बेंगलुरु में चल रहे एयरोइंडिया, 2009 में हर बड़े अधिकारी और मंत्रियों ने बार-बार यह कहा है कि आर्थिक मंदी का असर रक्षा खरीद पर नहीं पड़ेगा।
न सिर्फ इतना, बल्कि उन्होंने तो यह भी बताया कि रक्षा खरीद के लिए पैसों में भी इजाफा किया जाएगा। अब भारत में एक ऐसे फंड की शुरुआत हुई है, जिसका इस्तेमाल रक्षा क्षेत्र में निवेश करने के लिए किया जाएगा। इस फंड का नाम रखा गया है इंडिया राइजिंग फंड।
इसके शुरुआत की घोषणा शुक्रवार को की गई। इंडिया राइजिंग फंड एक 750 करोड़ की वेंचर कैपिटल फर्म है, जिसे सेबी की भी मंजूरी मिल चुकी है। इस फंड के जरिये रक्षा क्षेत्र में काम करने वाले लघु और मझोले उद्यमों में निवेश किया जाएगा।
विदेशी निवेश प्रोत्साहन बोर्ड (एफआईपीबी) ने इस फंड को विदेशी निवेशक से 550 करोड़ रुपये जुटाने की इजाजत दे दी है। जबकि बाकी के 200 करोड़ रुपये घरेलू बाजार से उगाहे जाएंगे। फंड की 90 फीसदी पूंजी का इस्तेमाल रक्षा निर्माण सेक्टर में किया जाएगा, जबकि 10 फीसदी का इस्तेमाल शोध और विकास कार्यों के लिए किया जाएगा।
फंड के मैनेजिंग ट्रस्टी राजेश नारायण के मुताबिक इस बुरे दौर में भी यह फंड मोटा मुनाफा कमाने की काबलियत रखता है। उन्होंने बताया, ‘अब सरकार रक्षा क्षेत्र में प्राइवेट कंपनियों की हिस्सेदारी को बढ़ाने की पूरी कोशिश कर रही है। इसका मतलब यह हुआ कि इस क्षेत्र में प्राइवेट कंपनियों के पास अच्छे मौके हैं क्योंकि सरकारी कंपनियां उनके पास अपने काम की ऑउटसोर्सिंग करेंगी।
साथ ही, अब नई रक्षा खरीद नीति के तहत भारतीय सेना को हथियार मुहैया करवाने वाली विदेशी कंपनियों को भारत से ही 30-35 फीसदी कल-पुर्जे मंगवाने पड़ेंगे। इसी वजह से तो आज देश में रक्षा सेक्टर में काम करने वाले छोटे और मझोले उद्यमों के साथ दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियां बात कर रही हैं।’
जोरदार पहल
इंडिया राइजिंग फंड करेगी रक्षा क्षेत्र के छोटे और मझोले उद्यमों में निवेश
यह होगा 750 करोड़ रुपये का फंड