मालढुलाई को बाधारहित बनाने की केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी फ्रेट कॉरिडोर परियोजना के निर्माण कार्य की शुरुआत मंगलवार से हो रही है। 3,300 किलोमीटर के इस रूट पर मालगाड़ी को 100 किलोमीटर प्रति घंटा से चलाए जाने की योजना है।
सीऐंडसी और उसकी सहयोगी बीएससीपीएल इंफ्रास्ट्रक्चर को पूर्वी कॉरिडोर के शुरुआती 105 किलोमीटर के निर्माण का ठेका 781 करोड़ रुपये में दिया गया है। इस ठेके से जुड़ी तमाम चीजों पर सीऐंडसी के चेयरमैन जी. एस. जौहर ने बिजनेस स्टैंडर्ड से बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश:
परियोजना की अवधि 36 महीने क्या कम नहीं है?
नहीं, ऐसी परियोजना को पूरा करने के लिए 36 महीने की समय सीमा वाजिब है।
इस परियोजना की वित्तीय शरंते क्या हैं?
यह परियोजना ईपीसी ठेका है। मतलब कि तकनीक, खरीद और निर्माण (इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण) की सारी जिम्मेदारी हमारी कंपनी पर है। इसमें भुगतान काम से जुड़ा होगा। हम मासिक बिल के जरिए धन पाएंगे।
आर्थिक मंदी जब तमाम कंपनियो का कारोबार प्रभावित कर रही है, तब सीऐंडसी का ऑर्डर बुक 2,789 करोड़ रुपये का हो चला है। क्या कहेंगे इस मुद्दे पर आप?
असर तो है। बीते कुछ महीने में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने भी बहुत ज्यादा परियोजनाओं के लिए ठेके नहीं मंगाए हैं। हमें उम्मीद है कि अगले कुछ महीने में जब एनएचएआई कई और परियोजनाओं का आवंटन करेगा, तब हमारी झोली में कई और ठेके आएंगे।
अभी कौन-कौन सी परियोजनाएं हैं, जिनकी बोली लगने वाली है?
एनएचएआई के अलावा जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन (जेएनएनयूआर-एम) की परियोजनाएं हैं। इसके अलावा, फ्रेट कॉरिडोर के अन्य रूट हैं। कुल मिलाकर अगले 5-6 महीने में करीब 1,000 करोड़ रुपये के परियोजनाओं का आवंटन होने वाला है। फिलहाल हमारा ऑर्डर बुक ठीक-ठाक हो चला है।
सीएंडसी की विकास रणनीति आगे क्या रहने वाली है?
अब हम भवनों के निर्माण पर फोकस करने वाले हैं। सड़कों के निर्माण में काफी निवेश करना पड़ता है। उदाहरण के लिए, 900 करोड़ के ठेके में हमें उपकरणों पर ही 100 करोड़ रुपये का निवेश करना पड़ता है। दूसरी ओर भवन निर्माण की बात करें तो 635 करोड़ रुपये की परियोजना पर महज 25-30 करोड़ रुपये का निवेश करना होता है।