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मंदी से मुकाबले को तैयार आरपीजी

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Last Updated- December 11, 2022 | 12:00 AM IST

आर्थिक मंदी का कड़ा मुकाबला करने के लिए आरपीजी समूह ने चौतरफा कोशिशें करनी शुरू कर दी हैं।
13,500 करोड़ रुपये के समूह ने प्रोजेक्ट आधारित कारोबार के लिए ‘हर्डल रेट’ बढ़ाने का फैसला तो किया ही, नए निवेशों की भुगतान अवधि भी कम कर दी है। उत्पादन क्षमता बढ़ाकर लागत कम करने का निर्णय भी कंपनी ने लिया है।
दरअसल दिसंबर में खत्म तिमाही में समूह का मुनाफा 33 फीसदी घटा। हालांकि बिक्री में 13 फीसदी की वृद्धि हुई। मार्च 2008 में खत्म वित्त वर्ष में तो समूह के 12 सूचीबद्ध कंपनियों का कुल कर्ज 15 फीसदी चढ़कर 4,972 करोड़ रुपये हो गया था।
इतना ही नहीं, समूह का बाजार पूंजीकरण 69.75 फीसदी गिरकर 4,531 करोड़ रुपये रह गया। पिछले साल 8 जनवरी को यह सबसे ऊंचे स्तर 14,980 करोड़ रुपये तक चला गया था। आरपीजी समूह के अध्यक्ष हर्ष गोयनका ने बताया कि उसकी कंपनियों ने पहले ही सुधार के कदम उठा लिए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि बहुत जल्द इनके परिणाम दिखने शुरू हो जाएंगे।
गोयनका ने बताया, ”मौजूदा समय में नगद राशि की उपयोगिता सबसे अधिक होती है। इसलिए केवल दिखाने के लिए हम अभी विस्तार नहीं करेंगे।” समूह की ऊर्जा कंपनी केईसी इंटरनैशनल द्वारा नई परियोजनाओं के लिए हर्डल रेट बढ़ा देने को इसी तरह का कदम माना जा रहा है। भुगतान बाधित न हो इसके लिए कंपनी ने भुगतान की तय अवधि घटा दी है।
कई परियोजनाओं में तो समूह 50 फीसदी तक तत्काल भुगतान ले रहा है। गोयनका ने बताया कि अपनी शर्तों के लिए उन्हें कई परियोजनाएं नहीं मिली। पर इसका कोई मलाल कंपनी को नहीं है, क्योंकि यह मंदी के बुरे असर से बचने की कोशिश है।
परियोजनाओं के पेबैक टाइम को पहले से कम कर दिया गया है। टायर कंपनी सिएट हलोल में अपनी नई परियोजना का विकास कर रही है। इसके लिए पेबैक अवधि को पहले के 3 साल से घटाकर अब 2 साल कर दिया गया है। गोयनका ने बताया कि समूह की पूंजी व्यय योजनाओं को सीमित करने की कोई योजना नहीं है और यह पहले की तरह जारी रहेगी।
उन्होंने कहा कि बाद की परियोजनाएं प्रभावित हो भी जाएं लेकिन पहले की परियोजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हर्ष गोयनका ने बताया कि समूह अगले 3 साल में अपने विस्तार पर 15 से 20 हजार करोड़ रुपये का निवेश करेगा। ये निवेश ऊर्जा, टायर, जैवप्रौद्योगिकी और रिटेल कारोबार में किए जाने हैं। गोयनका ने बताया, ”उनके समूह की कंपनियां निवेश कार्यक्रम को लेकर काफी संजीदा हैं।”

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First Published - April 11, 2009 | 4:12 PM IST

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