अमेरिका के दवा नियामक ने इजरायल की टैरो फार्मास्युटिकल को अच्छी-खासी फटकार लगाई है। दवा नियामक कंपनी के कनाडा में स्थित उसके मुख्य उत्पादन केंद्र में घटिया उत्पादन मानकों से काफी नाखुश है।
अगर टैरो ने नियामक द्वारा उठाई गई बातों पर सुधार नहीं किया तो अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) इस केंद्र में बनी दवाओं को अमेरिका में बेचे जाने पर प्रतिबंध लगा सकता है।
गौरतलब है कि सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज इस कंपनी का अधिग्रहण करने में लगी हुई है, जिसका टैरो का प्रबंधन कड़ा विरोध कर रहा है।
कंपनी की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक टैरो के कुल उत्पादन का दो-तिहाई हिस्सा कनाडा की इसी केंद्र से आता है। यहां बनी दवाएं कनाडा, अमेरिका और दूसरे मुल्कों में बेचे जाते हैं।
कंपनी ने हाल ही में कहा था कि उसकी कुल कमाई 2008 में 34.19 करोड़ डॉलर रही थी। इसके अलावा, कंपनी के उत्पादन केंद्र अमेरिका, ब्रिटेन, आयरलैंड और इस्राइल में भी हैं। सन फार्मा के प्रवक्ता ने बताया कि, ‘हम इस मुद्दे को लेकर काफी चिंतित हैं।’
सन फार्मा के पास इस वक्त टैरो के 36 फीसदी शेयर हैं और वह कंपनी की सबसे बड़ी शेयरहोल्डर है। सन फार्मा इस वक्त अधिग्रहण के मुद्दे पर इस्राइली सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मान कर कंपनी के अधिकारियों से सुलह समझौते की कोशिश कर रही है।
सन फार्मा के प्रवक्ता ने बताया कि, ‘कंपनी ने अपने नतीजे 2005 से ही जारी नहीं किए हैं। इसलिए इस मामले का कंपनी के शेयरधारकों और दूसरे लोगों पर कितना असर पड़ेगा, यह कहना काफी मुश्किल है।
साथ ही, कंपनी इस बारे में भी कुछ नहीं बताया है।’ बड़ी बात यह है कि सन फार्मा की सहायक कंपनी कारको फार्मास्युटिकल्स को भी अक्टूबर में ऐसी ही चेतावनी मिली थी। भारत की सबसे बड़ी दवा कंपनी, रैनबैक्सी लैबोरेट्रीज की 30 दवाओं पर एफडीए पहले ही प्रतिबंध लगा चुकी है।
बुरे फंसे
अमेरिका के एफडीए ने घटिया उत्पादन मानकों को लेकर टैरो को थमाया है नोटिस
अगर सुधार नहीं किया तो अमेरिकी सरकार लगा सकती है प्रतिबंध
कनाडा में मौजूद उत्पादन केंद्र की गुणवत्ता को लेकर दिया गया है नोटिस
इसी केंद्र से आता है टैरो के कुल उत्पादन का दो-तिहाई हिस्सा