वाहन बाजार की गलाकाट प्रतिस्पद्र्धा में दूसरी कंपनियों पर अपनी बढ़त बनाए रखने के लिए देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजूकी नये रास्ते तलाश करने में जुट गई है।
कंपनी कंप्रेस्ड नैचुरल गैस(सीएनजी), इलेक्ट्रिक कार जैसे वैकल्पिक ईंधनों से चलने वाली कारें घरेलू बाजार में पेश करने की रणनीति पर काम कर रही है और इसके लिए कंपनी ने तीन मौजूदा मॉडलों का चयन भी कर लिया है।
मारुति सुजूकी के प्रबंध निदेशक शिंजो नाकानिशी कहते हैं, ‘हम भारतीय बाजार के लिए इलेक्ट्रिक तकनीक से चलने वाली कार तैयार कर रहे हैं। लेकिन इसे बाजार में आने में पांच साल का वक्त लग सकता है।’
कंपनी के अध्यक्ष आर सी भार्गव का भी इस बारे में यह कहना है, ‘हम मल्टी फ्यूल मॉडलों पर काम कर रहे हैं और सीएनजी के लिए तो कुछ मॉडलों का चयन भी कर लिया गया है। फिलहाल सीएनजी किट लगाने की कीमत 40,000 रुपये तक आ रही है और यह काफी महंगा है। वैसे जब 2010 या 2011 तक रिलायंस जैसी कंपनियां शहरों में सीएनजी बेचना शुरू कर देंगी, तभी ये कारें बाजार में आ पाएंगी।’
जापान की सुजूकी मोटर कॉर्पोरेशन (एसएमसी) की मारुति सुजूकी में 54.2 फीसदी हिस्सेदारी है। कंपनी वैकल्पिक ईंधन से चलने वाली कार बनाने के लिए शोध एवं विकास (आर ऐंड डी) के क्षेत्र में पहले ही कई कदम उठा चुकी है। साथ ही इस मामले में सहयोग के लिए उसने अमेरिका की दिग्गज ऑटो कंपनी जनरल मोटर्स के साथ गठजोड़ भी किया है।
जापान में हाइब्रिड तकनीक के शोध एवं विकास के लिए कंपनी एसएक्स 4 का इस्तेमाल करती है। यह कार भारत में भी उपलब्ध है। लेकिन नाकानिशी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि कंपनी भारत में भी इसी तकनीक का ही इस्तेमाल करेगी। उन्होंने कहा कि देसी बाजार में हाइब्रिड कार पेश करने में दो चुनौतियां सबसे ऊपर हैं, एक बेहतर माइलेज और दूसरा कार की कीमत कम रखना।
कहा जा रहा है कि फिलहाल जो हाइब्रिड कार बाजार में मौजूद है, वह माईलेज के हिसाब से उतनी बेहतर नहीं है। एक बार चार्ज होने के बाद यह 120 किलोमीटर तक चल सकती है। अगर दो लोग कार में सवार हो जाएं तो माईलेज घटकर आधा यानी 60 किलोमीटर और तीन सवारियां होने पर एक चौथाई यानी 30 किलोमीटर रह जाता है।
वैकल्पिक ईंधन से चलने वाली कारें पेश करेगी कंपनी
सीएनजी और बैटरी से चलने वाली कार बनाने की तैयारी
सीएनजी कार आएगी 2-3 साल में और इलेक्ट्रिक कार के दीदार 5 साल में
माइलेज ज्यादा और कीमत कम रखना है कंपनी के सामने चुनौती