कलकत्ता उच्च न्यायालय के खंडपीठ ने हर्ष वर्धन लोढ़ा को एम पी बिड़ला समूह की इकाइयों में पद संभालने पर रोक वाले एकल पीठ के आदेश पर अंतरिम स्थगन से इनकार कर दिया। लोढ़ा की तरफ से आठ आवेदन दाखिल किए गए थे, जिसमें एमपी बिड़ला समूह की कंपनियों बिड़ला कॉरपोरेशन, विंध्य टेलीलिंक्स, यूनिवर्सल केबल्स और बिड़ला केबल की तरफ से दिए गए आवेदन शामिल हैं। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि मामले के लंबित होने के दौरान प्रियंवदा बिड़ला एस्टेट के शेयरों के दम पर एम पी बिड़ला समूह की किसी भी इकाई में कोई पद संभालने पर हर्ष वर्धन लोढ़ा पर पाबंदी है।
अदालत ने कहा कि एपीएल समिति (प्रशासकों की समिति पेंडेंट लाइफ) के पास प्रियंवदा बिड़ला की एस्टेट पर नियंत्रण व प्रशासन का अधिकार है, जिसे प्रोबेट कोर्ट, इस अदालत की खंडपीठ और सर्वोच्च न्यायालय की तरफ से बार-बार विभिन्न न्यायिक आदेश के जरिये दोहराया गया है। ऐसे में हमें इस चरण में आदेश पर स्थगन का कोई कारण नहीं दिखता। बिड़ला फैमिली के वकील खेतान ऐंड कंपनी के एन जी खेतान ने कहा, विभिन्न आदेश के जरिए यह स्थापित हो चुका है कि प्रियंवदा बिड़ला के एस्टेट का एमपी बिड़ला समूह की इकाइयों पर नियंत्रण है।
उन्होंने कहा कि खंडपीठ ने यह कहकर गुंजाइश बढ़ा दी है कि लोढ़ा को एपीएल समिति के फैसले मानने होंगे। हालांकि लोढ़ा के पक्ष ने कहा कि गुरुवार को पारित अंतरिम आदेश हर्ष वर्धन लोढ़ा पर एमपी बिड़ला समूह की इकाइयों में पद संभालने पर पाबंदी के मामले पर एकल पीठ के आदेश काफी हद तक नरम बनाता है।
उन्होंने कहा कि इस आदेश ने एकल पीठ के उस आदेश को यह कहते हुए संशोधित कर दिया कि लोढ़ा प्रियंवदा बिड़ला एस्टेट के शेयरों के दम पर समूह की इकाइयों में पद नहीं संभाल सकते। उन्होंने कहा, इस चीज ने लोढ़ा को एम पी बिड़ला समूह में पद पर बने रहने का रास्ता साफ कर दिया है।
लोढ़ा का प्रतिनिधित्व करने वाले फॉक्स ऐंड मंडल के पार्टनर देबांजन मंडल ने कहा, पिछले दो साल में लोढ़ा को चार सूचीबद्ध कंपनियों में 98 फीसदी मतदान के साथ निदेशक के तौर पर दोबारा नियुक्त किया गया है। उन्होंने कहा, मेरे क्लाइंट को इन कंपनियों में प्रियंवदा बिड़ला एस्टेट के दम पर दोबारा निदेशक नियुक्त किया गया था। ऐसे में यह आदेश इन कंपनियों में उनके पद पर बने रहने का रास्ता साफ करता है क्योंंकि वह श्रीमती बिड़ला के देहांत से पहले से ही अबाध रूप से ऐसा करते रहे हैं।
इस समूह के साथ लोढ़ा निदेशक के तौर पर साल 1996 से जुड़े हुए हैं यानी पूरे 24 साल हो गए हैं। एक बयान में बिड़ला पक्ष ने कहा कि कलकत्ता उच्च न्यायालय के खंडपीठ की अध्यक्षता आज मुख्य न्यायाधीश ने की और उन्होंंने एमपी बिड़ला समूह की इकाइयों में सभी पदों से हर्ष वर्धन लोढ़ा को हटाने के मामले में स्थगन आदेश देने से इनकार कर दिया।