पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत को लेकर निजी तेल कंपनियों और सार्वजनिक तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) की बीच की तकरार अब और तेज होने के आसार हैं।
उल्लेखनीय है कि सरकारी तेल कंपनियों ने निजी कंपनियों द्वारा उठाए गए मामले की सुनवाई कर रहे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) के अधिकार को विद्युत अपील न्यायाधिकरण (एप्टेल) में चुनौती दे रखी है।
सरकारी तेल विपणन कंपनियों की चुनौती पर सुनवाई करते हुए एप्टेल ने बीते 9 अप्रैल को बोर्ड को आदेश दिया कि वह 30 अप्रैल तक इस मामले की सुनवाई न करे। वह इसलिए कि एप्टेल उसी दिन अपना फैसला सुनाने वाला है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज, एस्सार ऑयल और शेल इंडिया जैसी निजी तेल कंपनियों ने कीमत के मामले में जबरदस्ती का आरोप लगाते हुए सार्वजनिक तेल विपणन कंपनियों इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के विरुद्ध मामला दायर किया था।
निजी कंपनियों ने पीएनजीआरबी के यहां दायर अपील में कहा था कि सरकारी तेल विपणन कंपनियों पर जुर्माना लगाए। इसके बाद, आईओसी ने बोर्ड के अधिकार क्षेत्र को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की। उच्च न्यायालय ने कहा कि विद्युत अधिनियम के तहत एप्टेल ही इस मामले की सुनवाई करने की उपयुक्त संस्था है।
एप्टेल में मामला दायर करने वाली आईओसी के वकील ने कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत एक नीतिगत मसला है। इसका निर्धारण सरकार के ऊंचे स्तर पर किया जाता है। कीमत पर सरकारी कंपनियों का कोई नियंत्रण नहीं होता और सब कुछ सरकार ही तय करती है। आईओसी के सुर में सुर मिलाते हुए ओएनजीसी और ऑयल इंडिया ने भी साथ में अपील दायर की है।