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फसल बीमा पोर्टफोलियो में हमने की है कटौती

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Last Updated- December 12, 2022 | 7:21 AM IST

बीएस बातचीत
निजीकरण की खबरें चल रही हैं, ऐसे में जीआईसी आरई ने एक पखवाड़े में 40 प्रतिशत लाभ कमाया है। जीआईसी आरई के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक देवेश श्रीवास्तव ने सुब्रत पांडा के साथ बातचीत में बताया कि कंपनी अपने कारोबार का किस तरह से समेकन कर रही है, जिससे 100 प्रतिशत के करीब संयुक्त अनुपात हासिल किया जा सके। संपादित अंश…

टर्म पोर्टफोलियो में पुनर्बीमा करने वालों ने दरें बढ़ाई हैं। क्या जीआईसी आरई ने भी सावधि पोर्टफोलियो में दरें बढ़ाई हैं?
हम दरों के संचालक नहीं हैं। जीवन बीमा हमारे कारोबार का एक बहुत छोटा हिस्सा है, जो करीब 1 प्रतिशत है। जीवन बीमा पोर्टफोलियो में बाजार में पर्याप्त कारोबारी हैं, जो कई वर्षों से इस कारोबार मेंं लगे हुए हैं। जब टर्म इंश्योरेंस का प्रस्ताव आता है,, इसमें तीव्र प्रतिस्पर्धा होती है। हमारी दरें बाजार दरों और जोखिम के हिसाब से होंगी। अगर हम ट्रेंड देखें तो पश्चिम में टर्म इंश्योरेंस का भविष्य है। इसके पहले लोगों ने कर लाभ और मनी बैक पॉलिसी का विकल्प अपनाया और टर्म इंश्योरेंस ने कभी जोर नहीं पकड़ा।

खबरों में कहा गया कि सरकार जीआईसी आरई में अपने कुछ शेयर बेचना चाहती है, उसके बाद जीआईसी आरई के शेयर तेजी से बढ़े। क्या सरकार की ओर से आपको कोई सूचना मिली है?
हमने इसके बारे में कुछ भी नहीं सुना है। इस तरह के फैसले सरकार को करने हैं।

ब्रोकरेज रिपोर्टों में कहा गया है कि कंपनी कुछ कमजोर पोर्टफोलियो से निकलना चाहती है?
आप एक पोर्टफोलियो से बाहर कभी नहीं निकलते। रिइंश्योरेंस की मूल धारणा विविधीकरण है। किस तरह विविधीकरण होता है? सुनिश्चित करना कि यह एक लाइन पर चलने वाली कंपनी नहीं है। आप अपने पोर्टफोलियो मेंं स्वास्त्य, संपत्ति, मोटर, कृषि व अन्य कारोबार चाहते हैं। विविधीकरण का दूसरा तरीका पूरी दुनिया में काम करना है। लेकिन अपने क्षेत्र का समेकन करना होता है। समेकन की प्रक्रिया में बेहतर काम न करने वाले क्षेत्रों से दूरी बनाई जा सकती है और बेहतरीन कारोबार पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है। यही हम पिछले कुछ साल से कर रहे हैं। हम इस पर काम कर रहे हैं कि संयुकक्त अनुपात 100 प्रतिशत के करीब हो। हम इस पर काम कर रहे हैं कि जीआईसी आरई स्वस्थ इकाई रहे। यह तभी संभव है, जब हम अपने कारोबार को मुनाफे में रखें। वर्षों से हमने खुद को उबारने के लिए निवेश से होने वाली आमदनी का इस्तेमाल किया है। निवेश पर 12-13 प्रतिशत के भारी मुनाफे के बावजूद सवाल यह उठता है कि क्या यह टिकाऊ है।  

कोविड में क्या कर्ज पोर्टफोलियो पर दबाव रहा है?
हमारे निवेश का बड़ा हिस्सा सरकारी प्रतिभूतियों में है। हम जी-सेक में ज्यादा से ज्यादा हैं, क्योंकि यह हमें स्थिरता देता है।

फसल बीमा पोर्टफोलियो चिंता का विषय है।  इसमें घाटा कम करने को लेकर कंपनी की क्या रणनीति है?
हमने फसल बीमा के क्षेत्र में कुछ भारी कटौती की है। हमने अपने बाजार का 35 से 38 प्रतिशत पकड़ा है और इसकी वजह से पोर्टफोलियो बहुत बेहतर हुआ है। हमने सबी बीमा कंपनियों का पूरी तरह से विश्लेषण किया है और बीमा कंपनियों का मूल्यांकन किया है जो जीआईसी आरई की क्षमता का इस्तेमाल बहुत न्यायपूर्ण तरीके से कर रही हैं। जहां तक हमारे फसल पोर्टफोलियो का सवाल है, हम जो कर रहे हैं, उससे बहुत खुश हैं।

घाटा कम करने के  लिए कंपनी किस सेग्मेंट पर ज्यादा जोर दे रही है?
घरेलू बाजार में संपत्ति का प्रदर्शन बेहतर रहा है और मूल्य वृद्धि से संचालित हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बुक, जो हमारे कुल बही खाते का 30 प्रतिशत है, पिछले कुछ साल से खराब रही है। हम उस सेग्मेंट में बेहतर दरों पर विचार कर रहे हैं।

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First Published - March 7, 2021 | 11:32 PM IST

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