एचसीएलटेक का शुद्ध लाभ वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में 4.2 प्रतिशत बढ़कर 4,488 करोड़ रुपये हो गया, जबकि राजस्व सालाना आधार पर 12.3 प्रतिशत बढ़कर 33,981 करोड़ रुपये हो गया। तिमाही आधार पर पीएटी (कर के बाद लाभ) 10 प्रतिशत बढ़ा, जबकि राजस्व में 0.3 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी हुई। तिमाही के दौरान कंपनी का प्रदर्शन लाभ के मामले में उम्मीद से बेहतर रहा, जबकि राजस्व ब्लूमबर्ग के अनुमानों से कम रहा। ब्लूमबर्ग ने 4,647 करोड़ रुपये के लाभ और 34,024 करोड़ रुपये के राजस्व का अनुमान लगाया था।
इस प्रदर्शन के पीछे एआई-आधारित सेवा कारोबार की अहम भूमिका रही है। कंपनी ने मंगलवार को जारी जनवरी-मार्च 2026 तिमाही के वित्तीय नतीजों में यह जानकारी दी। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 4,307 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया था। तिमाही आधार पर कंपनी के शुद्ध लाभ में 10.10 प्रतिशत और राजस्व में 0.32 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। समूचे वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का शुद्ध लाभ 4.30 प्रतिशत घटकर 16,642 करोड़ रुपये रहा, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 17,390 करोड़ रुपये था। हालांकि, इसका वार्षिक राजस्व 11.18 प्रतिशत बढ़कर 1,30,144 करोड़ रुपये हो गया।
एचसीएलटेक के मुख्य कार्य अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक सी विजयकुमार ने कहा कि कुछ कारोबार क्षेत्रों में सुस्ती, विवेकाधीन खर्च में कमी और निर्णय लेने में देरी के कारण तिमाही प्रदर्शन उम्मीद से कम रहा। विजयकुमार ने कहा, ‘हालांकि हमारी एआई-आधारित सेवाओं को अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है और वार्षिक आधार पर उन्नत एआई राजस्व 62 करोड़ डॉलर से अधिक हो गया है।’ तिमाही के दौरान उन्नत एआई राजस्व 15.5 करोड़ डॉलर रहा। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में एचसीएल टेक की शीर्ष प्राथमिकता एआई क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने की होगी।
पर्सिस्टेंट सिस्टम्स का चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में मुनाफा 33.7 प्रतिशत बढ़कर 529.2 करोड़ रुपये हो गया। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह 395.7 करोड़ रुपये था। तिमाही आधार पर कंपनी का मुनाफा 20.4 प्रतिशत बढ़ा है। इस तिमाही में राजस्व 4,055.9 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 25 प्रतिशत ज्यादा है। तिमाही आधार पर राजस्व में 7.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
पर्सिस्टेंट के मुख्य कार्याधिकारी और कार्यकारी निदेशक संदीप कालरा ने कहा, ‘वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही हमारी वृद्धि वाली लगातार 24वीं तिमाही रही। इससे एआई से बदल रहे बाजार में हमारे काम करने के तरीके में निरंतरता और ग्राहकों की मांग के साथ हमारे तालमेल का पता चलता है। जैसे-जैसे एआई को अपनाने की रफ्तार बढ़ रही है, हमारी ‘एआई-फर्स्ट’ रणनीति हमारे परिचालन मॉडल को मजबूत बना रही है और पूरे बिजनेस में डिलिवरी की गुणवत्ता एवं पैमाने को बेहतर बना रही है।’
कंपनी के निदेशक मंडल ने 18 रुपये प्रति शेयर के लाभांश की सिफारिश की है। इसका मतलब है कि वित्त वर्ष 2026 के लिए यह प्रति शेयर 40 रुपये है, जबकि वित्त वर्ष 2025 के लिए 35 रुपये प्रति शेयर था। लाभांश के लिए आगामी वार्षिक आम बैठक में मंजूरी ली जाएगी।
दैनिक उपभोक्ता वस्तु (एफएमसीजी) क्षेत्र की दिग्गज नेस्ले इंडिया ने वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में 6,747.8 करोड़ रुपये की शुद्ध बिक्री दर्ज की। यह पिछले एक दशक के दौरान किसी तिमाही में उसकी अब तक की सर्वाधिक शुद्ध बिक्री है। दो अंकों की बिक्री वृद्धि की बदौलत यह इजाफा हुआ।
कंपनी का राजस्व पिछले साल इसी अवधि में दर्ज 5,503.9 करोड़ रुपये की तुलना में 22.6 प्रतिशत बढ़ा है। इस बीच किटकैट चॉकलेट और नेस्कैफे कॉफी बनाने वाली कंपनी ने मार्च तिमाही के दौरान अपने शुद्ध लाभ में सालाना आधार पर 27.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की। इस दौरान शुद्ध लाभ पिछले साल की इसी अवधि में दर्ज 873.5 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,110.9 करोड़ रुपये हो गया।
नेस्ले इंडिया के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक मनीष तिवारी ने आय परिणाम की विज्ञप्ति में कहा, ‘यह प्रदर्शन दो अंकों की बिक्री वृद्धि के बल पर आया। इसे विज्ञापन खर्च में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि से बढ़ावा मिला। साथ ही 26.3 प्रतिशत का अच्छा एबिटा मार्जिन भी प्राप्त हुआ।
उत्साहजनक बात यह है कि सभी उत्पाद समूहों ने इस प्रदर्शन में योगदान दिया।’ हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बाहरी माहौल अब भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। उन्होंने कहा, ‘बाजार में पैठ बनाना और प्रीमियम उत्पादों पर जोर देने के साथ ही साथ संसाधनों का सुव्यवस्थित आवंटन और मजबूती से अमल करना – ये सभी विकास को रफ्तार देने में अहम रहे हैं।’
समूचे वर्ष के मामले में कंपनी ने अपने शुद्ध लाभ में 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की और यह पिछले साल की इसी अवधि के 3,314.5 करोड़ रुपये की तुलना में बढ़कर 3,544.6 करोड़ रुपये हो गया। दूसरी ओर शुद्ध बिक्री में 14.6 प्रतिशत का इजाफा हुआ, जो पिछले साल की इसी अवधि के 20,201.5 करोड़ रुपये से बढ़कर 23,154.6 करोड़ रुपये हो गई।
कन्फेक्शनरी समूह ने प्रमुख लेनदेन की जोरदार वृद्धि, अधिक वितरण और नवाचारों की श्रृंखला के कारण मूल्य और मात्रा दोनों में ही दो अंकों में ऊंचे स्तर की रफ्तार से वृद्धि की।