facebookmetapixel
एक भारत, श्रेष्ठ भारत का जीवंत प्रतीक है काशी-तमिल संगममसरकारी दखल के बाद भी ‘10 मिनट डिलिवरी’ का दबाव बरकरार, गिग वर्कर्स बोले- जमीनी हकीकत नहीं बदलीभारतीय सिनेमा बनी कमाई में ‘धुरंधर’; बॉक्स ऑफिस कलेक्शन ₹13,397 करोड़, गुजराती और हिंदी फिल्मों ने मचाया धमालInfosys ने बढ़ाया रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान, डील पाइपलाइन मजबूत; मुनाफा नई श्रम संहिता से दबाव मेंस्मार्टफोन निर्यात में भारत का नया रिकॉर्ड, 2025 में 30 अरब डॉलर के पार; iPhone की 75% हिस्सेदारीQ3 Results: Groww का मुनाफा 28% घटा, लेकिन आय बढ़ी; HDFC AMC का लाभ 20% उछलासोना-चांदी के रिकॉर्ड के बीच मेटल शेयर चमके, वेदांत और हिंदुस्तान जिंक ने छुआ नया शिखरमहंगाई नरम पड़ते ही सोना रिकॉर्ड पर, चांदी पहली बार 90 डॉलर के पारकमाई के दम पर उड़ेगा बाजार: इलारा कैपिटल का निफ्टी के लिए 30,000 का टारगेटम्युचुअल फंड्स में डायरेक्ट प्लान का जलवा, 2025 में AUM 43.5% बढ़ा

कंटेनर के भाड़े पर सीसीआई से संपर्क कर सकते हैं निर्यातक

Last Updated- December 12, 2022 | 1:48 AM IST

लॉजिस्टिक्स लागत बढऩे और कंटेनरों की आपूर्ति कम होने से निर्यातकों के कारोबार की प्रतिस्पर्धा घट रही है। ऐसे में निर्यातकों का एक समूह भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) से संपर्क करने पर विचार कर रहा है, जिससे शिपिंग कं पनियों की संभावित गुटबंदी (कार्टेलाइजेशन) पर विचार किया जा सके।
निर्यातक सरकार से यह भी मांग करेंगे कि भारत में शिपिंग लाइंस को नियमन के दायरे में लाया जाए। इसके पहले अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने फेडरल मैरीन कमीशन को निर्देश दिया है कि शिपिंग सेक्टर के ‘अन्यायपूर्ण और अतार्किक शुल्क’ पर लगाम लगाई जाए। जहाजरानी महानिदेशालय (डीजीएस) के अनुमान से पता चलता है कि देश में 2021 में कंटेनरों की आपूर्ति में 15 प्रतिशत गिरावट आई है। यह कमी शिप कॉल्स, जगह के भंडारण और मालभाड़े में तेज बढ़ोतरी जैसी कई वजहों से आई है। संकट पिछले साल शुरू हुई, जब महामारी के कारण आयात और निर्यात की मात्रा में अंतर की वजह से भारत के बंदरगाहों पर निर्यात के लिए कंटेनरों की समस्या हो गई। 
कोच्चि मुख्यालय वाले सीफूड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (एसईएआई) के सचिव इलियास सेंट ने कहा, ‘यह साफ साफ कार्टलाइजेशन का मामला है। माल ढुलाई की दरों में वृद्धि का कुछ तर्क होना चाहिए, खासकर अमेरिका के मामले में। हमसे कहा गया था कि फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) इस सिलसिले में एक रिपोर्ट तैयार कर रहा है। हम इस रिपोर्ट का परिणाम आने के बाद सीसीआई से संपर्क पर विचार कर रहे हैं।’ 

उद्योग संगठन के मुताबिक अमेरिका का मालभाड़ा 3 गुने से ज्यादा बढ़कर मार्च, 2020 के 3,500 डॉलर प्रति 40 फुट रीफर कंटेनर से बढ़कर अब 15,000 डॉलर पर पहुंच चुका है। एसईएआई के आंकड़ों के मुताबिक भारत का कुल समुद्री उत्पादों का सालाना निर्यात 45,000 करोड़ रुपये है, जिसमें 32 प्रतिशत अमेरिका को भेजा जाता है।

First Published - August 19, 2021 | 12:10 AM IST

संबंधित पोस्ट