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लगातार तीसरे महीने में भी निर्यात रहेगा धीमा

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Last Updated- December 09, 2022 | 5:52 PM IST

दिसंबर, 2008 में लगातार तीसरे महीने भारतीय निर्यात में गिरावट दर्ज हो सकती है। वैश्विक मंदी की वजह से खासकर अमेरिका और यूरोप में खरीदारों की ओर से ठेकों को रद्द कराया जाने है।


पिछले 7 वर्षों में निर्यात में गिरावट के लिहाज से यह पहली तिमाही है, जिसमें तीनों महीनों में लगातार गिरावट दर्ज हो सकती है। वाणिज्य मंत्रालय के शुरुआती अनुमान में दिसंबर के निर्यात में गिरावट 10 फीसदी बताई गई है।

अक्टूबर और नवंबर में क्रमश: 12 और 9.9 फीसदी की गिरावट के बाद भारत को मौजूदा वित्त वर्ष में 200 अरब डॉलर के निर्यात लक्ष्य को पूरा करना मुश्किल लग रहा है।

एक सरकारी अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘शुरुआती खबरों में कहा गया कि दिसंबर के दौरान निर्यात में गिरावट का स्तर नवंबर की गिरावट के समान ही है।

पिछली त्रैमासिक गिरावट 2001 में देखी गई थी जब निर्यात में लगातार 6 महीने तक गिरावट जारी रही थी। उस गिरावट से संबंधित आंकड़े रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) और वाणिज्य मंत्रालय की ओर से मुहैया कराए गए थे।’

हालांकि दिसंबर में निर्यात से संबंधित निर्णायक आंकड़ा 1 फरवरी, 2009 को जारी किया जाएगा। इस तारीख तक विभिन्न समुद्रों और हवाई अड्डों, जिनके जरिये भारतीय सामान देश से बाहर भेजा गया, से ताजा आंकड़ा हासिल हो जाएगा।

ताजा अनुमानों में बताया गया है कि दिसंबर में भारत का निर्यात वर्ष 2007 के समान महीने के 12.82 अरब डॉलर की तुलना में लगभग 11.5 अरब डॉलर होगा। वर्ष 2007 में निर्यात में 20.8 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया था।

यदि दिसंबर के शुरुआती अनुमानों पर विचार किया जाए तो 2008 की तीसरी तिमाही में वस्तुओं का किया गया कुल निर्यात 2007 में समान अवधि में 33.62 फीसदी के विकास के मुकाबले में 12 फीसदी कम है। पिछले पूरे वित्त वर्ष में कुल निर्यात में तीसरी तिमाही का योगदान 24 फीसदी, सबसे बढ़िया प्रदर्शन रहा।

पूरे वित्त वर्ष के प्रदर्शन के बारे में सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘इस वित्त वर्ष में हमें 175 अरब डॉलर हासिल होने की संभावना है। हालांकि मौजूदा मंदी को देखते हुए यह 2007-08 के स्तरों (162 अरब डॉलर) के आसपास ही रह सकता है।’

मूडीज इकोनॉमी के अर्थशास्त्री शेरमन चान के मुताबिक भारत के निर्यात के लिए अल्पावधि परिदृश्य सख्त है और मूल्य प्रतिस्पर्धा भारतीय निर्यात के लिए ज्यादा मददगार साबित नहीं हो सकती। दूसरी तरफ कमजोर मुद्रा व्यापार के लिए एक खतरा है।

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First Published - January 5, 2009 | 11:22 PM IST

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