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सऊदी वेल्थ फंड ने ली जियो की हिस्सेदारी

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Last Updated- December 15, 2022 | 12:33 PM IST

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने गुरुवार को कहा कि उसने अपनी डिजिटल इकाई की 2.32 फीसदी हिस्सेदारी सऊदी अरब की पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड (पीआईएफ) को 11,367 करोड़ रुपये में बेच दी और इस तरह से दो महीने में कंपनी ने संचयी तौर पर करीब 1.16 लाख करोड़ रुपये जुटा लिए।
22 अप्रैल को फेसबुक इंक के साथ शुरुआत के बाद रिलायंस अपनी जियो प्लेटफॉर्म की करीब 25 फीसदी हिस्सेदारी बेच चुकी है। ज्यादातर रिपोर्ट बताती है कि कंपनी का इरादा वित्तीय निवेशकों को हिस्सेदारी बेचने का रहा है। सऊदी सॉवरिन फंड की तरफ से निवेश 4.91 लाख करोड़ रुपये के इक्विटी वैल्यू और 5.16 लाख करोड़ रुपये के एंटरप्राइज वैल्यू पर हुआ है। कंपनी ने एक बयान में यह जानकारी दी।
इस निवेश के साथ जियो प्लेटफॉर्म ने कुछ अग्रणी वैश्विक निवेशकों से ऐसे समय में 1,15,693.95 करोड़ रुपये जुटाए जब दुनिया कोरोनावायरस महामारी से जूझ रही है और इस वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी जैसा माहौल है।
बयान में कहा गया है, पीआईएफ के निवेश के साथ जियो प्लेटफॉर्म ने वैश्विक स्तर के अहम वित्तीय निवेशकों के साथ साझेदारी कर ली है, जो भारत के लिए डिजिटल सोसायटी विजन स्थापित करने में योगदान करेंगे।
जियो प्लेटफॉर्म में ग्राहक संख्या के लिहाज से भारत की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी रिलायंस जियो है, जिसके 38.8 करोड़ से ज्यादा ग्राहक हैं। 2016 में प्रवेश के बाद से ही जियो ने कई प्रतिस्पर्धियों को बाहर निकलने के लिए मजबूर किया और दूरसंचार क्षेत्र में एकीकरण को बढ़ावा दिया।
पिछले दो महीने में अरबपति मुकेश अंबानी की कंपनियों ने 14 अरब डॉलर की परिसंपत्ति बिक्री की घोषणा की और 53,124 करोड़ रुपये के राइट्स इश्यू पूरे किए। इससे रिलायंस को साल के आखिर तक 1.61 लाख करोड़ रुपये के शुद्ध कर्ज के भुगतान में मदद मिलेगी। पीआईएफ की तरफ से भारतीय अर्थव्यवस्था में अब तक का सबसे बड़ा निवेश है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने कहा, रिलायंस का कई दशकों से सऊदी अरब के साथ अच्छा संबंध रहा है। यह संबंध अब भारत के नए तेल (डेटा) वाली अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएगा, जो पीआईएफ की तरफ से जियो प्लेटफॉर्म में निवेश से स्पष्ट हुआ है।
पीआईएफ के गवर्नर यासिर अल रुमैया ने कहा, हमें नवोन्मेषी कारोबार में निवेश करके खुशी हो रही है, जो भारत में तकनीकी क्षेत्र के कायापलट में सबसे आगे है। हमारा मानना है कि भारतीय डिजिटल अर्थव्यवस्था में काफी क्षमता है और जियो प्लेटफॉर्म हमें इस बढ़त का लाभ लेने के लिए अहम मौका दे रही है। यह निवेश हमें लंबी अवधि के लिहाज से सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था को वाणिज्यिक रिटर्न सृजित करने के लिए भी सक्षम बनाएगा और हमारे देश के नागरिकों के लिए भी।
यह सौदा भारतीय नियामक और अन्य आवश्यक मंजूरी पर निर्भर करेगा। मॉर्गन स्टैनली ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए वित्तीय सलाहकार के तौर पर काम किया और एजेडबी ऐंड पार्टनर्स और डेविस पॉक ऐंड वार्डवेल ने कानूनी सलाहकार के तौर पर काम किया।

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First Published - June 18, 2020 | 10:45 PM IST

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