वेदांत का अब केयर्न ब्रांड पर विशेष अधिकार होगा। स्कॉटिश तेल एवं गैस खोज कंपनी केयर्न एनर्जी अपना नाम 13 दिसंबर 2021 से बदलकर कैप्रिकॉर्न एनर्जी करेगी। कंपनी का एलएसई स्टॉक टिकर सीएनई बना रहेगा।
केयर्न एनर्जी की वेबसाइट पर जारी एक बयान में कहा गया है, ‘केयर्न इंडिया के आईपीओ के समय में समझौते में कहा गया कि कंपनी का नाम बदला जाएगा।’
वेदांत ने बयान में कहा, ‘केयर्न एनर्जी दिसंबर 2021 तक अपनी कॉरपोरेट पहचान के तहत ब्रांड नाम ‘केयर्न’ का इस्तेमाल समाप्त करेगी।’ बयान में कहा गया है, ‘ब्रांड केयर्न विशेष रूप से वेदांत के स्वामित्व वाला है।’
इस बदलाव पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वेदांत के मुख्य कार्याधिकारी सुनील दुग्गल ने कहा, ‘जब केयर्न एनर्जी ने वेदांत गु्रप को अपना हिस्ससा बेचने के बाद वर्ष 2011 में अपने भारतीय परिचालन से बाहर निकलने का निर्णय लिया था तो उसने ब्रांड नाम केयर्न का इस्तेमाल बरकरार रखा, हालांकि ब्रांड ‘केयर्न’ वेदांत (पूर्व में केयर्न इंडिया) के स्वामित्व वाला है।’
वेदांत गु्रप द्वारा अधिग्रहीत किए जाने के बाद, घरेलू कंपनी केयर्न इंडिया को केयर्न एनर्जी से अलग कर किया गया था। दोनों कंपनियां अब कानूनी तौर पर अलग इकाइयां हैं और उनके अलग प्रवर्तक और शेयरधार हैं। केयर्न इंडिया का बाद में वर्ष 2017 में वेदांत लिमिटेड के साथ विलय हो गया था और उसके नाम केयर्न ऑयल ऐंड गैस कर दिया गया था।
केयर्न ऑयल ऐंड गैस के उप मुख्य कार्याधिकारी प्रचुर साह ने कहा, ‘केयर्न ऑयल ऐंड गैस को स्कॉटिश कंपनी केयर्न एनर्जी से अलग करना हमेशा से जरूरी समझा जा रहा था।’ केयर्न एनर्जी पूर्वप्रभावी कर विवाद को लेकर भारतीय सरकार के साथ कानूनी विवाद में फंसी हुई थीं। केंद्र ने अंतत: हार मान ली और केयर्न एनर्जी के साथ समझौते के लिए स्वीकृति दे दी। केयर्न एनर्जी ने कहा, ‘भारत में ताजा कानूनी बदलावों और संबंधित कर रिफंड प्रक्रियाओं में अपनी भागीदारी को देखते हुए हम नाम परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।’ कंपनी ने कहा है, ‘केयर्न की कई सहायक इकाइयों को कुछ समय से कैप्रिकॉर्न के तौर पर जाना जाता है। यह हमारे वैश्विक परिचालन में प्रख्यात नाम है।’