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सार्वजनिक रिफाइनरियों में विदेशी स्वामित्व की अनुमति!

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Last Updated- December 12, 2022 | 4:21 AM IST

केंद्र सरकार सार्वज्निक क्षेत्र की तेलशोधक कंपनियों (रिफाइनरियों) का पूरा मालिकाना हक विदेशी कंपनियों को दे सकती है। हालांकि यह प्रावधान वास्तव में भारत पेट्रोलिय कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) के विनिवेश के लिए किया जा रहा है। मगर इसका मतलब यही होगा कि सार्वजनिक रिफाइनरियों में से एकाध को छोड़कर सभी पर विदेशी कंपनियों का पूर्ण स्वामित्व हो सकता है।
हालांकि सरकार ने अभी तय नहीं किया है कि रणनीतिक क्षेत्र के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की न्यूनतम संख्या कितनी होगी। रणनीतिक क्षेत्र की पहचान फरवरी 2021 में की गई थी। नियम में बदलाव संभवत: समूचे रिफाइनिंग क्षेत्र के लिए हो सकता है। तेल एवं गैस कंपनियों को विलय और अधिग्रहण में भी भारतीय प्रतिस्पद्र्घा आयोग की मंजूरी से 2017 में मुक्त कर दिया गया था। मामले की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने कहा कि यह छूट इसीलिए दी गई थी ताकि तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन में सरकार की हिस्सेदारी खरीद सके।
सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनिंग कंपनियों की बिक्री के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में बदलाव की जरूरत इसलिए है क्योंकि बीपीसीएल के लिए अभिरुचि पत्र जमा कराने वाली अधिकतर कंपनियों में विदेशी निवेश है।  हालांकि सरकार ने यह नहीं बताया है कि इसके लिए किन कंपनियों ने बोली लगाई है। अरबपति उद्योगपति अनिल अग्रवाल की वेदांत ने अपनी प्रवर्तक कंपनी वेदांत रिसोर्सेस के साथ विशेष उद्देश्यीय कंपनी बनाकर बीपीसीएल के अधिग्रहण के लिए अभिरुचि पत्र जमा कराया था। अन्य बोलीदाता ओपोलो मैनेजमेंट और आई स्क्वैयर्ड कैपिटल की थिंक गैस के नाम सामने आए हैं।
पीएसयू के लिए एफडीआई नियमों में बदलाव हेतु मंत्रिमंडल की अनुमति लेनी होगी और फिर उद्योग संवद्र्घन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईटीटी) उसे अधिसूचित करेगा।
पिछले साल घोषित आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकार की विनिवेश रणनीति में बदलाव की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था, ‘सरकार नई नीति की घोषणा करेगी, जो रणनीतिक क्षेत्रों और अन्य को मोटे तौर पर श्रेणियों में बांटेगी। सार्वजनिक उपक्रम वाले रणनीतिक क्षेत्र को अधिसूचित किया जाएगा और उनमें कम से कम एक सार्वजनिक उपक्रम होगा। निजी कंपनियों को भी उसमें अपनी भूमिका निभाने दी जाएगी।’ रणनीतिक क्षेत्र में चार से ज्यादा सार्वजनिक उपक्रम नहीं होंगे और बाकी का निजीकरण या विलय किया जाएगा अथवा उन्हें होल्डिंग कंपनी के तहत लाया जाएगा।

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First Published - May 28, 2021 | 11:33 PM IST

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