोक्षेत्र में वृद्धि एक प्रतिशत से काफी नीचे बनी रहेगी।

Moody’s ने भी भारत का ग्रोथ अनुमान घटाया

मूडीज रेटिंग्स ने अमेरिका के नए सिलसिलेवार शुल्कों के मद्देनजर कैलेंडर वर्ष 2025 के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि का अनुमान बुधवार (16 अप्रैल) को घटाकर 5.5 से 6.5 फीसदी कर दिया जबकि उसने फरवरी में 6.6 फीसदी वृद्धि का अनुमान लगाया था।

रेटिंग एजेंसी ने अपनी शुल्क और व्यापार अशांति पर अपनी रिपोर्ट में कहा कि ट्रंप शुल्क से वैश्विक व्यापार गतिविधियों पर असर पड़ेगा। इन शुल्कों से क्षेत्रीय निर्यात की मांग घटेगी। इससे व्यापारिक आत्मविश्वास भी घटेगा। लिहाजा एशिया प्रशांत क्षेत्र में निवेश घटेगा। यह अनुमान दूसरे देशों के लिए 10 फीसदी के बुनियादी शुल्क और चीन पर 145 फीसदी शुल्क के परिदृश्य को ध्यान में रखकर संशोधित किया गया है।

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First Published - April 17, 2025 | 12:21 PM IST

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