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भारत में Starlink की एंट्री पर ब्रेक, सुरक्षा चिंताओं ने रोकी Elon Musk की बड़ी योजना

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भारत में राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं के चलते Starlink की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा की मंजूरी प्रक्रिया फिलहाल अटक गई है।

Last Updated- April 18, 2026 | 3:03 PM IST
Starlink
Representative image

भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने की Starlink की योजना फिलहाल अटक गई है। सरकार ने कंपनी के निवेश प्रस्ताव पर सावधानी भरा रुख अपनाया है। The Economic Times की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सवालों के चलते इस प्रस्ताव को अभी मंजूरी नहीं मिली है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी की एफडीआई यानी विदेशी निवेश की अर्जी फिलहाल रोक दी गई है। अगर Starlink सरकार की ओर से उठाए गए सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाती है, तो इस प्रस्ताव को खारिज भी किया जा सकता है।

सरकारी एजेंसियों ने खास तौर पर Starlink की पैरेंट कंपनी SpaceX के साथ जुड़े क्रॉस-होल्डिंग स्ट्रक्चर और कुछ तकनीकी पहलुओं पर चिंता जताई है। इसके अलावा, कंपनी को अभी एक अहम सुरक्षा मंजूरी का भी इंतजार है।

सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि Starlink की सेवाओं का गलत इस्तेमाल न हो, खासकर संवेदनशील हालात जैसे युद्ध या किसी बड़े संकट के दौरान। इसी वजह से नेटवर्क की गहन जांच और परीक्षण पर जोर दिया जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार के भीतर इस बात को लेकर चिंता बढ़ रही है कि ऐसी सैटेलाइट सेवाएं राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से जोखिम पैदा कर सकती हैं। इसलिए कोई भी फैसला लेने से पहले सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है।

राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए सरकार ने सैटेलाइट कम्युनिकेशन क्षेत्र में सतर्क रुख अपनाया है। यह क्षेत्र खास इसलिए भी है क्योंकि इसकी सेवाएं भौगोलिक सीमाओं से परे काम करती हैं।

हाल ही में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने आए कुछ मामलों, जिनमें प्रतिबंधों के बावजूद ईरान में स्टारलिंक टर्मिनल्स के इस्तेमाल की रिपोर्ट भी शामिल है, ने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि भारत में ऐसे हालात की संभावना कम मानी जा रही है, फिर भी सरकार किसी भी तरह के संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए पहले से सावधानी बरत रही है।

स्टारलिंक को भारत में ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट सर्विसेज (GMPCS) का लाइसेंस मिल चुका है। इसके साथ ही उसे इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर से भी मंजूरी मिल गई है। लेकिन कंपनी तब तक सेवाएं शुरू नहीं कर सकती, जब तक उसे स्पेक्ट्रम आवंटित नहीं किया जाता और विदेशी निवेश, साथ ही सुरक्षा से जुड़ी सभी मंजूरियां नहीं मिल जातीं।

रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी इस महीने के अंत या मई की शुरुआत में वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात कर सकते हैं। इस बैठक में प्रस्ताव से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा होने की संभावना है।

भारत में सैटेलाइट सेवाओं के क्षेत्र में 100 प्रतिशत तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति है, लेकिन 74 प्रतिशत तक निवेश को ही स्वतः मंजूरी मिलती है। इससे अधिक हिस्सेदारी के लिए सरकार की अनुमति जरूरी होती है।

इसके अलावा, कंपनियों को क्रॉस-होल्डिंग नियमों का पालन करना होता है और भारतीय सहायक कंपनी स्थापित करनी पड़ती है। मौजूदा स्पेस पॉलिसी के तहत इन नियमों को लेकर कुछ स्पष्टता की जरूरत अभी भी बनी हुई है, जिसे लेकर चर्चा जारी है।

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First Published - April 18, 2026 | 3:03 PM IST

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