भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) भारतीय हस्तशिल्प उद्योग के कायाकल्प के लिए निर्यात प्रोत्साहन परिषद (ईपीसी) के साथ मिल कर एक नई कंपनी बनाने की तैयारी कर रहा है।
यह नई कंपनी हैंडीक्राफ्ट क्लस्टर के विकास और छोटी इकाइयों को विपणन संपर्क में मदद मुहैया कराने के लिए काम करेगी। सिडबी के कार्यकारी निदेशक एन के मैनी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि नॉर्थ ईस्टर्न डेवलपमेंट फाइनैंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनईडीएफआई) और ऐक्जिम बैंक को इस पहल में प्रमोटर कंपनियों के रूप में शामिल किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, ‘यह स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) हस्तशिल्प क्षेत्र को एक ‘संपूर्ण पैकेज’ मुहैया कराएगा और ऐसे क्लस्टरों में औद्योगिक विकास में मदद करेगा।’ यह नई कंपनी जल्द ही अस्तित्व में आ जाएगी। इससे जुड़ी सभी सामान्य औपचारिकताओं को पूरा किया जा रहा है।
सिडबी अपनी मौजूदगी बढ़ाए जाने के प्रयास में लगी हुई है और वह वित्त वर्ष 2010 के अंत तक देश में 100 शाखाओं के अपने लक्ष्य को पूरा करना चाहती है। उन्होंने कहा, ‘हमने गैर-जमानती ऋण के लिए 2500 करोड़ रुपये का फंड तैयार किया है। इसके अलावा मौजूदा मंदी और ऋण की किल्लत को देखते हुए हमने सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिए ऋण गारंटी बढ़ा कर एक करोड़ रुपये कर दी है।’
अब तक सिडबी ऋण गारंटी योजना के तहत लगभग 1500 मामलों पर काम कर चुका है। इसके अलावा एमएसएमई क्षेत्र में उच्च जोखिम वाली परियोजनाओं के लिए पूंजी मुहैया कराए जाने के लिए सिडबी वेंचर कैपिटल भी बरकरार है।
सिडबी की सूक्ष्म ऋण गतिविधियों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि 2000 करोड़ रुपये की रकम मार्च 2009 के अंत तक वितरित की जाएगी और अब तक लगभग 60 लाख उद्यमी सूक्ष्म ऋण प्राप्त कर चुके हैं। उत्तर प्रदेश में सिडबी ने मौजूदा वित्त वर्ष 2008-09 के दौरान वित्तीय सहायता बढ़ा कर 2700 करोड़ रुपये की।