भारत का सबसे बड़ा यूपीआई ऐप फोनपे इस साल अपने 10 साल पूरे कर रहा है। अब कंपनी अपने मौजूदा यूजर्स को ज्यादा सेवाओं से जोड़ने पर जोर दे रही है। इस बीच पश्चिम एशिया में संघर्ष और शेयर बाजार में बढ़ी उठापटक के कारण वॉलमार्ट समर्थित फोनपे ने मार्च में अपनी लिस्टिंग की योजना कुछ समय के लिए रोक दी थी।
फोनपे के को-फाउंडर और मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (CTO) राहुल चारी ने मुंबई में अजिंक्य कावले को दिए इंटरव्यू में अगले 10 साल की कंपनी की योजनाओं और बाजार में कुछ कंपनियों की ज्यादा हिस्सेदारी से जुड़े जोखिमों पर बात की। पेश हैं इंटरव्यू के संपादित अंश:
फोनपे के 10 साल पूरे होने के बाद अगले एक दशक में कंपनी की ग्रोथ कहां से आएगी?
मौजूदा यूजर्स के बीच अभी भी अपनी सेवाओं का इस्तेमाल बढ़ाने की काफी गुंजाइश है। फोनपे ऐप में हमारे पास 100 से ज्यादा तरह की सेवाएं हैं, लेकिन अभी भी ज्यादातर इस्तेमाल टॉप 10 सेवाओं तक सीमित है। आगे की ग्रोथ इस बात से आएगी कि हम ग्राहकों को सिर्फ पैसे भेजने से आगे बढ़ाकर खर्च करने और फिर बचत तथा निवेश की तरफ ले जाएं।
लोगों में इन आदतों को विकसित करने के लिए हमारे पास छोटी रकम वाले उत्पाद हैं। हमारे पास एक यूनिवर्सल टिकटिंग प्लेटफॉर्म भी है, जिसके जरिए यात्रा से लेकर अलग-अलग तरह के टिकट तक सभी के लिए एक ही व्यवस्था बनाने की कोशिश की जा रही है। अभी यह क्षेत्र काफी बिखरा हुआ है। अगर इसे व्यवस्थित किया जाता है तो इसका इस्तेमाल भी बड़े स्तर पर हो सकता है।
दूसरा हिस्सा अगले समूह के यूजर्स को जोड़ने की चुनौती से जुड़ा है। हमारे पास 70 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड यूजर्स हैं और कुल मिलाकर यूपीआई के करीब 50 करोड़ सक्रिय यूजर्स हैं। अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जिन्हें इस व्यवस्था से जोड़ना बाकी है।
हमने सामान्य मोबाइल फोन के लिए एसएमएस के जरिए यूपीआई शुरू किया है। इसका इस्तेमाल सिर्फ पैसे भेजने और रिचार्ज के लिए ही नहीं, बल्कि बिल भुगतान और छोटे फोन पर स्कैन करके भुगतान करने के लिए भी किया जा सकता है।
हमारा विचार पहले नेटवर्क तैयार करने और इन लोगों को भुगतान हासिल करने वाले नेटवर्क से जोड़ने का है। इसके बाद जैसे-जैसे वे स्मार्टफोन की दुनिया में आते हैं, उन्हें दूसरी सेवाओं से भी जोड़ा जा सकता है।
इंजीनियरिंग के नजरिए से क्या बाजार में ज्यादा हिस्सेदारी से जुड़ा जोखिम अब आपके लिए खत्म हो चुका है?
मेरा मानना है कि पूरे सिस्टम से जुड़ा जोखिम इंजीनियरिंग के स्तर पर हल किया जा चुका है। देशभर में हमारे तीन डेटा सेंटर हैं। हमारे पास कई पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर (पीएसपी) साझेदार भी हैं, जिनमें यस बैंक, एक्सिस बैंक और आईसीआईसीआई बैंक शामिल हैं।
हमारे ग्राहक कई पीएसपी हैंडल बना सकते हैं। इससे किसी एक व्यवस्था पर निर्भरता से जुड़े जोखिम को कम किया जा सकता है। कई डेटा सेंटर होने और जरूरत पड़ने पर एक डेटा सेंटर से दूसरे पर काम स्थानांतरित करने की क्षमता का मतलब है कि पूरे सिस्टम के स्तर पर जोखिम लगभग नहीं है।
जहां तक बाजार में हिस्सेदारी कुछ कंपनियों के पास ज्यादा होने से जुड़े जोखिम की बात है, हमारा हमेशा से कहना रहा है कि यूपीआई पूरी तरह एक-दूसरे के साथ काम करने वाली व्यवस्था है और ऐप को आसानी से बदला जा सकता है।
ग्राहकों के पास विकल्प है और वे कभी किसी एक प्लेटफॉर्म पर निर्भर रहने के लिए मजबूर नहीं होते। हमारा मानना है कि यहां बाजार में ज्यादा हिस्सेदारी से जुड़ा जोखिम नहीं है। हालांकि, पूरे सिस्टम से जुड़ा जोखिम बहुत अहम है और उसका ध्यान रखना जरूरी है।
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आज कंपनी की कमाई का बड़ा हिस्सा भुगतान कारोबार से आता है। ऐसे में आने वाले समय में भुगतान और वित्तीय सेवाओं का हिस्सा किस तरह बदलता दिख रहा है?
हम अपने कारोबार को तीन बड़े हिस्सों में देखते हैं। पहला भुगतान, दूसरा भुगतान के ऊपर दूसरी सेवाओं का वितरण और तीसरा वितरण के जरिए कर्ज देना। हमारा मानना है कि भुगतान और उससे जुड़ी सेवाओं का वितरण हमारी कुल कमाई का बहुत बड़ा हिस्सा बना रहेगा।
हमने तीन साल पहले कर्ज कारोबार में कदम रखा था और यह अच्छी तरह बढ़ रहा है। समय के साथ वित्तीय सेवाएं और खासतौर पर कर्ज कारोबार हमारी कमाई का एक अच्छा हिस्सा बन सकता है। भुगतान और उससे जुड़ी सेवाओं के बड़े आकार और इसमें मौजूद अवसरों को देखते हुए हमारा मानना है कि यह कारोबार आगे भी हमारी कमाई का बड़ा हिस्सा बना रहेगा और बढ़ता रहेगा।
क्या वित्तीय सेवाओं पर आपका जोर गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) का लाइसेंस मिलने पर निर्भर है?
अभी लोन सर्विस प्रोवाइडर (एलएसपी) या वितरक के रूप में काम करने का बड़ा मौका है। इसमें हम एनबीएफसी या बैंकों जैसे कर्ज देने वाले संस्थानों की मदद कर सकते हैं। अपने लेनदेन से जुड़े जोखिम और ग्राहकों के व्यवहार के आधार पर तैयार किए गए स्कोर का इस्तेमाल करके कर्ज देने के फैसले में उनकी मदद की जा सकती है।
जब तक यह अवसर अपनी सीमा तक नहीं पहुंचता और जब तक ऐसी स्थिति नहीं आती कि हमारे स्कोर कर्ज देने के लिए पर्याप्त अच्छे हों लेकिन नए कर्ज लेने वाले ग्राहकों के बाजार में जाने के लिए पर्याप्त जोखिम लेने की इच्छा न हो, तब तक एनबीएफसी लाइसेंस की जरूरत कम है।
यह फैसला ज्यादा डेटा के आधार पर होना चाहिए। ऐसी स्थिति हो सकती है जहां डेटा से पता चलता हो कि कोई व्यक्ति कर्ज चुकाने में सक्षम है, लेकिन हमारे साझेदार उतनी तेजी से आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दे रहे हों। शायद ऐसी जगहों पर एनबीएफसी लाइसेंस मददगार हो सकता है। लेकिन फिलहाल हम पूरी तरह एलएसपी के रूप में काम कर रहे हैं।
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गेमिंग और किराये के भुगतान जैसी रोकी गई श्रेणियों से हुए ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (जीएमवी) के नुकसान की भरपाई कैसे करेंगे?
मुझे नहीं लगता कि हमने कभी किसी एक श्रेणी में हुए नुकसान की भरपाई के नजरिए से कारोबार को देखा है। हम हमेशा एक ग्राहक से औसत कमाई और उस ग्राहक से उसके पूरे जुड़ाव के दौरान होने वाली कमाई को देखते हैं।
बड़े स्तर पर काम करने वाले प्लेटफॉर्म को हमेशा यह मानकर चलना होता है कि लगातार नई श्रेणियां जुड़ती रहेंगी। इससे आपको समझदारी के साथ अलग-अलग उत्पाद और सेवाएं ग्राहकों तक पहुंचाने का मौका मिलता है। कई बार कुछ श्रेणियों की ग्रोथ रुक सकती है, उनमें गिरावट शुरू हो सकती है या नई श्रेणियां सामने आ सकती हैं। मैं किसी एक खास श्रेणी को ऐसा नहीं मानता जिस पर हमारी निर्भरता बहुत ज्यादा हो।
अलग-अलग कारोबार और सेवाओं में मौजूदगी बहुत जरूरी है। कुल मिलाकर किसी सक्रिय ग्राहक से होने वाली कमाई को उसके पूरे जुड़ाव के दौरान देखें तो यह बढ़ती रहेगी, क्योंकि समय के साथ हम और श्रेणियां जोड़ते जाएंगे।
कारोबारियों को बीच के प्लेटफॉर्म की भूमिका खत्म होने का डर है और फिनटेक कंपनियां एजेंटिक पेमेंट के इस्तेमाल के लिए तैयारी कर रही हैं। फोनपे इन दोनों चीजों को कैसे देखता है?
कारोबार से कारोबार यानी बी2बी भुगतान में किसी भी तीसरे पक्ष के पेमेंट प्रोवाइडर के लिए यह जरूरी है कि वह आने वाले हर नए भुगतान मॉडल को समर्थन दे सके। अगर बाजार ऐसी दिशा में जाता है जहां एजेंटिक कॉमर्स के लिए बैकएंड प्रोसेसर की जरूरत होती है तो हम वह भूमिका निभाएंगे। यह कारोबारियों को दी जाने वाली एक सेवा के रूप में हमारे बी2बी कारोबार का हिस्सा होगा।
हम इतना कर सकते हैं कि इस तरह की सेवा के साथ तैयार रहें, ताकि अगर ट्रैफिक और कारोबार इन प्लेटफॉर्म की तरफ जाता है तो हम उसका हिस्सा बन सकें। फोनपे ऐप के भीतर भी एजेंटिक मॉडल अपनाने का अवसर है, जहां बातचीत के जरिए ग्राहकों को बेचे जाने वाले उत्पाद खोजने में मदद की जा सकती है।
आगे चलकर हमारे पास ऐसा एजेंटिक इंटरफेस भी हो सकता है जो नो योर कस्टमर (KYC) और खरीदारी से जुड़े फॉर्म भरने की पूरी प्रक्रिया में मदद करे। जहां जरूरत होगी, वहां हम फोनपे ऐप के भीतर अपने कारोबार को एजेंटिक कॉमर्स के मुताबिक बदलते रहेंगे।