रिटले कंपनी सुभिक्षा के संस्थापक आर. सुब्रमण्यन अलग किस्म के उद्यमी हैं। आईआईटी और आईआईएम से पढ़ाई करने वाले सुब्रमण्यन ने बैंकिंग और एफएमसीजी क्षेत्र को बतौर कैरियर नहीं अपनाया।
हालांकि उन्होंने भारतीय खुदरा क्षेत्र में एक मुकाम हासिल किया है, लेकिन अभी उनकी रिटेल कंपनी सुभिक्षा बुरे दौर से गुजर रही है। पिछले चार महीने से सुभिक्षा के कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल रहा है।
यहां तक कि सुभिक्षा के कई रिटेल स्टोरों पर सुरक्षा गार्डों को तैनात करने की हैसियत भी नहीं रह गई है। नकदी के अभाव के साथ-साथ सुभिक्षा लूटपाट का भी शिकार हो रही है। वैसे उनका दावा है कि अगले 3 महीनों में सारी समस्याओं को सुलझा दिया जाएगा।
सुब्रमण्यन आईआईटी चेन्नई से इंजीनियरिंग स्नातक हैं। उन्होंने आईआईएम अहमदाबाद से 1989 में स्नातकोत्तर पाठयक्रम पूरा किया। वह इस बैच के टॉपर और गोल्ड मेडलिस्ट भी रहे।
उन्होंने सिटी बैंक के साथ अपने कैरियर की शुरुआत की और बाद में वे कुछ दिन एनफील्ड मोटर्स के साथ भी जुड़े रहे।
वर्ष 1991 में उन पर अपना व्यवसाय शुरू करने का जुनून सवार हुआ। उन्होंने 1991 में ही विश्वप्रिया फाइनैंशियल सर्विसेज ऐंड सिक्योरिटीज नाम से अपना कारोबार शुरू किया।
इसमें उन्हें ज्यादा सफलता नहीं मिली। आज उन्हें सुभिक्षा रिटेल के संस्थापक के तौर पर जाना जाता है। सुभिक्षा रिटेल की स्थापना उन्होंने 1997 में की थी।
सुभिक्षा की शुरुआत के बारे में बताते हुए वह कहते हैं, ‘मैंने 1990 के दशक के मध्य में दो क्षेत्र- रिटेल और सॉफ्टवेयर पर काफी अध्ययन किया। मैंने देखा कि सॉफ्टवेयर क्षेत्र में अपना कारोबार शुरू करने में मैंने काफी देर कर दी है।
मुझे लगा कि अगर मैं रिटेल क्षेत्र में कोई शुरुआत करता हूं, तो मैं अग्रणी पंक्ति में शामिल हो जाऊंगा। हमने इसके लिए छोटा सा फंड जुटाया और रिटेल का कारोबार शुरू हो गया।’
उन्होंने बताया कि हमारा रिटेल कारोबार का मॉडल कुछ अलग था। वह इसके जरिये आम आदमी को आकर्षित करना चाहते थे, न कि अमीरों को। चूंकि उनके पास रिटेल कारोबार का कोई अनुभव नहीं था, इसलिए उन्होंने इसे शुरू करने से पहले काफी सोचा।
शुरुआती शोधों के आधार पर उन्होंने पाया कि लोग अपने घर के नजदीक वाले किराना दुकान से सामान खरीदना पसंद करते हैं। इसलिए उन्होंने यह निर्णय किया कि पूरे शहर में 1000 वर्ग फीट में स्टोर खोले जाएं।
फिर उन्होंने सोचा कि ब्रांडेड उत्पादों को सस्ते दामों पर बेचा जाए। यहीं एक तरीका था, जिसके जरिये ग्राहकों को अपने स्टोर तक खींचा जा सकता था। उन्होंने अपना पहला स्टोर एक टेलीविजन कंपनी- थॉमसन के परिसर में किराये पर लिया था।
वह बताते हैं कि ‘सुभिक्षा’ एक संस्कृत शब्द है, जिसका मतलब है- जिंदगी में हर अच्छी वस्तु देने वाला। हमने सोचा कि सुभिक्षा स्टोर के जरिये लोगों की इन आकांक्षाओं को पूरा किया जाए।