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सस्ते फोन को चिप किल्लत का झटका

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Last Updated- December 12, 2022 | 1:08 AM IST

चिप डिजाइन एवं विनिर्माण करने वाली प्रमुख वैश्विक कंपनियों का कहना है कि भारत को मोबाइल उपकरणों के लिए कम से कम अगले छह महीने तक चिप किल्लत का सामना करना पड़ सकता है। इससे सस्ते 4जी फोन विनिर्माताओं को तगड़ा झटका लगेगा क्योंकि वे अधिक नैनोमीटर वाले सस्ते चिप का उपयोग करते हैं जिसकी आपूर्ति काफी कम हो गई है।
रिलायंस जियो ने चिप किल्लत का हवाला देते हुए कहा है कि वह दीवाली से पहले अपने 4जी स्मार्टफोन के लॉन्च करने की योजना को फिलहाल स्थगित कर रही है। मुकेश अंबानी ने पिछली वार्षिक आम बैठक में घोषणा की थी कि कंपनी 10 सितंबर अपने स्मार्टफोन को लॉन्च करेगी। कंपनी ने गूगल के सहयोग के साथ मिलकर 5,000 से कम कीमत वाले 4जी फोन को बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है।

एक वैश्विक चिप कंपनी के सीईओ ने कहा, ‘हमारा मानना है कि चिप की किल्लत अगले छह महीने तक रहेगी। इसका सबसे अधिक झटका सस्ते 4जी स्मार्टफोन विनिर्माताओं को लगेगा क्योंकि वे 40 से अधिक के उच्च नैनोमीटर वाले चिप का उपयोग करते हैं जिसका उत्पादन सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। दरअसल चिप विनिर्माता महंगे फोन के लिए उपयुक्त कम नैनोमीटर वाले चिप बनाने पर जोर दे रहे हैं। वे 14 से नीचे 10 तक और यहां तक कि 6 नैनोमीटर तक के चिप बना रहे हैं।’
चिप विनिर्माताओं का कहना है कि 10,000 रुपये से कम कीमत वाले 4जी स्मार्टफोन में मझोली और ऊपरी श्रेणी के स्मार्टफोन के मुकाबले उच्च नैनोमीटर वाले चिप का इस्तेमाल किया जाता है। महंगे फोन की मांग बढऩे के कारण फैब संयंत्र कम नैनोमीटर वाले चिप का उपयोग करते हैं जो बेहतर मार्जिन और राजस्व हासिल होता है।

बाजार में ऐसे चिप की कमी नहीं है जिनका इस्तेमाल 5जी फोन में किया जाता है। वैश्विक स्तर पर 5जी स्मार्ट फोन का उपयोग बढ़ रहा है और इस साल के अंत तक उसका आंकड़ा 60 करोड़ के पार पहुंचने की उम्मीद है। क्वालकॉम के आकलन के अनुसार, साल 2021 के अंत तक देश के स्मार्टफोन बाजार में 5जी फोन की हिस्सेदारी बढ़कर 60 से 70 फीसदी हो जाएगी।
इंडियन सेल्युलर ऐंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन के चेयरमैन पंकज मोहिंद्रो ने कहा, ‘भारतीय मोबाइल उपकरण विनिर्माताओं को किसी से भी अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है क्योंकि उन्हें कोई प्राथमिकता नहीं मिलती है।’ मोबाइल उपकरण विनिर्माण क्षेत्र में सुदृढीकरण होने के कारण वैश्विक स्तर पर चार से पांच ही प्रमुख कंपनियों का वर्चस्व हैं। ऐसे में चिप विनिर्माता उन प्रमुख कंपनियों को ही प्राथमिकता देते हैं क्योंकि वे लंबी अवधि के लिए बड़े अनुबंध करते हैं।

मोबाइल उपकरण बनाने वाली भारतीय कंपनियों का कहना है कि उनके लिए चुनौतियां काफी गंभीर हो चुकी हैं। मोबाइल फोन बनाने वाली एक प्रमुख घरेलू कंपनी के चेयरमैन ने कहा, ‘हमें अपनी चिप जरूरतों के 50 फीसदी की ही आपूर्ति हो पा रही है। शेष के लिए हमें ग्रे मार्केट पर निर्भर होना पड़ता है जहां कीमत 15 से 20 फीसदी अधिक होती है। ऐसे में मार्जिन काफी कम हो गई है।’

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First Published - September 12, 2021 | 11:42 PM IST

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