सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में वैश्विक जगह बनाने के लिए भारत को अपनी गति बढ़ाने की जरूरत है। नीति आयोग की एक रिपोर्ट के मुताबिक भागीदारी की जगह नेतृत्व और मकसद तय करके 2035 तक भारत को 120 से 150 अरब डॉलर की सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला बनाने का लक्ष्य रखना चाहिए।
‘भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग का भविष्य’ नामक रिपोर्ट में इस क्षेत्र की 10 साल की रूपरेखा बनाई गई है, जिससे भारत अपनी राह खुद बना सकेगा। यह एक ऐसा मार्ग होगा, जो न सिर्फ विशिष्ट होगा, बल्कि वेफर की वैश्विक दौड़ का पीछा करने के बजाय रणनीतिक आत्मनिर्भरता, पारिस्थितिकी तंत्र की ताकत और वैश्विक अनिवार्यता के मुताबिक आकार लेगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के लिए यह महत्त्वपूर्ण है कि इस सेग्मेंट में अग्रणी बने, न कि सेमीकंडक्टर का खरीदार बनकर रह जाए। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘सेमीकंडक्टरों के आयात पर भारत की बहुत ज्यादा निर्भरता की वजह से विदेशी मुद्रा बाहर जा रही है।
उदाहरण के लिए भारत ने वित्त वर्ष 2017 से 2025 के दौरान महत्त्वपूर्ण सेमीकंडक्टर उत्पादों के आयात पर कुल मिलाकर लगभग 150 अरब डॉलर खर्च किए। वित्त वर्ष 2017 से 2025 के बीच भारत के सेमीकंडक्टर उत्पादों के आयात में 23 प्रतिशत की सालाना चक्रवृद्धि वृद्धि दर (सीएडीआर) से वृद्धि हुई है। अगर यह गति बनी रहती है, तो 2035 तक वार्षिक आयात लागत 240 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है।’
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी सेमीकंडक्टर का माहौल बनाने के लिए अगले दशक में डिजाइन, निर्माण, उन्नत पैकेजिंग, सामग्री और सहायक बुनियादी ढांचे में लगभग 135 से 180 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत होगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, ‘भारत सरकार को परियोजनाओं के जोखिम को कम करने और दीर्घकालिक निवेशकों का भरोसा बहाल करने के लिए आवश्यक निवेश का कम से कम एक तिहाई निवेश करने की प्रतिबद्धता की जरूरत है।’
रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार की प्रतिबद्धता से बड़े पैमाने पर निजी पूंजी आकर्षित हो सकती है। लिहाजा इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए रिपोर्ट में अग्रणी होने, नीति और निवेश, उत्पादन, लोग और साझेदारी जैसे 5 स्तंभ वाले दृष्टिकोण की रूपरेखा बनाई गई है।