तेल की कीमतों में अस्थिरता के कारण कच्चे माल की लागत बढ़ जाने से बाहर खाना महंगा हो जाने की संभावना है और रेस्तरां लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल सकते हैं। हालांकि अभी वे अपने रसोईघरों को चालू रखने के लिए जरूरी वाणिज्यिक एलपीजी सिलिंडरों की कमी की तत्काल चुनौती से निपट रहे हैं। उद्योग के अधिकारियों ने कहा कि कई रेस्तरां अगले महीने तक कीमतों में 20 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि की तैयारी कर रहे हैं, जो कि जून-जुलाई में होने वाली मूल्य वृद्धि के सामान्य दौर से पहले ही हो जाएगी।
वाउ! मोमो के सह-संस्थापक और मुख्य कार्य अधिकारी सागर दरयानी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘आम तौर पर रेस्तरां जुलाई के आसपास कीमतों में संशोधन करते हैं, लेकिन मौजूदा संकट की वजह से हम अप्रैल की शुरुआत में ही ये बढ़ोतरी कर सकते हैं।’
देश का आतिथ्य-सत्कार उद्योग वाणिज्यिक एलपीजी का बड़ा उपभोक्ता है। पश्चिम एशिया में संकट के कारण वैश्विक ईंधन लागत में वृद्धि हो गई है। इसके बाद इस महीने की शुरुआत में ही वाणिज्यिक एलपीजी सिलिंडरों की कीमतों में 115 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई थी। इससे दिल्ली जैसे स्थानों पर दाम 1,883 रुपये प्रति सिलिंडर तक पहुंच गए। इस बात की संभावना नहीं है कि कच्चे माल की बढ़ती लागत का पूरा बोझ उद्योग उठा लेगा और इसलिए इसे उपभोक्ताओं पर डाल दिया जाएगा।
एक रेस्तरां मालिक ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर कहा, ‘इस वृद्धि के बावजूद सिलिंडरों की लागत 30 प्रतिशत तक और बढ़ने के आसार हैं। कच्चे माल की कीमतें भी बढ़ेंगी। हम इन कीमतों को वहन करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अपने सामने काम बंद होने के हालात को देखते हुए हमें लागत का बोझ ग्राहकों पर डालना पड़ सकता है।’
एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने भी कहा, ‘लागत निश्चित रूप से बढ़ने वाली है। हमें देखना होगा कि हम कितनी लागत उठा सकते हैं।’ बाजार के जानकारों ने कहा कि रेस्तरां बड़ी चोट के लिए तैयारी कर रहे हैं, क्योंकि पैकेजिंग सामग्री की लागत भी बढ़ने के आसार हैं।