संकटग्रस्त सत्यम कंप्यूटर की और 3.62 फीसदी हिस्सेदारी संस्थागत निवेशक फिडेलिटी ने खरीद ली है। उसके पास पहले से ही 3.17 फीसदी शेयर थे। अब सत्यम में उसकी हिस्सेदारी बढ़कर 6.79 फीसदी हो गई है।
फिडेलिटी इसके साथ ही लार्सन ऐंड टुब्रो के बाद सत्यम में दूसरी सबसे बड़ी निवेशक बन गई है। उल्लेखनीय है कि पहले स्थान पर काबिज एलऐंडटी की कंपनी में 12.04 फीसदी हिस्सेदारी है। एलऐंड के अधिकारियों का दावा है कि कंपनी में उसका निवेश 670 करोड रुपये का है।
बंबई स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में सत्यम ने बताया कि एफआईएल ने प्रत्यक्ष और परोक्ष तरीके से उसके शेयर खरीदकर अपनी हिस्सेदारी बढ़ा ली है। उधर बंबई स्टॉक एक्सचेंज में कंपनी के शेयरों में 8.43 फीसदी का उछाल आया और यह 54.05 रुपये प्रति शेयर तक चला गया।
कंपनी के मुताबिक, फिड फंड्स मॉरीशस लिमिटेड ने 52.91 रुपये प्रति शेयर के औसत मूल्य पर 0.61 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है। यह संस्था फिडेलिटी इंवेस्टमेंट मैनेजमेंट का एक पंजीकृत विदेशी संस्थागत निवेशक सब-अकाउंट है।
फिडेलिटी ने बुधवार को भी नैशनल स्टॉक एक्सचेंज से दो थोक सौदों के जरिए 91.50 करोड़ रुपये में 1.71 करोड़ शेयर खरीदे थे, जो कंपनी की 2.53 फीसदी हिस्सेदारी के बराबर है।
लार्सन ऐंड टुब्रो के कार्यकारी उपाध्यक्ष आर शंकर रमन ने शुक्रवार को बताया कि सत्यम कंप्यूटर्स में उसका निवेश 650 से 670 करोड़ रुपये का है।
कंपनी के 4.48 फीसदी शेयर सीधे एलऐंडटी कैपिटल ने खरीदे हैं। वहीं 8 फीसदी से कम हिस्सेदारी प्रत्यक्ष तौर पर एलऐंडटी ने खरीदा है। इसने कंपनी के शेयर दिसंबर 2008 से शुरू की थी।
लार्सन ऐंड टुब्रो के अध्यक्ष (मशीनरी ऐंड इंडस्ट्रियल प्रॉडक्ट्स) जे पी नायक ने बताया, ‘सत्यम मामले में क्या होगा, यह सत्यम का बोर्ड तय करेगा न कि एलऐंडटी। चूंकि हम उसके बोर्ड का फैसला नहीं जानते, इसलिए कंपनी में और हिस्सेदारी बढ़ाने या निवेश करने के बारे में हम कोई प्रतिक्रिया जाहिर नहीं करेंगे।
हमने सरकार से कभी लिखित रूप में सत्यम में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए नहीं कहा है। यही नहीं इस मसले पर हम सेबी के पास भी नहीं जाएंगे।’