भूषण पावर ऐंड स्टील (बीपीएसएल) के समाधान पर पहुंचने के साथ अब सुर्खियां दिवालिया एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत आरबीआई द्वारा समाधान के लिए अनिवार्य गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) की पहली सूची पर केंद्रित हो गई हैं।
सूची में 12 बड़े एनपीए में से ज्यादातर को 2017 में राष्ट्रीय कंपनी विधि पंचाट (एनसीएलटी) द्वारा स्वीकार किया गया था, एरा इन्फ्रा इंजीनियरिंग को छोड़कर। एरा इन्फ्रा को इस संबंध में 2018 में स्वीकृति मिली थी। तब से साढ़े तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन पांच कंपनियों – इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स, भूषण स्टील, मोनेट इस्पात ऐंड एनर्जी, एस्सार स्टील इंडिया और आलोक इंडस्ट्र्रीज ने प्रबंधन नियंत्रण का स्थानांतरण दर्ज किया है। ज्योति स्ट्रक्चर्स के मामले में, सफल समाधान आवेदक द्वारा अधिग्रहण की प्रक्रिया में कोविड-19 महामारी की वजह से विलंब हुआ था और यह अभी विचाराधाीन है।
तीन अन्य कंपनियां आखिरी चरण में हैं, जिनमें बीपीएसएल, जेपी इन्फ्राटेक और एमटेक ऑटो शामिल हैं। बीपीएसएल में, समाधान योजना के खिलाफ आवेदन सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लंबित हैं। लेकिन ज्यादातर ऋणदाताओं ने जेएसडब्ल्यू स्टील की समाधान योजना के अनुरूप भुगतान स्वीकार करने पर सहमति जताई है। हालांकि यह सहमति उस शर्त पर जताई गई है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विपरीत फैसले की स्थिति में पैसा वापस लौटाया जाएगा। कोशिश की जा रही
है कि यह कार्य 31 मार्च तक पूरा किया जाए।
स्टॉक एक्सचेंज को भेजी सूचना में कहा गया है कि जेपी इन्फ्राटेक में, सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष दलीलें पेश की गई हैं और इसका फैसला सुरक्षित है। एमटेक ऑटो भी इस दिशा में प्रगति कर रही है।
सूत्रों का कहना है कि सर्वोच्च नयायालय ने इस मामले को एक महीने के अंदर सुलझाए जाने के लिए इसे फिर से एनसीएलटी के पास भेज दिया है।
ज्यादातर मामलों में 270 दिन की अधिकतम समय-सीमा का उल्लंघन किया गया था। इक्रा में उपाध्यक्ष अभिषेक डफरिया ने कहा, ‘प्रक्रिया सुनियोजित है, लेकिन इसका क्रियान्वयन प्रभावित हो रहा है।’
उनका कहना है कि विलंब से परिसंपत्ति वैल्यू प्रभावित हुई है, लेकिन यह काफी हद तक एक नया कानून है। डफरिया ने कहा, ‘बड़े आकार के एनपीए आगामी मामलों के लिए नए कानून और मानक स्थापित कर रहे हैं। भविष्य में, आप यह उम्मीद कर सकते हैं कि पुराने अनुभव लागू होंगे, जिससे प्रक्रिया को तेज बनाने में मदद मिलेगी।’
जेएलजे लॉ ऑफिसेज के मैनेजिंग पार्टनर मनीष जैन का मानना है कि बड़े एनपीए समाधानों से धारा 29ए जैसे कानूनों के विविध पहलुओं के संबंध में स्पष्टता लाने और दिवालिया प्रक्रिया की शुद्घता को लेकर चर्चा में मदद मिली है।
धाारा 29ए उन लोगों को प्रतिबंधित करती है जिन्होंने कॉरपोरेट देनदार या संबद्घ पक्ष की चूक में योगदान दिया है।
सूची में लंबित कंपनियों में शामिल इरा इन्फ्रा इंजीनियरिंग भी मिसाल साबित कर सकती है। इरा इन्फ्रा के लिए समाधान आवेदनों में ऐसी समाधान योजनाएं सौंपी गईं जिनमें उसकी सभी बीओटी (बिल्ड-ऑपरेटर-ट्रांसफर) परियोजनाएं उसकी प्रस्तावित समाधान योजनाओं का हिस्सा बनाई जानी थीं।
इसे एनसीएलटी के समक्ष पेश किया गया जिससे लेनदारों की समिति (सीओसी) ऐसे मजबूत समाधान पर विचार कर सके जिसमें इरा इन्फ्रा इंजीनियरिंग और बीओटी परियोजनाएं शामिल हैं।
नहीं तो, सीओसीसमाधान योजना पर विचार करने के लिए सशक्त नहीं है, क्योंकि बीओटी परियोजनाएं अलग कानूनी इकाइयां हैं और सिर्फ इरा इन्फ्रा को ही आईबीसी के तहत स्वीकार किया गया था। आवेदन एनसीएलटी के सक्षम लंबित है।
सूची में दो परिसंपत्तियों – लैंको इन्फ्राटेक और एबीजी शिपयार्ड को समापन की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। एबीजी शिपयार्ड के मामले में, दिसंबर में एनसीएलटी ने परिसमापक को चार ई-नीलामियों की विफलता के बाद निजी तौर पर बिक्री के जरिये परिसंपत्तियों की बिक्री करने की अनुमति दी थी।