कोरोना महामारी के बाद शेयर बाजार में आई तेजी ने देश के अरबपति प्रवर्तकों की झोली और भर दी। धनकुबेरों की जमात (सुपर-रीच क्लब) में रिकॉर्ड 90 अरबपति शामिल हो गए हैं, जबकि दिसंबर 2019 के अंत में अरबपति प्रवर्तकों की संख्या 80 थी। इन अरबपतियों की एकीकृत संपत्ति करीब 483 अरब डॉलर (लगभग 35.5 लाख करोड़ रुपये) हो गई है, जो एक साल पहले के 364 अरब डॉलर से 33 फीसदी अधिक है। इन अरबपति प्रवर्तकों की एकीकृत संपत्ति देश के सकल घरेलू उत्पाद का करीब 20 फीसदी (मौजूदा भाव पर डॉलर में बदलने पर) है।
इसके उलट अंतरराष्टï्रीय मुद्रा कोष का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2021 में देश का सकल घरेलू उत्पाद 9.6 फीसदी घटकर करीब 2.6 लाख करोड़ डॉलर रह सकती है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुकेश अंबानी शीर्ष स्थान पर काबिज हैं। उनकी कुल संपत्ति पिछले 12 महीने में 37.2 फीसदी बढ़कर 88 अरब डॉलर (6.44 लाख करोड़ रुपये) पर पहुंच गई। 2019 में अंबानी की संपत्ति 47 फीसदी बढ़ी थी। अंबानी ने 2020 में अपनी संपत्ति में 21.5 अरब डॉलर का इजाफा किया है। दूसरे शब्दों में कहें तो इस साल उनकी संपत्ति प्रतिदिन 480 करोड़ रुपये बढ़ी है।
अदाणी समूह के गौतम अदाणी की संपत्ति 2020 में सबसे ज्यादा बढ़ी है। अदाणी परिवार की कुल संपत्ति 2020 में दोगुनी होकर 41 अरब डॉलर के करीब हो गई, जो एक साल पहले 20 अरब डॉलर थी। अदाणी ग्रीन, अदाणी पोट्र्स ऐंड सेज और अदाणी एंटरप्राइजेज के शेयरों में उछाल से उनकी संपत्ति में तेज इजाफा हुआ है। अदाणी समूह की सूचीबद्घ कंपनियों का एकीकृत बाजार पूंजीकरण गुरुवार को दोगुना होकर 4.18 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल के अंत में 2 लाख करोड़ रुपये था। समूह की सूचीबद्घ कंपनियों में अदाणी परिवार के पास 73 फीसदी हिस्सेदारी है जबकि उद्योग जगत में प्रवर्तकों के पास अपनी कंपनियों की औसतन 47 फीसदी हिस्सेदारी है। यही वजह है कि अदाण्ी समूह के प्रवर्तकों की संपत्तियों में ज्यादा इजाफा हुआ है।
तकनीकी क्षेत्र के उद्यमियों जैसे विप्रो के अजीम प्रेमजी, एचसीएल टेक के शिव नाडार और इन्फोसिस के संस्थापकों की शुद्ध परसंपत्तियों में वर्ष 2020 में बड़ी उछाल देखी गई। निवेशकों ने इन कंपनियों के शेयरों में काफी दिलचस्पी दिखाई। इस वर्ष जिन अन्य प्रवर्तकों की संपत्ति में उछाल आई उनमें एशियन पेंट्स के प्रवर्तक (48 प्रतिशत तेजी), एवेन्यू सुपरमार्ट के आर के दमानी (41 प्रतिशत), सुनील मित्तल (21 प्रतिशत) और इन्फोसिस के संस्थापक (66 प्रतिशत तक) शामिल हैं। सूचीबद्ध कंपनियों के प्रवर्तकों की संपत्ति करीब 41.6 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है। यह एक वर्ष पहले के 31.3 लाख करोड़ रुपये से 33 प्रतिशत अधिक है। हालांकि इस सूची में शीर्ष प्रवर्तकों का दबदबा बरकरार है। कुल मिलाकर वर्ष 2020 में सभी 10 प्रवर्तकों ने मौजूदा विनिमय दर पर अपनी संपत्ति में 76 अरब डॉलर रकम का इजाफा किया।