facebookmetapixel
Advertisement
भारतीय बाजारों में आज बिकवाली से ₹1 लाख करोड़ डूबे! सेंसेक्स 500 अंकों से ज्यादा टूटा, कौनसे फैक्टर्स बना रहे दबाव?यूजर्स के लिए UPI ट्रांजैक्शन मुफ्त, फिर कैसे चलता है सिस्टम? ‘जीरो फीस’ मॉडल का पूरा गणितमल्टीबैगर स्टॉक फिर करेगा धमाका! नतीजों के बाद अशोक लेलैंड पर 40% अपसाइड का टारगेट; ब्रोकरेजेज ने क्यों जताया भरोसा?FMCG कंपनियों ने सिर्फ 30% लागत ग्राहकों पर डाली, आगे और महंगे हो सकते हैं रोजमर्रा के सामानमोलबायो डायग्नोस्टिक्स IPO की धमाकेदार लिस्टिंग! ₹807 वाला शेयर ₹980 पर खुला, निवेशकों को मिला 21% का फायदाधूत ट्रांसमिशन IPO की 38% प्रीमियम पर लिस्टिंग, हर लॉट पर ₹5600 का मुनाफा, Hold करें या बेच दें?होराइजन इंडस्ट्रियल पार्क्स आईपीओ आज से खुला, ₹2600 जुटाने का प्लान, निवेश करें या छोड़ दें?फेड से राहत की उम्मीद ने बढ़ाई सोने-चांदी की चमक, MCX पर दोनों के भाव चढ़ेसरकारी बैंकों के लिए सुधारों का नया खाका, ‘विकसित भारत’ के बैंकिंग रोडमैप पर होगा मंथनL&T का बड़ा डिफेंस प्लान! रडार से लेजर हथियार तक बढ़ाएगी ताकत, इलेक्ट्रॉनिक्स में ₹5,000 करोड़ निवेश की तैयारी

मंदी के बावजूद मार्च में एक करोड़ नए जीएसएम ग्राहक

Advertisement
Last Updated- December 11, 2022 | 12:20 AM IST

मंदी के बावजूद दूरसंचार कंपनियों के विकास की दास्तान लगातार जारी है।
सभी जीएसएम कंपनियों (रिलायंस कम्युनिकेशंस की ग्राहक संख्या छोड़कर) ने मार्च महीने में 1 करोड़ ग्राहकों को जोड़ने में सफलता पाई है। यह पहला मौका है, जब किसी महीने ग्राहकों की संख्या इतनी बढ़ी हो।
सेल्युलर ऑपरेटर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक इस साल जीएसएम कंपनियों ने मार्च महीने में 1 करोड़ 8 लाख 40 हजार ग्राहक जोड़े हैं। इस तरह मार्च तक कुल जीएसएम ग्राहकों की संख्या 28 करोड़ 83 लाख हो गई है।
लेकिन रिलायंस कम्युनिकेशंस की बात की जाए, तो इसने फरवरी के महीने में लगभग 25 से 27 लाख ग्राहक जोड़े हैं। सूत्रों की मानें तो जीएसएम कंपनियों ने संयुक्त रूप से 1 करोड़ 50 लाख ग्राहक का जादुई आंकड़ा छू लिया है। इस आधार पर जीएसएम ग्राहकों की संख्या 1 करोड़ 35 लाख 40 हजार हो गई है।
इस लिहाज से भारत में जीएसएम ग्राहकों की संख्या में मासिक वृद्धि  चीन से दुगनी है। चीन हर महीने 60 लाख जीएसएम ग्राहक ही जोड़ पाती है। अगर कुल जीएसएम ग्राहकों की बात की जाए, तो चीन 60 करोड़ के आंकड़े के साथ भारत से काफी आगे है।

Advertisement
First Published - April 14, 2009 | 3:13 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement