भारत में लिबर्टी स्टील गु्रप की परियोजनाओं (आधुनिक मेटालिक्स -एएमएल समेत) के विस्तार में विलंब हो सकता है, क्योंकि बैंकरों का कहना है कि संजीव गुप्ता के स्वामित्व वाले इस व्यावसायिक घराने को फिर से वित्तीय दबाव से जूझना पड़ रहा है।
लिबर्टी स्टील गु्रप ने पिछले साल मार्च में आधुनिक मेटालिक्स का 500 करोड़ रुपये में अधिग्रहण किया था, और वह ओडिशा में अपनी इसकी क्षमता दोगुनी कर 10 लाख टन करने की योजना बना रहा था। समूह ने जिऑन स्टील्स लिमिटेड का भी अधिग्रहण किया है जो आधुनिक मेटालिक्स के लिए टीएमटी बार्स का उत्पादन करती है।
एएमएल संजीव गुप्ता के स्वामित्व वाले गुप्ता फैमिली गु्रप (जीएफजी) अलायंस द्वारा भारतीय दिवालिया प्रक्रिया के अधीन पहला बड़े आकार का निवेश था। कंपनी ने शुरू में एमटेक ऑटो जैसी अन्य कंपनियां खरीदने की भी कोशिश की थी, लेकिन वह इन कंपनियों में लंबित कानूनी विवादों की वजह से सौदे पूरा करने में विफल रही।
मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि जीएफजी अलायंस की सबसे बड़ी ऋणदाता ग्रीनसिल कैपिटल के पतन से फंडिंग का स्रोत पूरी तरह प्रभावित हो गया और इससे समूह की परियोजनाओं के विस्तार की राह प्रभावित हुई है।
भारत में अब तक लिबर्टी की रणनीति चार मुख्य ट्रेंड पर केंद्रित रही जिनमें इस्पात और एल्युमीनियम के लिए बढ़ती मांग, इन क्षेत्रों के डीकार्बोनाइज की तत्काल जरूरत, विकसित देशों में पारंपरिक निर्माण उद्योगों में कमी और बदलती दुनिया में वैश्विक प्रतिस्पर्धी बनने की जरूरत मुख्य रूप से शामिल हैं।
समूह के अधिकारियों का कहना है कि इस्पात कीमतें बढ़ रही हैं और समूह पिछले साल के मुकाबले बेहतर वित्तीय स्थिति में है। अधिकारियों का यह भी कहना है कि कंपनी की भारतीय परियोजनाएं समय के साथ आगे बढ़ रही हैं और भविष्य में यहां उनमें कोई समस्या पैदा होने की आशंका नहीं दिख रही है।
संडे टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, गुप्ता पर करीब 5.53 अरब डॉलर का कर्ज है जिसमें महज 4.15 अरब डॉलर ग्रीनसिल से संबंधित है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ग्रीनसिल अब दिवालिया होने के कगार पर है और जीएफजी को कर्ज चुकाने के लिए परिसंपत्तियां बेचनी होंगी।
कौन है संजीव गुप्ता?
जीएफजी अलायंस के 49 वर्षीय कार्यकारी चेयरमैन संजीव गप्ता का जन्म पंजाब के एक उद्योगपति परिवार में हुआ था और उनकी पढ़ाई ब्रिटेन में हुई थी। गुप्ता ने 1992 में लिबर्टी हाउस गु्रप की स्थापना की और अब यह समूह 30 देशों में 35,000 लोगों को रोजगार प्रदान करता है। मुख्य रूप से कर्ज की मदद से गुप्ता ने यूरोप में इस्पात कंपनियां शुरू कीं और 2019 में 50 लाख टन इस्पात क्षमता का उत्पादन किया। जीएफजी कार निर्माताओं, पैकेजिंग निर्माताओं, और एयरोस्पेस उद्योग के लिए भी हर साल 300,000 टन से ज्यादा की एल्युमीनियम निर्माण की क्षमता से संपन्न है।
गुप्ता ने टिसेनक्रुप के यूरोपीय परिचालन को खरीदने की भी कोशिश की थी, लेकिन प्रमुख शेयरधारकों द्वारा कोष उगाही के लिए क्षमता पर उठाए गए सवालों के बाद पिछले महीने ये वार्ताएं विफल साबित हो गईं।