पहले खाड़ी युद्ध (1991) के दौरान कुवैत में जमा हुए तेल का भंडार साफ करने का ठेका हासिल करने की होड़ में शामिल होने का निर्णय करने के बाद ओएनजीसी-टेरी बायोटेक लिमिटेड (ओटीबीएल) 3-4 साल में इसके लिए 10,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बना रही है।
ओटीबीएल से संपर्क करने पर उसके एक अधिकारी ने यह कहते हुए प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया कि इससे सौदे को नुकसान हो सकता है। गौरतलब है कि 3 अरब डॉलर की इस परियोजना के लिए बोली लगाने की आखिरी तारीख 1 अप्रैल थी। ओटीबीएल तेल और प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) और द एनर्जी ऐंड रिसोर्सेज इंस्टीटयूट (टेरी) का संयुक्त उपक्रम है।
ओटीबीएल अपनी दो मुख्य सफाई तकनीक-बायोरिमेडिटेशन और एंटी-पैराफिन डिग्रेडिंग बैक्टिरियल (पीडीबी) कंसोर्टियम को भारतीय और विदेशी तेल कंपनियों को बेचने की योजना बना रही है। पहली तकनीक तो वही है जिसके जरिए कुवैत का ठेका पूरा किया जाना है।
सूत्रों ने पुष्टि की कि कंपनी इस ठेके के लिए अगले तीन-चार साल में 10,000 करोड़ रुपये जुटाने का इंतजाम कर रही है। ऐसा होने से कंपनी तेल उद्योग में कार्यरत एशिया की सबसे बड़ी बायोरिमेडिएशन कंपनी बन जाएगी।
उल्लेखनीय है कि ओटीबीएल ने बायोरिमेडिएशन तकनीक का मेहसाणा में सफलतापूर्वक परीक्षण हो जाने के बाद तय किया कि वह तेल जमाव दूर करने के ठेके में भाग लेगी। सूत्रों के मुताबिक, इस तकनीक पर दूसरी तेल कंपनियों की भी निगाहें लगी हुई थी।
ओएनजीसी के कार्यकारी निदेशक ए. के. गुप्ता ने बताया, ”लंबे समय से मानव और पशु कचरे को दूर करने के लिए जैविक तरीके का इस्तेमाल होता रहा है। अब औद्योगिक कचरे को भी साफ करने के लिए यह तरीका तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। खतरनाक कचरे को दूर करने के लिए बायोरिमेडिएयशन तकनीक काफी कारगर है। पर्यावरण के लिहाज से भी यह तकनीक काफी सुरक्षित है।”
कंपनी ने अहमदाबाद स्थित इंस्टीटयूट ऑफ रिार्वायर स्टडीज (आईआरएस) में पीडीबी कंसोर्टियम नामक दूसरी तकनीक भी ईजाद की है। सूत्र ने बताया कि पाइपों और कुओं में पैराफिन वैक्स जमा होने से रोकने के लिए इसे दूर करने की जरूरत है। ओटीबीएल एक महीने पहले ही पश्चिमी देशों में इस तकनीक का इस्तेमाल शुरू कर चुकी है।
जानकारों के मुताबिक, तेल भारी होने के चलते यह पूरी दुनिया की समस्या है। ओटीबीएल का मानना है कि इन दोनों तकनीकों में असीम संभावनाएं हैं। लक्ष्य है कि वियतनाम, मलयेशिया, इंडोनेशिया, ओमान और इराक में इसका इस्तेमाल किया जाए।