टाटा संस के निवेश की चांदी

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 5:02 AM IST

टाटा समूह की कंपनियों के शेयरों में आई तेजी से उसकी होल्डिंग कंपनी टाटा संस की चांदी हो गई है। समूह की सूचीबद्घ कंपनियों में टाटा संस की प्रत्यक्ष हिस्सेदारी का बाजार मूल्य पहली बार 10 लाख करोड़ रुपये के पार चला गया है।
शुक्रवार को समूह की 14 सूचीबद्घ कंपनियों में टाटा संस की प्रत्यक्ष हिस्सेदारी का बाजार मूल्य 10.45 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल मार्च के अंत में केवल 5.62 लाख करोड़ रुपये था यानी उसमें करीब 86 फीसदी की उछाल आई। टाटा संस के पोर्टफोलियो में समूह की प्रमुख कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) का दबदबा बरकरार है। मगर टाटा स्टील, टाटा कंज्यूमर, टाटा कम्युनिकेशंस और टाटा पावर आदि के शेयरों में तेजी से टाटा संस के पोर्टफोलियो में टीसीएस से इतर निवेश की कीमत पहली बार 2 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंची है।
टाटा समूह की इन 14 सूचीबद्घ कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण शुक्रवार को 17.9 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल मार्च के अंत में 9.2 लाख करोड़ रुपये था। इन कंपनियों में टाटा संस का कुल 58,647 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष निवेश है। वित्त वर्ष 2021 में टाटा संस ने टाटा मोटर्स और टाटा पावर में नई इक्विटी पूंजी लगाई थी। टाटा समूह की अन्य कंपनियों जैसे टाटा मेटलिक्स, ताज जीवीके होटल्स, रैलीस इंडिया, टीआरएफ और टाटा स्टील लॉन्ग की स्वामी और प्रवर्तक समूह की अन्य कंपनियां हैं, जिनका स्वामित्व और नियंत्रण टाटा संस के पास है। एवर्ट इन्वेस्टमेंट्स और पैनाटोन फिनवेस्ट जैसी गैर सूचीबद्घ कंपनियों के जरिये भी टाटा संस का समूह की दूसरी कंपनियों में थोड़ा बहुत निवेश है। समूचे निवेश को मिलकार समूह की कंपनियों में टाटा संस की कुल हिस्सेदारी का बाजार मूल्य करीब 10.62 लाख करोड़ रुपये है। उदाहरण के लिए एवर्ट इन्वेस्टमेंट्स की टाटा की 9 कंपनियों में अल्पांश हिस्सेदारी है। इन कंपनियों में टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टाटा पावर, टाइटन कंपनी, टाटा कंज्यूमर और इंडियन होटल्स आदि शामिल हैं। पैनाटोन फिनवेस्ट इस साल 31 मार्च तक टाटा कम्युनिकेशंस की सबसे बड़ी शेयरधारक थी और उसके पास कंपनी में 44.8 फीसदी हिस्सेदारी थी।
समूह के दूरसंचार उपक्रम को छोड़कर बाकी कंपनियों में टाटा संस का निवेश अब फायदे में है या उनका बाजार मूल्य निवेश लागत से ज्यादा है। केवल दूरसंचार फर्म पिछड़ी है। उदाहाण के लिए टाटा टेलीसर्विसेज (महाराष्ट्र) लिमिटेड (टीटीएमएल) में टाटा संस की 19.58 फीसदी है जिसका बाजार मूल्य 639 करोड़ रुपये है, जबकि इसमें 680 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। इसके उलट टाटा संस का पांच सूचीबद्घ कंपनियों में इक्विटी निवेश पिछले साल मार्च के अंत में नुकसान में था। इन कंपनियों में टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, इंडियन होटल्स, टाटा केमिकल्स और टाटा टेली शामिल हैं।
यह विश्लेषण कैपिटालाइन के आंकड़ों के अनुसार समूह की सूचीबद्घ कंपनियों में टाटा संस की निवेश लागत या बुक वैल्यू पर आधारित है, जो कंपनी ने सालाना रिपोर्ट में बताई थी।
समूह की कंपनियों में टाटा संस की हिस्सेदारी का मूल्य हर साल मार्च अंत के आधार पर लिया गया है। ताजा मूल्य इसी 4 मई को कंपनी के बाजार पूंजीकरण पर आधारित है।
टीटीएमएल का प्रदर्शन समूह की कंपनियों में सबसे बेहतर रहा है और पिछले साल मार्च से इसके बाजार पूंजीकरण में 739 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसके बाद टाटा एलेक्सी का बाजार पूंजीकरण 586 फीसदी और टाटा मोटर्स का बाजार पूंजीकरण 489 फीसदी बढ़ा है। टाटा कम्युनिकेशंस (467 फीसदी), टाटा स्टील (462 फीसदी) और टाटा पावर (305 फीसदी) की हिस्सेदारी की कीमत भी काफी बढ़ी है।
समूह की कंपनियों में टाटा संस के कुल निवेश का करीब 70 फीसदी टाटा मोटर्स, टाटा स्टील और टाटा पावर में है, लेकिन टाटा संस के कुल बाजार पूंजीकरण में इन कंपनियों का योगदान महज 17 फीसदी है।
इन कंपनियों में टाटा संस का इक्विटी निवेश 41,400 करोड़ रुपये है, जबकि निवेश का मूल्य अब बढ़कर 1.05 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इन कंपनियों से टाटा संस को लाभांश भी मिलता है और होल्डिंग कंपनी मुख्य रूप से अपनी निवेश गतिविधियों के लिए टीसीएस पर निर्भर है। उदाहरण के तौर टाटा मोटर्स ने पांच साल से कोई लाभांश नहीं दिया है और टाटा पावर करीब एक दशक से लाभांश में बढ़ोतरी नहीं की है। टाटा स्टील ने भी 13 साल बाद वित्त वर्ष 2021 में लाभांश बढ़ाया है।
समूह की होल्डिंग कंपनी ने सबसे बड़ा निवेश टाटा मोटर्स में किया है, जिसके बाद टाटा स्टील और टाटा पावर में बड़ा निवेश है। टाटा संस ने टाटा मोटर्स में करीब 22,184 करोड़ रुपये का निवेश किया है, जो समूह की कुल सूचीबद्घ कंपनियों के निवेश का करीब 38 फीसदी है। इसी तरह टाटा स्टील में कंपनी ने अभी तक 13,567 करोड़ रुपये का इक्विटी निवेश किया है। विश्लेषकों का कहना है कि इन कंपनियों में लंबे समय से किए जा रहे निवेश का तगड़ा लाभ तभी मिलेगा, जब ये कंपनियां कई साल तक बेहतर प्रदर्शन करती रहेंगी।

First Published : May 9, 2021 | 11:19 PM IST