E-Commerce Export Rules: भारत में बने सामानों को विदेशों तक ऑनलाइन पहुंचाने वाली कंपनियों के लिए राहत की खबर है। भारत सरकार ने ई-कामर्स निर्यात के नियमों में बदलाव किया है। वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इसके तहत अब भारत में बने सामान के निर्यात के लिए ई-कॉमर्स के इन्वेंट्री-बेस्ड मॉडल में काम करने की अनुमति दी गई है। यह अनुमति सिर्फ निर्यात करने वाले उत्पादों के लिए दी गई है।
वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नियमों में बदलाव को अधिसूचित किया है। इसके तहत ई-कॉमर्स कंपनियों को भारत में निर्मित या उत्पादित वस्तुओं का भंडार केवल निर्यात के उद्देश्य से रखने की अनुमति होगी।
नियमों के अनुसार, विदेशी निवेश वाली ई-कॉमर्स कंपनियां भारत में बना माल अपने पास रखकर उसका निर्यात कर सकती हैं, लेकिन इसी तरह माल अपने पास रखकर भारत में खुदरा बिक्री करने की अनुमति नहीं है।
विभाग ने दो सितंबर को जारी अधिसूचना के जरिये विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गैर-ऋण साधन) नियम, 2019 में इस संबंध में नया प्रावधान जोड़ा है। नए प्रावधान के मुताबिक, ई-कॉमर्स इकाई विदेशी व्यापार नीति, 2023, प्रक्रिया पुस्तिका और विदेशी मुद्रा प्रबंधन (माल एवं सेवाओं का निर्यात) विनियम, 2015 के प्रावधानों के अनुरूप केवल भारत में निर्मित या उत्पादित वस्तुओं के निर्यात के लिए माल-सूची आधारित ई-कॉमर्स मॉडल अपना सकती है। इसके साथ ही जुलाई में घोषित यह निर्णय अब प्रभावी हो गया है।
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नए नियम में ये भी साफ किया गया है कि पहले दिए गए प्रावधानों के तहत आने वाली कुछ पाबंदियां ऐसे निर्यात पर लागू नहीं होंगी, जो नए नियम में ई-कॉमर्स के जरिए किया जा रहा है। इसमें B2C निर्यात और इन्वेंट्री-बेस्ड ई-कॉमर्स मॉडल शामिल हैं। यानि कंपनियां भारत में बने सामान को सीधे विदेशी कस्टमर्स तक पहुंचाने के लिए इस मॉडल का इस्तेमाल करने का रास्ता आसान होगा।
नए प्रावधान में कोई कोई ई-कॉमर्स युनिट भारत में बने या भारत में तैयार किए गए सामान को विदेश भेजने के लिए इन्वेंट्री-बेस्ड ई-कॉमर्स मॉडल अपना सकती है। इस बदलाव की सबसे जरूरी शर्त ये है कि एक्सपोर्ट किए जाने वाले माल या मैन्युफैक्चर भारत के होने चाहिए । यानी नए प्रावधान का फायदा भारत में बने प्रोडक्ट्स के ग्लोबल ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट को बढ़ाने के लिए मिलेगा।