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अधिग्रहण सौदों में आईटी का हिस्सा दोगुना

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Last Updated- December 10, 2022 | 1:02 AM IST

कैंलेंडर वर्ष 2008 के दौरान जिन कंपनियों का विलय और अधिग्रहण हुआ, उनमें आईटी कंपनियों की हिस्सेदारी पिछले साल की तुलना में बढ़कर लगभग दोगुनी हो गई।
2007 में विलय और अधिग्रहण सौदों में आईटी कंपनियों की हिस्सेदारी जहां 6 फीसदी थी, वहीं 2008 में यह बढ़कर 11 फीसदी हो गई। 2008 के बड़े सौदों में एचसीएल-एक्सॉन, टीसीएस-सीजीएसएल और वाईएनएस-अवीवा प्रमुख हैं।
बीएमआर एडवाइजर्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2008 में कुल 3.4 अरब डॉलर (करीब 16,300 करोड़ रुपये) का सौदा हुआ। मालूम हो कि 2007 में 2.9 अरब डॉलर (14,000 करोड़ रुपये) का विलय-अधिग्रहण हुआ था।
बहरहाल विलय और अधिग्रहण की यह प्रक्रिया वर्ष 2009 में भी जारी रहने की उम्मीद है। जानकारों के अनुसार, इस क्षेत्र के इस साल तरक्की करने की पूरी उम्मीद है। मजेदार बात यह कि विलय और अधिग्रहण के सौदों में कमी हुई है लेकिन मूल्य के लिहाज से करार में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, विलय और अधिग्रहण के मौजूदा सौदे काफी सोच-समझकर किए जा रहे हैं। ये चुनिंदा, रणनीतिक और ज्यादा महत्वपूर्ण सौदे हैं।

इसमें बताया गया कि 2007 की तुलना में 2008 में विलय और अधिग्रहण के बाहरी सौदों का प्रतिशत मूल्य के लिहाज से 81 फीसदी से घटकर 67 फीसदी रह गया। वहीं घरेलू सौदों की हिस्सेदारी 13 की बजाय 23 फीसदी रह गई है।
2009 के बारे में अनुमान है कि आईटी कंपनियों के विलय और अधिग्रहण से इसका नए इलाके में विस्तार होगा और नए ग्राहकों तक पहुंच बढ़ेगी। इन दोनों वजहो से इसकी प्रक्रिया तेज होगी।
विश्लेषकों की राय में, रणनीतिक गठजोड़ और आंशिक अधिग्रहण के जरिए आईटी कंपनियों के लिए मुनाफा कमाने की चाह से विलय और अधिग्रहण की प्रक्रिया को बढ़ावा मिल रहा है। एक बात और कि कई छोटी कंपनियों की वित्तीय हालत इस वक्त बढ़िया नहीं है।
बीपीओ की बात करें तो इसमें ध्यान धन और प्रशासन पर बना रहेगा। खरीद आउटसोर्सिंग (पीओ) में इस साल तेजी आने का अनुमान है। इस सालर् कई अच्छी परियोजना शुरू होने का भी अनुमान है।

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First Published - February 13, 2009 | 11:51 PM IST

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