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डिजिटल माध्यम पर बीमाकर्ताओं की बनी रहेगी निर्भरता

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Last Updated- December 15, 2022 | 9:17 AM IST

कोविड-19 महामारी और उसके बाद लगाए लॉकडाउन में भारतीय बीमाकर्ताओं ने बीमाओं की बिक्री और ग्राहकों को सेवा देने की प्रक्रिया को डिजिटल करने पर जोर दिया जिसका इन्हें लंबे वक्त से इंतजार था। लॉकडाउन के कारण बीमाकर्ताओं के लिए वितरण के परंपरागत माध्यम बाधित हो गए थे, ऐसे में इन्होंने ग्राहकों को जोडऩे, उन्हें अपने साथ बनाए रखने और उनकी सेवा करने के लिए पहले से अधिक डिजिटल उपाय शुरू कर दिए। 
बीमाकर्ताओं ने वितरण के सभी माध्यमों के जरिये हाथ से कागजी प्रक्रिया के स्थान पर एंड-टू-एंड कागजरहित या डिजिटल आधारित बिक्री प्रक्रिया को अपना लिया।
बीमाकर्ताओं के वितरण माध्यमों में एजेंसी के बल, बैंक आश्वासन साझेदार, ऑनलाइन चैनल और ब्रोकर शामिल हैं। एजेंसी और बैंक आश्वासन कारोबार का सबसे बड़ा हिस्सा बीमाकर्ताओं को दिलाते हैं जबकि ऑनलाइन माध्यम देर से रफ्तार पकड़ रही हैं। महामारी को देखते हुए अधिक संख्या में उपभोक्ता बीमाकर्ताओं की वेबसाइट पर आ रहे हैं और साथ ही वेब एग्रीगेटरों से बढ़ चढ़कर बीमा खरीद रहे हैं। ऑनलाइन माध्यम की ओर अधिक आकर्षण नजर आने के बावजूद बीमाकर्ताओं के समग्र कारोबार में इसकी हिस्सेदारी 10 फीसदी के करीब ही है।   
अधिकांश कंपनियों ने लॉकडाउन से पहले अपने डिजिटल परिसंपत्ति में निवेश किया था और इनमें से अधिकांश को इसका फायदा मिल रहा है। हालांकि, बीमाकर्ता इस बात से भी अवगत हैं कि इतनी तेजी से सभी बीमाधारक ऐसे डिजिटल माध्यम को अपनाने में सक्षम नहीं होंगे। अत: वे ऐसे उपभोक्ताओं को एजेंट की सहायता मुहैया कराने के लिए तैयार हैं।   
धीरे धीरे लॉकडाउन को समाप्त किया जा रहा है लेकिन बीमाकर्ताओं का कहना है कि वे डिजिटल माध्यम से बीमा की बिक्री को जारी रखेंगे और बिक्री के लिए उपयोग में लाए जा रहे पहले के तरीकों की ओर पूरी तरह से नहीं लौटेंगे। बीमाकर्ता ज्यादातर अपने ऑनलाइन ग्राहकों से ही डिजिटल तरीके से जुड़ते थे, लेकिन अब वे इसके जरिये अपने ऑफलाइन ग्राहकों से भी जुड़ रहे हैं ताकि एजेंटों के पास जाने को लेकर निर्भरता को कम किया जा सके और ग्राहकों को आसानी से बात समझाई जा सके।

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First Published - June 22, 2020 | 12:31 AM IST

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