facebookmetapixel
Advertisement
Tata Capital ने गोल्ड लोन कारोबार में रखा कदम, ₹318 करोड़ में Yogloans की 88.6% हिस्सेदारी खरीदेगीSEBI ने अपने ही कर्मचारियों पर बढ़ाई सख्ती, बदला सर्विस नियम और निवेश पर लगाया कठोर पाबंदIPO मार्केट में हुई रिकॉर्ड तोड़ कमाई, SEBI के साथ मर्चेंट बैंकरों की संख्या पहुंची 240 के पारशेयर बाजार में छोटे शेयरों का धमाका, मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स अपने सर्वकालिक उच्चस्तर पर पहुंचेबिना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर के भी रीसेट हो जाएगा इनकम टैक्स पोर्टल का पासवर्ड, CBDT ने बताए ये आसान तरीकेStock Market: कच्चे तेल की महंगाई के बीच IT शेयर बने बाजार के हीरोJio IPO से पहले बड़ा बदलाव! किरण थॉमस की जगह पंकज पवार बने CEO, जानिए क्या है पूरा मामलामहाराष्ट्र के शहराें की बदलेगी सूरत, सरकार ने की ₹90,000 करोड़ अर्बन चैलेंज फंड की घोषणा‘होर्मुज पर कब्जा करेगा अमेरिका, गुजरने के लिए अमीर देशों से वसूलेगा मोटी रकम’, ट्रंप ने किया ऐलानमॉनसून की रफ्तार से सुधरी बोआई, खरीफ रकबा 21% से घटकर 16% पर आया

ग्लेनमार्क, सिप्ला को कोविड दवा से दम

Advertisement
Last Updated- December 15, 2022 | 9:16 AM IST

भारत में कोविड-19 संक्रमण के हल्के लक्षण वाले रोगियों के उपचार के लिए खाने वाली दवा फेविपिराविर को लॉन्च करने की घोषणा के बाद ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल के प्रति निवेशकों की धारणा काफी बेहतर हुई है। सोमवार को कंपनी का शेयर दिन भर के कारोबार के दौरान 40 फीसदी बढ़त के साथ 572.70 रुपये की सर्वाधिक ऊंचाई को छूने के बाद करीब 520 रुपये पर बंद हुआ।
सिप्ला का शेयर भी दिन भर के कारोबार के दौरान 9 फीसदी की बढ़त के साथ 52 सप्ताह की ऊंचाई को छूने के बाद 3.12 बढ़त के साथ बंद हुआ। कंपनी ने कोविड-19 से संक्रमित रोगियों के उपचार के लिए एंटीवायरल दवा रेमडेसिविर के लिए नियामकीय मंजूरी मांगी थी और अब मंजूरी मिलने के बाद वह जल्द ही आपूर्ति शुरू कर सकती है।
ग्लेनमार्क द्वारा इस दवा को बाजार में उतारे के लिए अच्छी संभावनाएं दिख रही हैं। हालांकि कंपनी के शेयर की प्रतिक्रिया थोड़ी आश्चर्यचकित करने वाली है क्योंकि कंपनी ने अन्य कंपनियों के मुकाबले इस दवा को बाजार में पहले उतार रही है। इससे कंपनी को बाजार में पहले आने का फायदा मिलेगा। अन्य कंपनियां भी बाजार में इसी तरह की दवाएं उतारने की तैयारी में हैं जिससे कोविड-19 के उपचार वाली दवाओं के बीच प्रतिस्पर्धा बढऩे के आसार हैं।
कंपनी ने इस दवा के लिए क्लीनिकल अध्ययन पूरा कर लिया है और भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) की मंजूरी के साथ ही इसे सुरक्षित भी माना गया है। उद्योग के एक सूत्र ने कहा, ‘इसके आधार पर अब अन्य कंपनियां अब अपनी दवाओं के लिए स्थायित्व एवं अन्य आवश्यक आंकड़े सौंपते हुए उत्पाद लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकती हैं। क्लीनिकल परीक्षण से पता चलता है कि यह दवा कोविड-19 के हल्के लक्षण वाले रोगियों के उपचार के लिए प्रभावी है।’ उन्होंने यह भी कहा कि कुछ ही महीनों में 50 से अधिक कंपनियां इस दवा को बाजार में उतारेंगी।
विश्लेषकों का कहना है कि कुल मिलाकर भारत में कोविड-19 के उपचार क्षेत्र में दवा कंपनियों के लिए करीब 400 करोड़ रुपये का अवसर होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि यदि इसमें अन्य कंपनियों के उत्पादों पर भी गौर किया जाए तो ग्लेनमार्क द्वारा उतारी गई दवा पेटेंटयुक्त न होने के कारण उसे अधिक फायदा नहीं होगा। ग्लेनमार्क ने 103 रुपये प्रति टैबलेट कीमत के साथ फैबिफ्लू को बाजार में उतारा है।
भारत में कोविड संक्रमित रोगियों की संख्या में रोजाना करीब 12,000 रोगियों का इजाफा हो रहा है। इनमें से करीब 70 से 80 फीसदी रोगियों में कोविड-19 के हल्के लक्षण पाए गए हैं जिन्हें फैविपिराविर जैसी दवाओं की आवश्यकता होती है।

Advertisement
First Published - June 22, 2020 | 11:47 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement