पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच मचे घमासान के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईंधन खपत कम करने और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सामूहिक प्रयास का आह्वान करने के बाद भारतीय उद्योग जगत के नामचीन लोगों की तरफ से प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री की अपील को अपना पूरा समर्थन दिया है।
दूरसंचार क्षेत्र के दिग्गज सुनील भारती मित्तल ने सोमवार को प्रधानमंत्री की अपील का समर्थन किया। मित्तल ने कहा कहा कि देश 6-7 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर के साथ ‘शानदार’ रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा,‘कुल मिलाकर स्थिति बहुत अच्छी दिख रही है। मगर कुछ ऐसी परिस्थितियां सामने आ जाती हैं जो किसी के नियंत्रण में नहीं होतीं।’
मित्तल ने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीबीआई) के वार्षिक व्यापार सम्मेलन में यह बात कही। उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी संकट का जिक्र किया और कहा कि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं पर भारी दबाव पड़ रहा है और भारत भी इससे अछूता नहीं है।
भारती एंटरप्राइजेज के संस्थापक एवं अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री के संदेश को विचारणीय बताया और कहा,‘मुझे लगता है कि उद्योग जगत में हमें अपनी भूमिका निभानी होगी। हमें अपना योगदान देना होगा। हमारे उद्योग में लाखों लोग कार्यरत हैं। हम उनके संदेश को गहराई से और सार्थक रूप में आगे बढ़ा सकते हैं।’
उन्होंने कहा,‘हमें सोने के आयात के इस जुनून से बाहर निकलना होगा। हमें ऊर्जा लागत कम करनी होगी। हमें अपने उद्योग में नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ना होगा।’हीरो एंटरप्राइजेज के अध्यक्ष सुनील कांत मुंजाल ने कहा कि फिलहाल इसे लेकर कुछ नहीं कहा जा सकता कि पश्चिम एशिया संकट के बाद उत्पन्न अनिश्चितता का समाधान कब निकलेगा। उन्होंने कहा,‘हम दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा आयातकों में एक हैं। यह समझदारी की बात है कि हम ऊर्जा संरक्षण शुरू करें और देखें कि हम कैसे अधिक कुशल बन सकते हैं।’
प्रधानमंत्री ने रविवार को हैदराबाद में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक कार्यक्रम में कोविड महामारी के दौरान अपनाए गए उपायों जैसे घर से काम करना, ऑनलाइन मीटिंग और गैर-जरूरी यात्राएं कम करने को अपनाने का आह्वान किया था। उन्होंने पश्चिम संकट के बीच ऊर्जा आयात पर भारत की निर्भरता को देखते हुए ईंधन की खपत कम करने के लिए यह अपील की थी।
अपोलो हॉस्पिटल्स की शोभना कामिनेनी ने कहा कि प्रधानमंत्री देश से 6.5-7.0 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर धीमा करने के लिए नहीं बल्कि केवल ‘थोड़ा समझ-बूझ दिखाने’ का आग्रह कर रहे हैं। कामिनेनी कहा,‘इसका हम पर असर पड़ेगा, क्योंकि हमारे गुजर-बसर पर आने वाला खर्च बढ़ने वाला है। मगर यह सब कुछ समय के लिए ही होगा, इसलिए हम प्रधानमंत्री का समर्थन करते हैं।’ हालांकि, विशिष्ट उपायों के संबंध में भारतीय कंपनियां अभी भी स्थिति का आकलन कर रही हैं और प्रभावी प्रतिक्रिया के लिए अपने विकल्पों पर विचार कर रही हैं। घर से काम (डब्ल्यूएफएच) की संभावना पर कामिनेनी ने कहा कि फिलहाल ऐसा नहीं हो रहा है मगर लगता है कि कुछ लोग इसे एक अच्छा तरीका समझ कर अपनाएंगे। कामिनेनी ने कहा, ‘हमें मिलकर काम करना होगा।’ उन्होंने कहा कि हालांकि, भारत कई अन्य देशों की तुलना में कम प्रभावित हुआ है मगर देश की आबादी बहुत बड़ी है इसलिए साथ मिलकर अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
इस बीच, आईटी कर्मचारियों के संगठन नैसेंट इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलजी एम्प्लॉइज़ सीनेट (नाइट्स) ने श्रम और रोजगार मंत्रालय से आग्रह किया है कि वह आईटी/आईटीईएस कंपनियों और डिजिटल रूप से सेवाएं प्रदान करने वाले क्षेत्रों को निर्देश जारी करे कि वे जहां भी परिचालन के लिहाज से संभव हो वहां राष्ट्र हित में अपने कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से घर से काम करने के लिए कहें।
नाइट्स के अध्यक्ष हरप्रीत सिंह सलूजा ने कहा कि कोविड महामारी के अनुभव ने साबित कर दिया है कि उपयुक्त आईटी एवं डिजिटल रूप से सेवाएं प्रदान करने वाले पदों के लिए अनिवार्य रूप से घर से काम करना व्यावहारिक, तकनीकी रूप से संभव और परिचालन के लिहाज से टिकाऊ है। कोविड 19 महामारी के दौरान घर से काम करने का चलन शुरू हुआ था और कुछ कंपनियां (विशेष रूप से आईटी क्षेत्र में) अभी भी हाइब्रिड मोड में काम कर रही हैं।
उद्योग संगठन नैसकॉम ने कहा कि भारत में प्रौद्योगिकी उद्योग अभी भी हाइब्रिड कार्य ढांचे के साथ काम कर रहे हैं। नैसकॉम के मुताबिक विभिन्न संगठन अपनी और ग्राहकों की जरूरतों के अनुरूप घर से और दफ्तर में काम करने की व्यवस्था के साथ बने हुए हैं।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव को देखते हुए कंपनियों ने परिसरों में पूरी समझ-बूझ के साथ ऊर्जा प्रबंधन से उपाय कर रहे हैं। नैसकॉम ने कहा कि इन उपायों में गैर-जरूरी खपत कम करना, चुनिंदा सुविधा सेवाएं युक्तिसंगत बनाना और परिचालन के लिहाज से रिमोट या हाइब्रिड तरीका अपना रहे हैं ताकि ऊर्जा का इस्तेमाल कम हो सके। हालांकि, नैसकॉम ने कहा,‘हम घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और समन्वित और पूरी जिम्मेदारी के साथ कदम उठाने के लिए सभी हितधारकों और सरकारी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं।’
प्रमुख आईटी कंपनियों में टीसीएस ने कर्मचारियों के लिए सप्ताह में पांच दिन कार्यालय से काम करना अनिवार्य कर दिया है जबकि इन्फोसिस ने कर्मचारियों को महीने में कम से कम 10 दिन दफ्तर से काम करने के लिए कहा है। विप्रो अपने कर्मचारियों को सप्ताह में तीन दिन कार्यालय बुला रही है।
एक शीर्ष परामर्श कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि कोविड महामारी के बाद से कंपनी के लिए अपने वरीय और छोटे दोनों कर्मचारियों को नियमित रूप से कार्यालय आने के लिए मनाना काफी मुश्किल हो रहा है। कंपनी ने कहा,‘कुछ महीने पहले ही सभी कर्मचारियों ने नियमित रूप से दफ्तर आकर काम करना शुरू किया था। इस बात को ज्यादा दिन नहीं हुए हैं और वरिष्ठ और कनिष्ठ दोनों कर्मचारी अब नियमित रूप से कार्यालय आने लगे हैं।’
उन्होंने आगे कहा,‘सलाहकारों को लंबे समय तक काम करना पड़ता है। ऐसा नहीं है कि घर पहुंचने के बाद काम बंद हो जाता है इसलिए घर से काम करने की उनकी मांग जायज थी।’
प्रधानमंत्री की अपील के बाद इन कर्मचारियों द्वारा घर से काम करने की मांग को एक बार फिर उठाने की उम्मीद है। हालांकि, यह परामर्श कंपनी इस संबंध में सरकार की तरफ से औपचारिक सलाह या अधिसूचना जारी होने के बाद ही कोई निर्णय लेगी।
एक प्रमुख वाहन कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने भी ऐसे ही विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि कंपनी प्रबंधन ने प्रधानमंत्री के संदेश का संज्ञान लिया है और वह सरकार की तरफ से औपचारिक सलाह का इंतजार करेगा। उन्होंने आगे कहा,‘अगर कर्मचारियों का एक बड़ा हिस्सा घर से काम कर रहा है तो हमारी जैसी विनिर्माण कंपनी के लिए कर्मचारी समय सारिणी (ड्यूटी रोस्टर) तैयार करना एक भारी भरकम काम हो जाता है। लिहाजा अब देखना है कि सरकार आने वाले दिनों में इस दिशा में कैसे आगे बढ़ती है।’
एक समूह ने कहा कि उसका मानव संसाधन विभाग संभावित उपायों पर विचार-विमर्श कर रहा है। समूह ने कहा कि इस संबंध में कोई निर्णय लेने में कुछ दिन तो जरूर लग जाएंगे।
एक पेंट कंपनी ने कहा कि जरूरत पड़ने पर उसके मुख्यालय में आंशिक रूप से घर से काम करने की व्यवस्था लागू की जा सकती है।
कुछ कंपनियों ने कोविड-19 महामारी के दौरान अपनाई गई कार्य व्यवस्था में लचीलापन बरकरार रखा है। उदाहरण के लिए टाटा मोटर्स ने बॉम्बे हाउस में हाइब्रिड वर्किंग मॉडल जारी रखा है जिससे कर्मचारियों को हर महीने कुछ निश्चित दिनों के लिए घर से काम करने की इजाजत मिल जाती है।