सरकार जल्द ही ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के माध्यम से रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) में अपनी हिस्सेदारी बेच सकती है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने यह जानकारी दी।
इस सार्वजनिक उपक्रम में सरकार की हिस्सेदारी बेचने की योजना में कुछ महीने देरी हो रही है क्योंकि कोविड-19 महामारी के कारण इसके शेयरों के दाम गिर गए थे। इस सरकारी उपक्रम के शेयर के भाव अब सुधरकर 11 जनवरी 2021 को 52 सप्ताह के उच्च स्तर 35.50 रुपये पर पहुंच गए, जो बुधवार को 31.70 रुपये पर बंद हुए।
अक्टूबर 2020 में सरकार ने कंपनी में अपनी 15 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की घोषणा की थी, जो भारतीय रेलवे के लिए परियोजना विकास का काम करती है। सरकार ने इसके लिए मर्चेंट बैंकर नियुक्त करने के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए थे। आरवीएनएल रेलवे परियोजनाओं पर काम करती है, जिसमें रेलवे का विद्युतीकरण, नई लाइनों की स्थापना, मेट्रो परियोजनाएं, बड़े पुल, केबल वाले पुल बनाना, और संस्था के भवन बनाने सहित अन्य काम शामिल है।
करीब 15 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने से सरकार को 990 करोड़ रुपये मिलेंगे। उपरोक्त उल्लिखित अधिकारी ने कहा कि इसकी बिक्री में देरी इसलिए हुई, क्योंकि कंपनी के शेयर बुक वैल्यू से नीचे चल रहे थे। अधिकारी ने कहा कि इस कदम से सरकार को न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता के मानकों की दिशा में बढऩे में मदद मिलेगी।
सरकार की कंपनी में 87.84 प्रतिशत हिस्सेदारी है। मौजूदा मानकों के मुताबिक सूचीबद्ध कंपनियों में न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता कुल शेयरों का 25 प्रतिशत होना चाहिए। सरकार ने पिछले साल सिक्योरिटी कान्ट्रैक्ट (रेगुलेशन) रूल्स, 1957 में संशोधन किया था, जिससे सूचीबद्ध कंपनियों को सार्वजनिक शेयरधारिता के दायरे को हासिल करने के लिए एक साल वक्त मिल सके।
इस बिक्री से सरकार को चल रहे वित्त वर्ष में विनिवेश से 32,000 करोड़ रुपये हासिल करने के लक्ष्य में मदद मिलेगी। अब तक सरकार ने ओएफएस, आरंभिक सार्वजनिक निर्गम और अन्य हिस्सेदारी बिक्री से 21,303 करोड़ रुपये जुटाए हैं।