उड़ीसा में बैंकों से मौजूदा वित्त वर्ष के लिए सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) के लिए तय किए गए ऋण लक्ष्य को पूरा करने का आह्वान किया गया है।
बैंकों से क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी स्कीम (सीएलसीएसएस) के तहत एमएसएमई के वित्तीय उन्नयन के लिए उधारी बढ़ाने हेतु अपने शाखा प्रबंधकों को संवेदनशील बनाए जाने का अनुरोध किया गया है। बैंकों से लघु उद्योगों के लिए लंबित ऋण प्रस्तावों को निपटाने का भी अनुरोध किया गया है।
खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड (केवीआईबी) से भी प्रधानमंत्री रोजगार गारंटी कार्यक्रम (पीएमईजीपी) में सहकारी बैंकों के लिए तय किए गए कम लक्ष्य को ध्यान में रख कर विभिन्न बैंकों के लक्ष्यों पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया गया है।
यह फैसला यहां आयोजित 116वीं स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) बैठक में लिया गया था। राज्य में एमएसएमई को दी जाने वाली उधारी सितंबर, 2008 के अंत तक बैंकों द्वारा दी जाने वाली कुल उधारी का 11.8 फीसदी थी।
एसएलबीसी बैठक में प्रमुख भाषण देते हुए वित्त मंत्री प्रफुल्ल चंद्र घड़ई ने बैंकों से आह्वान किया कि वे उचित ब्याज दर पर ऋण को माइक्रो-फाइनैंस इंस्टीटयूशंस (एमएफआई) तक बढ़ाएं।
राज्य में एमएसएमई के लिए ऋण प्रवाह बढ़ाए जाने पर बल देते हुए घड़ई ने कहा कि रोजगार सृजन के मामले में मेगा परियोजनाएं उतनी सफल नहीं हो सकतीं जितनी सफल एमएसएमई परियोजनाएं हो सकती हैं।
इसलिए उड़ीसा में प्रत्येक बैंक की शहरी और अर्द्ध-शहरी शाखा को हर साल 5 एमएसएमई इकाइयों को ऋण मुहैया कराने का लक्ष्य तय करना चाहिए।
राज्य में ऋण जमा अनुपात में गिरावट पर चिंता जताते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि कुछ बैंकों का ऋण जमा अनुपात राष्ट्रीय औसत की तुलना में काफी कम है। सितंबर, 2008 तक ऋण जमा अनुपात घट कर 69.12 फीसदी रह गया था जो एक साल पहले 77.91 फीसदी था।
इन बैंकों में इलाहाबाद, बैंक, केनरा बैंक, आईडीबीआई बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, फेडरल बैंक, ऐक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, इंडसलैंड बैंक जैसे बैंक शामिल हैं।
हालांकि इस मुद्दे पर एसएलबीसी बैठक में चर्चा की जा चुकी है, लेकिन इसमें कोई सुधार नहीं आया है। यूको बैंक के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक और एसएलबीसी के चेयरमैन एस के गोयल ने कहा कि उड़ीसा में खनिज क्षेत्र के अलावा भी उधारी के लिए पर्याप्त अवसर हैं।
लघु एवं मझोले उद्यम (एसएमई) क्षेत्र राज्य में दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता क्षेत्र है। इस क्षेत्र को उधारी बढ़ाए जाने की सख्त जरूरत है। उन्होंने बैंकों को सुझाव दिया कि वे एसएमई के लिए पर्याप्त मात्रा में और सही समय पर ऋण उपलब्ध कराएं।
भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक काजा सुधाकर ने कहा कि राज्य के कई बड़े इलाके अभी भी बैंकों की पहुंच से दूर बने हुए हैं। शहरी इलाकों में शाखाएं खोले जाने के साथ-साथ राज्य में बैंक-रहित इलाकों में भी शाखाओं की स्थापना के लिए प्रयास किया जाना चाहिए।
एसएमई ऋण के बारे में सुधाकर ने कहा कि 55 फीसदी से अधिक एसएमई ऋण स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) द्वारा मंजूर किए गए हैं। लेकिन इस मामले में अन्य बैंकों का प्रदर्शन काफी खराब रहा है। बैंकों को राज्य में मौद्रिक स्थिति में सुधार लाना चाहिए, क्योंकि उड़ीसा में मुद्रा की स्थिति बेहद कमजोर है।