भारत इस सप्ताहांत नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की तैयारी कर रहा है। मगर इस बीच विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) द्वारा भारत की व्यापार नीतियों की हालिया समीक्षा में संभावित तनाव की बात सामने आई है। दरअसल ब्रिक्स में शामिल कुछ देश चाहते हैं कि भारत अपनी व्यापार व्यवस्था को ज्यादा अनुमानित और कम प्रतिबंधात्मक बनाए।
चीन, इंडोनेशिया और ब्राजील ने जुलाई में भारत की आठवीं व्यापार नीति समीक्षा में व्यापार बाधाओं, औद्योगिक सब्सिडी, गुणवत्ता नियंत्रण आवश्यकताओं, शुल्कों, डंपिंगरोधी उपायों और कृषि सहायता जैसे मुद्दों पर चिंताए जताई है। इसके विपरीत रूस, मिस्र और सऊदी अरब ने भारत के सुधारों और आर्थिक जुड़ाव की काफी हद तक प्रशंसा की है।
भारत के ब्रिक्स साझेदारों में चीन की आलोचना सबसे व्यापक थी। उसने कहा, ‘हम उम्मीद करते हैं कि भारत डब्ल्यूटीओ समझौतों के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं और दायित्वों का पालन करेगा, अनुचित व्यापार बाधाओं को दूर करेगा, प्रतिबंधात्मक व्यापार साधनों का उपयोग करने से बचेगा और सभी सदस्यों के बाजार संस्थाओं के साथ निष्पक्ष व्यवहार करेगा।’
चीन ने विशेष रूप से उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं का उल्लेख किया। उसने कहा कि इस प्रकार की योजनाएं डब्ल्यूटीओ सब्सिडी नियमों के साथ तालमेल के बारे में चिंताएं पैदा करती हैं। उसने गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों (क्यूसीओ) को जरूरत से अधिक व्यापार अवरोधक बताया। उसने कुछ सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने पर भी सवाल उठाया और भारत द्वारा डंपिंगरोधी उपायों के व्यापक उपयोग का उल्लेख किया। समीक्षा अवधि के दौरान 226 जांच और जून 2025 तक 170 उपाय लागू थे।
चीन ने भारत से डब्ल्यूटीओ के इन्वेटमेंट फैसिलिटेशन फॉर डेवलपमेंट एग्रीमेंट का समर्थन करने और बहुपक्षीय पहलों पर अधिक लचीला रुख अपनाने का आग्रह भी किया।
भारत का कहना है कि उसके औद्योगिक और व्यापारिक उपाय वैध विकास उद्देश्यों के लिए थे और वे डब्ल्यूटीओ के अनुरूप थे। क्यूसीओ के बारे में कहा गया कि वह व्यवस्थित रूप से आदेशों और अनुरूपता-मूल्यांकन प्रक्रियाओं को तर्कसंगत बना रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे उचित हों और व्यापार को जरूरत से ज्यादा सीमित न करें। डंपिंगरोधी उपायों के बारे में भारत का कहना है कि वे उचित प्रक्रिया और निगरानी के अधीन हैं और उनका वाणिज्यिक प्रभाव मामूली रहा है।
इंडोनेशिया की चिंताएं द्विपक्षीय व्यापार के विस्तार की संभावना से अधिक सीधे तौर पर जुड़ी हैं। उसने व्यापार के लिए एक आधुनिक और अनुमानित ढांचे की मांग की और भारत से व्यापार उपायों की पारदर्शिता, अनुमानितता और दक्षता को बढ़ाने का आग्रह किया जो अंतरराष्ट्रीय मानकों और आपसी सहमति पर आधारित हो।
भारत के प्रमुख पाम तेल आपूर्तिकर्ता के रूप में इंडोनेशिया ने एक स्थिर एवं अनुमानित शुल्क व्यवस्था की मांग की। उसने पीएलआई योजना और मॉडलों एवं विनिर्माताओं की मंजूर सूची के पारदर्शी, डब्ल्यूटीओ के अनुरूप कार्यान्वयन का आग्रह किया। उसने आधुनिक मूल उत्पादन स्थल और सीमा शुल्क संबंधी आसान नियमों के साथ एक सरल आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौते का भी आह्वान किया।
भारत ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि उसकी शुल्क नीति का उपयोग आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने और आयात स्रोतों को विविध बनाने के लिए किया जा रहा है। इसी प्रकार नियामक उपायों का उद्देश्य उपभोक्ताओं, स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा करना है।
ब्राजील ने कृषि पर ध्यान केंद्रित किया। उसने भारत के तिलहन उत्पादन कार्यक्रम, किसान सुरक्षा और मूल्य समर्थित भुगतान, निर्यात कर प्रतिपूर्ति और कपास गुणवत्ता नियंत्रण आदेश में पारदर्शिता लाने का आग्रह किया।
ब्राजील ने कहा कि ये सवाल पारदर्शिता, अनुमानितता और घरेलू उपायों के व्यापारिक प्रभावों में उसकी दिलचस्पी को दर्शाते हैं। भारत ने अपनी कृषि नीतियों का बचाव करते हुए कहा कि ये नीतियां खाद्य सुरक्षा, कमजोर उपभोक्ताओं और किसानों की रक्षा के लिए आवश्यक हैं। उसने कहा कि उसके उपाय बेहद सुविचारित और पारदर्शी हैं जो डब्ल्यूटीओ के नियमों के अनुरूप हैं।
हालांकि ब्रिक्स के सभी साझेदारों ने भारत की नीतियों की आलोचना नहीं की। रूस ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता को अपना पूरा समर्थन दिया। उसने शिखर सम्मेलन की मेजबानी में भारत की सफलता के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दीं। साथ ही ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, फार्मास्युटिकल, लॉजिस्टिक्स और प्रस्तावित भारत-यूरेशियन आर्थिक संघ व्यापार समझौते में सहयोग के बारे में बताया। सऊदी अरब ने भारत की व्यापार सुविधा, बुनियादी ढांचे और डिजिटल सुधारों की प्रशंसा की। साथ ही उसने जीसीसी-भारत एफटीए वार्ता का समर्थन किया।