दिसंबर में घरेलू बाजार में हुई दवाओं की बिक्री से पता चलता है कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में इस क्षेत्र के लिए आय में वृद्धि का परिदृश्य बेहतर रहने वाला है। विश्लेषकों का कहना है कि घरेलू बाजार में सुधार और निर्यात के अच्छे अवसर दिख रहे हैं। ऐसे में दवा कंपनियों की आय में 30 से 40 फीसदी की वृद्धि दिख सकती है।
एडलवाइस ने कहा है कि उसे दिसंबर तिमाही में इस क्षेत्र के कर बाद लाभ (पीएटी) में 30 फीसदी की वृद्धि और राजस्व में लगभग 8 फीसदी की वृद्धि होने की उम्मीद है। दूसरी ओर, फिलिप कैपिटल के विश्लेषकों ने राजस्व में सालाना आधार पर 10 फीसदी की वृद्धि के बल पर आय में सालाना आधार पर 43 फीसदी (क्रमिक आधार पर 2 फीसदी की गिरावट) की वृद्धि होने की उम्मीद है।
एडलवाइस सिक्योरिटीज के विश्लेषक कुणाल रणदेरिया का मानना है कि लॉकडाउन संबंधी पाबंदियों के हटने और बाजार में गतिविधियां तेज होने के साथ ही घरेलू बाजार में सुधार दिख रहा है। रणदेरिया के अनुसार, सिप्ला, कैडिला हेल्थकेयर और ग्लेनमार्क जैसी कंपनियां दमदार वृद्धि दर्ज कर सकती हैं। इन कंपनियों की वृद्धि को मुख्य तौर पर कोविड-19 पोर्टफोलियो से रफ्तार मिलेगी। उन्होंने कहा, ‘हालांकि बाजार की गतिविधियां सुचारु हो गई हैं लेकिन वह अब भी कोविड पूर्व स्तर से काफी नीचे है।’
विश्लेषकों ने बताया कि पिछले एक साल के दौरान निफ्टी फार्मा ने 60 फीसदी रिटर्न दिया है। उन्होंने कहा कि दवा कंपनियों के शेयरों में तेजी को बरकरार रखने के लिए दमदार आय की रफ्तार को बरकरार रखने की जरूरत है। जहां तक निर्यात का सवाल है तो फिलिप कैपिटल ने कहा कि यूरोपीय संघ और अमेरिका जैसे प्रमुख बाजारों में कोविड संबंधी व्यवधान ने न केवल भारतीय दवा कंपनियों के लिए निर्यात का अवसर बढ़ाया है बल्कि मूल्य निर्धारण के सुझान में भी सुधार हुआ है। उदाहरण के लिए, विशेष दवाओं के पोर्टफोलियो (खासकर इलुम्या एवं सेक्वा की 50 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी) से सन फार्मास्युटिकल्स का योगदान बढ़ा है।
कैडिला हेल्थकेयर ने भी जटिल विशेष दवा श्रेणी में 30 फीसदी से अधिक की वृद्धि दर्ज की है। ल्यूपिन ने अमेरिका में अल्बुटेरोल को उतारा है जो सांस की बीमारी की दवा है। हालांकि बीमारी के इस मौसम में अमेरिका में कोई बड़ा लॉन्च नहीं किया गया है। एडलवाइस के विश्लेषकों का मानना है कि कैडिला हेल्थकेयर और सिप्ला जैसी दवा कंपनियों के लिए घरेलू राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि- कैडिला हेल्थकेयर के लिए करीब 10 फीसदी और सिप्ला के लिए 13 फीसदी- दिखेगी।
दिसंबर के लिए एक अन्य महत्त्वपूर्ण पहलू पर गौर करने की आवश्यकता है और वह परिचालन लागत है। मोतीलाल ओसवाल के विश्लेषकों ने बताया है कि घरेलू फॉर्मूलेशन इकाई के लिए परिचालन लागत अधिक होगी जिससे क्रमिक आधार पर दवा कंपनियों की कुल लाभप्रदता प्रभावित हो सकती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बाजार की गतिविधियां अब सुचारु हो गई हैं और इसलिए विपणन एवं बिक्री लागत में वृद्धि होगी।