देश की दो बड़ी विमान कंपनियों एयर इंडिया और इंडियन एयरलायंस की एकीकरण प्रकिया में देरी हो सकती है। 2007 में शुरू हुई एकीकरण की यह प्रक्रिया टिकटों की बिक्री का सामान्य आरक्षण प्लेटफॉर्म तैयार करने में देर होने से हुई है।
अनुमान है कि विलय की यह प्रकिया 12 से 15 महीने और देर हो जाएगी। नैशनल एविएशन कंपनी ऑफ इंडिया (नैसिल) के मुख्य प्रबंध निदेशक रघु मेनन ने पिछले साल बताया था कि वित्त वर्ष 2009 के खत्म होते-होते दोनों कंपनियों के विलय की यह प्रक्रिया 70 फीसदी तक पूरी हो जाएगी।
उल्लेखनीय है कि अभी दोनों कंपनियां अलग-अलग आईटी कंपनियों द्वारा मुहैया कराए जा रहे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रही हैं। एयर इंडिया जहां यूनिसिस से वहीं इंडियन एयरलायंस आईबीएम से सेवाएं ले रही हैं। विलय के लिए जरूरी है कि दोनों कंपनियां एक समान प्लेटफॉर्म का ही इस्तेमाल करें।
ऐसा करने से उन्हें एकसमान एयरलाइन कोड-एआई दिया जाएगा। इससे टिकटों का बेहतर प्रबंधन तो हो ही सकेगा, नेटवर्क का नियोजन भी सही तरीके से हो सकेगा। पिछले साल, नैसिल ने आईटी सेवा मुहैया कराने वाली कंपनी के लिए एक ठेका निकालकर कई कंपनियों का चयन किया था।
इनमें ईडीएस और एमैडयूस शामिल थी। इनमें से अंतत: ईडीएस का चुनाव किया गया। ईडीएस सूत्रों के मुताबिक, ईडीएस नैसिल से ठेके की अवधि (जिस समय-सीमा के भीतर काम पूरा किया जाता है) के बारे में पूछने जा रही है, जिसे अगले 15 महीने के लिए बढ़ा दिया गया है।
ठेके में यह समय-सीमा महज 9 महीने की बताई गई थी। सूत्र के अनुसार, ‘यदि यह कंपनी ठेके की अवधि बढ़ाने के लिए सहमत हो जाती है तो फिर विलय की यह प्रक्रिया साल भर से ज्यादा देर हो जाएगी। नहीं तो फिर नए सिरे से ठेके आमंत्रित करने होंगे और यदि ऐसा हुआ तो फिर बहुत देर हो जाएगी।’
सूत्र ने बताया कि ईडीएस का काम स्टार अलायंस के मानकों पर खरा नहीं उतर रहा था। मालूम हो कि एयर इंडिया हाल ही में वैश्विक एयरलायंस गठबंधन में शामिल हुआ है।
एयर इंडिया के एक अधिकारी ने बताया, ‘एक प्लेटफॉर्म न हो पाने के चलते हमलोग गठबंधन के फायदों का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि हम सदस्यता शुल्क अदा कर रहे हैं। सिस्टम स्थापित हो जाने के बाद भी गठबंधन की उपयोगिता बनी रहेगी।
अभी करें इंतजार
इंडियन एयरलाइंस और एयर इंडिया के एकीकरण में अभी हो सकती है 12 से 15 महीने की देर
देरी की वजह है टिकट बिक्री की सामान्य प्रक्रिया का तैयार न होना