सीबीआई ने सत्यम कंप्यूटर के करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े की जांच के संबंध में कंपनी के पूर्व अध्यक्ष बी. रामालिंग राजू और चार अन्य आरोपियों के हस्ताक्षरों के नमूने लिए हैं।
सीबीआई ने बी. रामलिंग राजू, उनके भाई और पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी वाडलामणि श्रीनिवास और प्राइस वाटरहाउस के दो अन्य ऑडिटरों एस. गोपालकृष्णन और तल्लूरी श्रीनिवास से उनके वकीलों की उपस्थिति में मेट्रोपालिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में 60-60 हस्ताक्षर लिए गए।
बी. रामालिंग राजू और अन्य को चंचलगुडा जेल से पुलिस वैन में भारी सुरक्षा के बीच अदालत लाया गया और उन्हें हस्ताक्षर लेने के बाद दोपहर 12 बजे के बाद वापस भेज दिया गया। इन हस्ताक्षरों की समीक्षा सीबीआई की विभिन्न पहलुओं की जाचं करने वाली टीम करेगी, जो आगे इस जांच प्रक्रिया को आगे अपने हाथ में लेगी।
अगर जरूरत पड़ी, तो हस्ताक्षर की जांच सरकारी परीक्षक द्वारा भी कराई जाएगी। हालांकि उन लोगों ने हस्तलिखित दस्तावेज नहीं सौंपे हैं, क्योंकि ज्यादातर कार्यालय का काम और दस्तावेज कंप्यूटर प्रिंटेड हैं। इसमें सिर्फ हस्ताक्षर ही हस्तलिखित है। वैसे भी सीबीआई को लिखे गए फाइल नोट्स पर लिखावट के संबंध में कोई सवाल नहीं है।
राजू और उनके भाइयों ने पांच पेपर शीट पर दस दस हस्ताक्षर किए। एक सीबीआई अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘विवादित हस्ताक्षरों की जांच के लिए कम से कम 50 हस्ताक्षर की जरूरत थी। हमलोग लिखावट की प्रवाह, स्ट्रोक्स, दबाव, वक्रता और कोण और अन्य मानदंडों की भी जांच करेंगे।’
नहीं मिली जमानत : सत्यम मामले में गिरफ्तार प्राइसवाटर के दो पूर्व कार्यकारियों की जमानत याचिकाओं को एक स्थानीय अदालत ने खारिज कर दिया। ये पूर्व कार्यकारी एस. गोपालकृष्णन और तल्लुरी श्रीनिवास सत्यम कंप्यूटर घोटाला मामले में इस समय जेल में हैं। चौथे अतिरिक्त मेट्रोपोलिटन सत्र न्यायाधीश की अदालत में इस मामले की सुनवाई पूरी हो गई है।
के. रामलिंगम मायटास के चेयरमैन : सत्यम के संस्थापक और पूर्व चेयरमैन बी. रामलिंग राजू के बेटों की कंपनी मायटास इन्फ्रा ने के. रामलिंगम को बोर्ड का चेयरमैन नियुक्त करने की घोषणा की है।