लॉजिस्टिक और शिपिंग फर्म डीएचएल एक्सप्रेस का भारत में कामकाज कंपनी के वैश्विक कारोबार की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रहा है। कंपनी को उम्मीद है कि अगले दशक में भी भारत उसके लिए वृद्धि का प्रमुख बाजार बना रहेगा। यह बात कंपनी के एक वरिष्ठ कार्यकारी ने कही।
डीएचएल एक्सप्रेस (दक्षिण एशिया) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और डीएचएल एक्सप्रेस इंडिया के प्रबंध निदेशक आर एस सुब्रमण्यन ने कहा कि मुद्रा में उतार-चढ़ाव के बावजूद कंपनी भारत में अपने 1 अरब यूरो के निवेश को बनाए रखने की योजना बना रही है। बता दें कि दक्षिण कोरिया और जापान जैसी अर्थव्यवस्थाओं के लिए मुद्रा में उतार-चढ़ाव चिंता का विषय रहा है। साथ ही मुद्रा में उठापटक के असर को कुछ हद तक कम करने के लिए डीएचएल ने 1 अगस्त से करेंसी इफेक्ट्स इंडेक्स (सीएफएक्स) शुरू किया है।
पिछले एक साल से ज्यादा समय से, खास तौर पर फरवरी के आखिर में शुरू हुए पश्चिम एशिया संकट के बाद से रुपये में उठापटक देखी जा रही है। पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से डॉलर के मुकाबले रुपये में 4.65 फीसदी की गिरावट आई है जबकि पिछले एक साल में डॉलर के मुकाबले इसमें 8.2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
डीएचएल आम तौर पर यह मानता है कि रुपया, यूरो या डॉलर के मुकाबले सालाना 2-3 फीसदी की दर से कमजोर होगा और इसे अपनी मूल्य निर्धारण में शामिल करता है। हालांकि इससे अधिक मूल्यह्रास एक अंतर पैदा करता है।
सुब्रमण्यन ने कहा कि डीएचएल एक्सप्रेस इंडिया का हमेशा से यह लक्ष्य रहा है कि वह देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की तुलना में लगभग 1.5 गुना तेजी से बढ़े और इस लक्ष्य से भी आगे निकले। सुब्रमण्यन ने कहा कि भारत में 5 से 10 साल की अवधि में कंपनी की सालाना चक्रवृद्धि दर (सीएजीआर) आम तौर पर इस (जीडीपी) बेंचमार्क से 1 से 2 फीसदी ज्यादा रही है। जून 2026 में खत्म हुई तिमाही में डीएचएल समूह की आय 13 फीसदी बढ़कर 22.4 अरब यूरो रही। कंपनी का परिचालन मुनाफा 30 फीसदी बढ़कर 1.9 अरब यूरो रहा।
सुब्रमण्यन के अनुसार दुनिया भर में भारत की चर्चा ‘बहुत सकारात्मक रूप से’ हो रही है और इंजीनियरिंग, विनिर्माण, वाहन, इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में निवेश हो रहा है।
कंपनी ने पिछले साल भारत में 1 अरब यूरो के निवेश की घोषणा की थी और दुनिया भर में उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता के बावजूद यह योजना सही रास्ते पर चल रही है। इस योजना में 2025 से 2030 तक भारत में डीएचएल के सभी व्यवसाय शामिल होंगे।
सुब्रमण्यन ने कहा, ‘निवेश रोकने का विचार नहीं है।’ घोषणा के बाद से डीएचएल ने दिल्ली में अपनी उपस्थिति का विस्तार किया है, बेंगलूरु हवाई अड्डे के पास एक विस्तारित सुविधा और दो सेवा केंद्र खोले हैं तथा और भी कई योजनाओं पर काम चल रहा है। बेंगलूरु, मुंबई और दिल्ली में लंबी अवधि की योजनाएं भी हैं जिसमें इलेक्ट्रिक वाहनों सहित बेड़े का विस्तार भी शामिल है।
सुब्रमण्यन ने कहा कि 1 अरब यूरो निवेश की घोषणा हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण थी मगर 2030 तक वास्तविक निवेश इससे अधिक हो सकता है। डीएचएल ने अपने आईटी विकास केंद्र का चेन्नई से इतर विस्तार कर कुल 5 जगह कर दिया है, जिसमें मुंबई, बेंगलूरु, हैदराबाद और इंदौर में केंद्र जोड़े गए हैं। ये केंद्र सभी डिवीजनों में डीएचएल की वैश्विक प्रणालियों के लिए सॉफ्टवेयर विकास और रखरखाव को संभालते हैं।
सुब्रमण्यन ने कहा कि रुपया कमजोर होने से डीएचएल एक्सप्रेस के लिए जोखिम उन व्यवसायों की तुलना में ज्यादा है जो अल्पकालिक अनुबंधों पर काम करते हैं। डीएचएल ने 1 अगस्त को मुद्रा प्रभाव सूचकांक पेश किया है। ईंधन अधिभार के समान यह शुल्क तब लागू होता है जब रुपया एक निर्दिष्ट सीमा से अधिक कमजोर होता है और जब रुपया तय सीमा से नीचे चला जाता है तो यह स्वचालित रूप से शून्य हो जाता है।
सुब्रमण्यन के अनुसार, ‘इस समीक्षा के हिस्से के रूप में हम 1 अगस्त, 2026 से भारत में टाइम डेफिनिट इंटरनैशनल (टीडीआई) शिपमेंट पर मुद्रा प्रभाव तंत्र लागू कर रहे हैं। यह हमारे सभी ग्राहकों के लिए संरचित और पारदर्शी तरीके से, मुद्रा अस्थिरता और विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव से जुड़ी परिचालन लागत में महत्त्वपूर्ण वृद्धि को वहन करने के लिए सूत्र-आधारित समायोजन है।’
उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर 220 देशों और कई मुद्रा क्षेत्रों में डीएचएल की उपस्थिति स्वाभाविक हेजिंग प्रदान करती है। हालांकि कुछ मुद्रा के उतार-चढ़ाव को स्थानीय रूप से प्रबंधित करने की आवश्यकता होती है।
सुब्रमण्यन ने कहा, ‘मुद्रा अवमूल्यन चर्चा का विषय है लेकिन हर देश में नहीं। इस समय यह भारत में चर्चा का विषय है। कोरिया में एक मुद्दा है और संभवतः जापान में भी। कई जगहों पर व्यापार डॉलर में होता है इसलिए अनुबंध और मूल्य सूची डॉलर में होती है और कवर करने के लिए कोई मुद्रा जोखिम नहीं होता है।’
सुब्रमण्यन ने कहा, ‘कोई भी ग्राहक, स्थानीय या वैश्विक जिसके साथ हम बातचीत करते हैं, उसके पास भारत में 4 से 8 साल का विस्तार रोडमैप नहीं है।’ उन्होंने कहा कि विशेष रूप से इंजीनियरिंग और विनिर्माण में तेजी से क्षमता बनाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि डेटा सेंटर, बिजली की आपूर्ति, बिजली भंडारण, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली, पानी और जल उपचार सहित अपने व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र में भी मांग पैदा कर रहे हैं। सुब्रमण्यन ने कहा कि ‘हेवीवेट एक्सप्रेस’ की शुरुआत डीएचएल एक्सप्रेस इंडिया का 2026 में सबसे अहम कदम रहा है। यह सर्विस उन स्थितियों में काम आती है जब आपूर्ति श्रृंखला में रुकावटों के कारण भारी शिपमेंट (जिन्हें आम तौर पर एक्सप्रेस शिपमेंट नहीं माना जाता) की तेजी से डिलीवरी की जरूरत होती है।