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समूह की फर्मों पर पड़ेगी जीवीके संकट की आंच

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Last Updated- December 15, 2022 | 5:11 AM IST

भुगतान में चूक के मामले के बाद बैंकों द्वारा बिजली परिसंपत्ति की बिक्री के बीच जीवीके समूह को कई समूह कंपनियों के बैंक ऋण चुकाने के लिए संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है। ऋणदाता अब इसे लेकर चिंतित हैं कि ताजजीवीके होटल्स ऐंड रिजॉटर्स लिमिटेड (जीवीके समूह द्वारा 50 फीसदी स्वामित्व) को अपने प्रवर्तक जीवीके पर वित्तीय संकट और कोरोनावायरस महामारी की वजह से वित्त वर्ष 2021 में ऋण भुगतान में समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
रेटिंग फर्म इक्रा द्वारा जून में रेटिंग घटाए जाने से ऋणदाताओं में चिंता बढ़ गई है। रेटिंग एजेंसी ने कहा था कि ऊंचे कर्ज और कमजोर प्राप्तियों को देखते हुए ताजजीवीके की स्थिति वित्त वर्ष 2021 में काफी कमजोर होने की आशंका है। मजबूत भागीदार इंडियन होटल्स द्वारा 25 फीसदी की भागीदारी के बावजूद रेटिंग में यह कमी की गई थी। इंडियन होटल्स भारत में कंपनी के सात होटलों का परिचालन करती है। इनमें से चार होटल हैदराबाद में, और एक-एक होटल मुंबई, चेन्नई और चंडीगढ़ में हैं। कंपनी का कर्ज 31 दिसंबर 2019 तक 170.3 करोड़ रुपये था।
हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र की बाकी कंपनियों और विमानन क्षेत्र की तरह ताज जीवीके भी जून तिमाही में नकदी प्रवाह घटने से प्रभावित हुई है। एक बैंक अधिकारी ने कहा, ‘यह ऋणदाताओं के लिए स्पष्ट रूप से एक झटका है।’ अधिकारी ने कहा, ‘सीबीआई द्वारा शुरू किए गए मामले समूह के बारे में अन्य जोखिम का कारक हैं। हम नवी मुंबई हवाई अड्डा जैसी नई परियोजनाओं को लेकर चिंतित हैं जो तब तक पूरी नहीं होंगी जब तक इन्हें नए निवेशकों से ताजा पूंजी नहीं मिल जाती।’
फिलहाल सुधार में कुछ तिमाहियों का वक्त लग सकता है और इक्रा का मानना है कि कंपनी लागत बचत उपायों के बावजूद वित्त वर्ष 2021 में राजस्व और मार्जिन में भारी गिरावट दर्ज करेगी।
पिछले तीन वर्षों में ऋणदाताओं ने इस समूह से अपना बकाया वसूलने के लिए कई बिक्री की हैं। इनमें डॉयचे बैंक द्वारा 70 फीसदी की छूट पर 3,900 करोड़ रुपये के गोडवाल साहिब विद्युत ऋण की खरीदारी के प्रस्ताव को मंजूरी शामिल है। यह सौदा अभी पूरा नहीं हुआ है और बंबई उच्च न्यायालय में इसके बॉन्डधारकों द्वारा मुकदमेबाजी में फंसा हुआ है। पिछले साल दिसंबर में ऐक्सिस बैंक अपना बकाया वसूलने के लिए जीवीके पावर के खिलाफ एनसीएलटी हैदराबाद में चला गया था। यह मामला अभी भी लंबित है। 2017 में समूह ने बेंगलूरु एयरपोर्ट में अपनी हिस्सेदारी 3,440 करोड़ रुपये में फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स को दो चरणों में बेची थी। इस पैसे का इस्तेमाल बैंक ऋण चुकाने में किया गया था।
2019 में जीवी ने एयरपोर्ट होल्डिंग कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी एडीआईए, एनआईआईएफ और कनाडा के पीएसपी को बेची, लेकिन मुंबई एयरपोर्ट में उसकी इक्विटी भागीदार बिडवेस्ट द्वारा शुरू की गई कानूनी लड़ाई की वजह से यह सौदा अभी पूरा नहीं हुआ है। बिडवेस्ट अपना हिस्सा बेचकर भारत से बाहर निकलना चाहती है। एडीआईए, एनआईआईएफ और पीएसपी सौदे भी अभी पूरे नहीं हुए हैं।

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First Published - July 7, 2020 | 12:02 AM IST

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