बाजार अनुसंधान फर्म फार्मारैक के अनुसार, भारतीय दवा बाजार (आईपीएम) में इस साल फरवरी में 11 फीसदी की वृद्धि हुई, जहां प्रमुख थेरेपी की कीमत में सकारात्मक वृद्धि देखी गई।
इनमें से मधुमेह-रोधी, हृदय-रोधी और संक्रमण-रोधी उपचारों में क्रमशः 15.5 फीसदी, 14.8 फीसदी और 7.6 फीसदी की उच्च मूल्य वृद्धि देखी गई, जिसने समग्र आईपीएम वृद्धि को गति प्रदान की। फार्मारैक की उपाध्यक्ष (वाणिज्यिक) शीतल सपले ने कहा, प्रमुख उपचारों में तीनों विकास कारकों नए उत्पादों की शुरुआत, कीमत और वॉल्यूम में सकारात्मक वृद्धि देखी गई। उन्होंने कहा कि बाजार में उच्च मांग के कारण वृद्धि देखी जा रही है और आईपीएम ने पिछले दो से तीन महीनों में अच्छी वॉल्यूम वृद्धि दर्ज की है। मार्च 2025 से फरवरी 2026 के बीच आईपीएम के मूविंग एनुअल टर्नओवर (एमएटी, पिछले 12 महीनों का टर्नओवर) में 8.4 फीसदी की वृद्धि हुई, जिसके परिणामस्वरूप कुल टर्नओवर 2.44 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया जबकि घरेलू बाजार में यूनिट्स में 0.7 फीसदी का इजाफा हुआ।
अमेरिकी दवा निर्माता कंपनी एलाई लिली की मोटापा-रोधी दवा मोन्जारो (तिरजेपाटाइड) लगातार पांचवें महीने भारत में सबसे अधिक बिकने वाली दवा बनकर उभरी है। फरवरी 2026 में इसकी बिक्री 117 करोड़ रुपये रही।
फार्मारैक के आंकड़ों के अनुसार, लॉन्च होने के बाद से ग्यारह महीनों में इस वजन घटाने वाली दवा ने कुल 830 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है। मोटापा-रोधी उपचार शुरू करने के इच्छुक नए रोगियों के बीच यह दवा काफी लोकप्रिय हो रही है। इसके बाद जीएसके की एंटीबायोटिक दवा ऑगमेंटिन और सिप्ला की अस्थमा के इलाज की दवा फोराकोर्ट का स्थान रहा, जिनकी मासिक बिक्री क्रमशः 85 करोड़ रुपये और 77 करोड़ रुपये रही।