सत्यम के संस्थापक रामलिंग राजू के परिवार की कंपनी मायटास इन्फ्रा के प्रबंधन पर कब्जा जमाने की तैयारी चल रही है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैंस कंपनी (आईएल ऐंड एफएस) मायटास इन्फ्रा के प्रबंधन पर नियंत्रण कायम करना चाह रही है। आईएलऐंड एफएस गैर-बैंकिंग क्षेत्र की प्रमुख कंपनी है, जो बुनियादी क्षेत्रों की कंपननियों को मुख्यतौर पर ऋण मुहैया कराती है।
आईएल ऐंड एफएस उन 19 बैंकों और वित्तीय संस्थानों में शामिल है, जिसने मायटास इन्फ्रा को समेकित रूप से करीब 5,000 करोड़ रुपये का कर्ज दिया है। इसके साथ ही आईएल ऐंड एफएस मायटास की कई परियोजनाओं में साझेदार भी है, जिसमें हैदराबाद मेट्रो परियोजना भी शामिल है।
आंध्र प्रदेश सरकार ने मायटास को कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं आवंटित की हैं। ऐसे में सरकार भी चाहती है कि इस मामले का निपटारा जल्द हो जाए।
सूत्रों का कहना है कि राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और आईएल ऐंड एफएस के अधिकारियों के बीच इस बाबत मंगलवार को एक बैठक भी हुई थी।
आईएल ऐंड एफएस, आईएफसीआई और सिकॉम जैसी संस्थाओं ने राजू परिवार को मायटास के शेयरों के बदले में कर्ज दिया था। यही वजह है कि ये कंपनियां अब सरकार से मांग कर रही हैं कि मायटास इन्फ्रा के बोर्ड को भंग कर दिया जाए और ओपन ऑफर के नियमों में ढील दी जाए। इसके लिए पिछले छह माह की कंपनी के शेयरों की कीमत को औसत मूल्य माना जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि राजू परिवार ने मायटास इन्फ्रा के करीब 20 फीसदी शेयर आईएलऐंडएफएस के पास गिरवी रख दी है। लेकिन कंपनी इसे अपने नाम पर नहीं रखना चाहती है, क्योंकि ऐसा करने से उसे ओपन ऑफर लाना पड़ सकता है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि सेबी सत्यम की तरह ही मायटास इन्फ्रा में भी ओपन ऑफर के नियमों में ढील दे सकती है, क्योंकि दोनों कंपनियों की स्थिति करीब-करीब एक समान ही है।
एक अधिकारी ने बताया कि कर्जदाताओं के हित में कंपनी की स्थिति में सुधार लाना बेहद जरूरी है। हालांकि आईएल ऐंड एफएस के प्रवक्ता ने इस बारे में फि लहाल कुछ नहीं कहने से इनकार कर दिया।